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इस बैंक के डायरेक्टरों को हटाने पर हाईकोर्ट का स्टे
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
Updated Wed, 18 Nov 2015 02:49 PM IST
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सिटीजन कोआपरेटिव बैंक के बोर्ड आफ डायरेक्टर्स को हटाने के आदेश पर हाईकोर्ट ने स्टे लगा दिया है। बैंक के चेयरमैन दिनेश गुप्ता की ओर से इस संबंध में दायर याचिका की सुनवाई के बाद जस्टिस बंसी लाल भट ने आदेश दिया।
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रजिस्ट्रार कोआपरेटिव सोसाइटीज (श्रीनगर) की ओर से 17 सितंबर 2015 को जारी आदेश को कोर्ट में चुनौती दी गई थी, जिसमें कोआपरेटिव सोसाइटीज के ज्वाइंट डायरेक्टर (बैंकिंग एंड फाइनेंस) इंदरजीत को बैंक के रोजाना की गतिविधियों को संचालित करने के लिए प्रशासक नियु्क्त किया गया था।
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साथ ही चुनावी प्रक्रिया से बैंक के बोर्ड आफ डायरेक्टरों का गठन करने को कहा गया था। याचिकाकर्ता के वकील अभिनव शर्मा ने अदालत में कहा कि सिटीजन कोआपरेटिव बैंक संस्था 1960 से कार्यरत है और मुख्य रूप से बैंकिंग सेक्टर से जुड़ी है।
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सहकारिता अधिनियम का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि सोसाइटी का सदस्य उसका शेयरहोल्डर ही हो सकता है। कमेटी का कार्यकाल तीन साल के लिए होता है। एक कमेटी का कार्यकाल समाप्त होने के 90 दिन पहले ही चुनाव करवाने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है।
यदि उसमें कमेटी का गठन नहीं होता है तो सरकार प्रशासनिक बोर्ड या प्रशासक नियुक्त कर चुनाव संपन्न करवा सकती है। जो तीन माह के लिए ही होंगे।
सरकार ने इससे पहले जैकफेड, स्टेट कोआपरेटिव एग्रिकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट बैंक, स्टेट कोआपरेटिव बैंक बारामुला, सेंट्रल कोआपरेटिव बैंक जैसे सहकारिता संस्थाओं में समय-समय पर अपना प्रशासक या बोर्ड आफ मैनेजमेंट नियुक्त करती रही है। लेकिन किसी भी कोआपरेटिव सोसाइटी में अंतिम प्राधिकारी उसके सदस्य ही होते हैं।
दलील में वकील ने सरकार के कई एसआरओ का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि 25 अगस्त 2015 को रजिस्ट्रार ने याचिकाकर्ता को सूचित किया कि एसआरओ 236 (2013) पर स्टे लगा दिया। उसी के आधार पर एक्शन लिया जाएगा। 26 अगस्त 2015 को उन्होंने रजिस्ट्रार को आग्रह किया कि सोसाइटी के चुनाव का समय तय किया जाए।
लेकिन उधर से कोई जवाब नहीं आया। साथ ही प्रबंधन का कार्यकाल तब तक बढ़ा दिया, जब तक चुनाव आयोजित नहीं होते। 16 सितंबर को रजिस्ट्रार ने सूचित किया कि बैंक प्रबंधन अकेले चुनाव आयोजित नहीं कर सकता।
साथ ही प्रबंधन को चुनाव करवाने पर रोक लगा दी। दलीलें सुनने के बाद जस्टिस ने आदेश पर रोक लगा दी और प्रतिवादी को नोटिस जारी करते हुए अपना पक्ष रखने को कहा।