कड़ाके की ठंड में दगा दे रहा दिल, जम्मू-कश्मीर में हार्ट अटैक के मामले बढ़े, इन बातों का ध्यान रखें
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कोहरे और कड़ाके की ठंड के बीच दिल दगा दे रहा है। तापमान में गिरावट से हार्ट अटैक के मामलों में बढ़ोतरी हुई है। इसमें ब्लड प्रेशर (रक्तचाप) के उतार चढ़ाव को नजरअंदाज करना लोगों की सेहत बिगाड़ रहा है। सर्दी में ब्लड प्रेशर के साथ मोटापा, तनाव और हाइपरटेंशन सहित अन्य कारणों से हार्ट अटैक के मामलों में बढ़ोतरी हुई है। जीएमसी और सुपर स्पेशियलिटी जम्मू में रोजाना 10-12 हार्ट अटैक के मामले पहुंच रहे हैं।
असामान्य जीवनचर्या और शारीरिक गतिविधियां कम होने से अमूमन 40 की उम्र में होने वाले इस अटैक की शिकायत अब 25-30 साल के युवाओं में हो रही है। इसमें अधिकांश मामलों में पुरुष पीड़ित हैं। जीएमसी की इमरजेंसी में पहुंचने वाले अधिकांश मामले शहर से आ रहे हैं।
इसके अलावा डोडा, रामबन, राजोरी, पुंछ आदि जिलों से भी मामले पहुंच रहे हैं। इन पहाड़ी व दूरवर्ती इलाकों में कार्डियो विशेषज्ञ की कमी से अधिकतर मरीजों की राम भरोसे ही रहती है। उन्हें उचित उपचार के लिए जम्मू के अस्पतालों में आना पड़ता है।
सुपर स्पेशलिटी के कार्डियो यूनिट के एचओडी डा. सुशील शर्मा के अनुसार तापमान में गिरावट पर सर्दी में लोग शारीरिक गतिविधियां कम कर देते हैं। ऐसे मौसम में खानपान पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। लेकिन यह हानिकारक होता है। पारा गिरने के कारण शरीर में सामान्य 120/80 एमएम एचजी ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ जाता है।
इसमें कई लोगों के शरीर में खून का प्रेशर लगातार ऊपर रहता है। जिससे हाइपरटेंशन की चपेट में आकर लोगों में हार्ट अटैक की आशंका बढ़ जाती है। पुरुषों में हार्ट अटैक के लिए स्मोकिंग आदि जिम्मेदार हैं। महिलाओं में हार्ट अटैक के कम होने का कारण उनका नियमित माहवारी होना रहता है। लेकिन माहवारी रुकने पर ऐसी महिलाओं में मोटापा बढ़ने लगता है, जो हार्ट अटैक का कारण बनता है।