राज्य में बाढ़ राहत का काम उत्तराखंड से अधिक
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श्रीनगर में देश के विभिन्न हिस्सों से राहत सामग्री भेजने का क्रम भी जोरों से चल रहा है। वायु सेना के सी17, सी130जे, आईएल 76 और एएन 32 एयरक्राफ्ट दिन-रात काम पर लगे हैं। अभी वायु सेना के जहाज750 फेरे लगा चुके हैं, जिसमें 400 टन राहत सामग्री लोगों को बांटी गई है।
एयर वाइस मार्शल उपकारजीत सिंह के अनुसार जम्मू कश्मीर में आई बाढ़ के लिए चलाया गया आपरेशन राहत द्वितीय पिछले वर्ष उत्तराखंड की बाढ़ के दौरान चलाए गए राहत अभियान से बहुत बड़ा है। उन्होंने कहा, दोनों त्रासदियों को आपस में जोड़ना सही नहीं है लेकिन जम्मू कश्मीर में जो बचाव और राहत अभियान चलाया गया है, वह बहुत बड़ा है।
उन्होंने बताया कि कश्मीर में लोगों को रिलीफ देने का काम कुछ कठिन है, क्योंकि लोगों के घरों की छतें तिरछी हैं और जो सामान हेलीकाप्टर से लोगों के लिए फेंका जाता है, वह पूरी तरह उन तक नहीं पहुंच पा रहा है।
एनडीआरएफ ने बोट अस्पताल स्थापित किए
नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (एनडीआरएफ) ने बचाव कार्यों के बाद अब लोगों तक बेहतर राहत पहुंचाने के लिए घाटी के विभिन्न क्षेत्रों में बोट अस्पताल स्थापित किए हैं। इसमें अधिक पानी वाले क्षेत्रों में बोट अस्पताल बनाकर लोगों तक चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं।
इसमें प्रशिक्षित डाक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की सेवाएं ली जा रही हैं। एनडीआरएफ के डीजी ओपी सिंह ने बताया कि बचाव के बाद लोगों तक बेहतर सुविधाएं पहुंचाना दूसरा चरण है। चूंकि अधिकांश बाढ़ पीड़ित शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर हुए हैं। ऐसे में पानी वाले क्षेत्रों में बोट अस्पतालों से चिकित्सा सुविधाएं दी जा रही हैं। इन बोटों में प्रभावित लोगों तक शीघ्र चिकित्सा पहुंचाई जा रही है।
अभी तक 34 टन राहत सामग्री और खाने का सामान प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचाया जा चुका है। घाटी में बचाव कार्यों के दौरान संकरी गलियों और अन्य दूसरे स्थानों पर चालीस बोट को नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा सौ बोट से बचाव और राहत कार्य जारी हैं। सेना अलग से बचाव और राहत कार्यों में काम कर रही है।