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Jammu News: मानसिक स्वास्थ्य पर टूटती चुप्पी, प्रदेश में एक लाख लोगों ने टेली मानस से मांगी मदद
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2022 में शुरू हुई थी सुविधा, अब समर्पित यूनिट तैयार, वीडियो कॉल से मानिसक रोगियों को मिल रही मदद
- विशेषज्ञ बोले-यह सकारात्मक बदलाव
अरुण कुमार
जम्मू। जम्मू-कश्मीर में मानसिक स्वास्थ्य अब टैबू नहीं रहा है। समाज में इसको लेकर धीरे-धीरे लेकिन बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। सालों तक चुप्पी, समाज के डर के साए में दबे मानिसक रोगों पर अब लोग खुलकर बात करने लगे हैं। इसका परिणाम है टेली-मानस सेवा है, जिसके माध्यम से अब तक एक लाख से अधिक लोगों ने परामर्श लिया है। देश में जहां परामर्श लेने वाले पुरुषों की संख्या ज्यादा है, वहीं जम्मू-कश्मीर में महिलाओं की सबसे ज्यादा कॉल आती है।
जम्मू-कश्मीर स्वास्थ्य विभाग ने अक्तूबर 2022 में टेली मानस सुविधा शुरू की थी। इसे विशेष रूप से मानसिक स्वास्थ्य से जूझ रहे लोगों की मदद के लिए शुरू किया था। इसके अब सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे है। यह सेवा ने सिर्फ लोगों का जीवन बचा रही है, बल्कि आर्थिक हिसाब से उनके लिए लाभदायक है। इस तरह सेवाएं के लिए लोगों को निजी अस्पतालों में हजारों रुपये परामर्श शुल्क देना पड़ता है, लेकिन यहां एक काॅल पर उन्हें यह सेवां निशुल्क मिल रही है।
जम्मू-कश्मीर में प्रतिदिन 150 से 200 कॉल आ रही हैं। हाल में हुए भारत- पाकिस्तान के बीच तनाव के बीच जम्मू, कठुआ, सांबा पुंछ और राजोरी जिले से सबसे ज्यादा परामर्श कॉल आए थे। अभी तक आए एक लाख से अधिक कॉल में से 87450 कॉल खुद उपयोगकर्ताओं द्वारा की गई। वहीं 15731 कॉल टेली मानस द्वारा की गई फॉलो- अप या आउटरीच कॉल्स थी। जनसंख्या के अनुपात में सबसे अधिक कॉल प्राप्त करने वाले राज्यों में जम्मू-कश्मीर सबसे ऊपर है। जम्मू-कश्मीर देश के सबसे व्यस्त टेली-मानस केंद्रों में भी शामिल है। आईएमएचएएनएस के परिसर में 19 काउंसलर, सात मनोरोग विशेष साइकेट्रिस्ट और आईएमएचएएनसएस कश्मीर की टीम के क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट का बैकअप स्टाफ तैनात है। लोग टेली मानस के 14416 नंबर पर निशुल्क कॉल कर सकते है।
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2023 में वीडियो परामर्श सेवाएं भी शुरू कीं
टेली मानस सेंटर में सोमवार से शुक्रवार तक वीडियो परामर्श सेवाएं शुरू हुई हैं। इन सेवाओं को देने में जम्मू-कस्मीर देश के सबसे अच्छे केंद्रों में से एक हैं। अक्तूबर 2023 में इस सेवा की शुरुआत की थी। अभी तक 400 से अधिक मरीज वीडियो परामर्श हो चुके हैं। इस सेवा के शुरू होने से बड़ी संख्या में अवसादग्रस्त लोगों की मदद की जा सकी है।
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इसे भी जानें
1-एलओसी से लगे क्षेत्र जैसे गुरेज, कर्णा, जम्मू संभाग के राजोरी, पुंछ, डोडा, किश्तवाड़, कठुआ व रियासी तक सेवा की पहुंच।
2- सबसे ज्यादा मामले अवसाद (38.5 प्रतिशत) के हैं। चिंता (एंग्जायटी) पैनिक अटैक, फोबिया के 20 प्रतिशत, परीक्षा कार्यस्थल या रिश्तों में तनाव के 9.27 प्रतिशत मामले।
3.4 प्रतिशम मामले में आत्महत्या की प्रवृति या प्रयास से जुड़े है।
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हमारी सेवा प्रदेश के हर क्षेत्र में है
जम्मू-कश्मीर में टेली मानस के सकारात्मक परिणाम मिल रहे है। हमारे पास विशेषज्ञों की टीम है जो लोगों की जीवन को बचा रही और सकारात्मक बदलाव ला रही है। हमने वीडियो परामर्श की सुविधा की है, जिससे और मजबूत करने की कोशिश है। हमारी सेवा प्रदेश के हर क्षेत्र में है।
प्रो. अरशद हुसैन, नोडल अधिकारी, टेली मानस, जम्मू-कश्मीर
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सुखद संकेत: मानसिक सेहत पर हो रही बात
टेली मानस आने से सकारात्मक बदलाव हुआ। मैं 40 साल से मनोचिकित्सक हूं। इंटरनेट आने से लोगों में जागरूकता बढ़ी है। मानसिक स्वास्थ्य से जूझ रहे 70 फीसदी लोगों को पहले इलाज ही नहीं लेते थे। स्कूल जाने वाले बच्चों को मनोचिकित्सक के पास लाने से लोग बचते थे। मनोचिकित्सक के पास कोई जाना नहीं चाहता था। यह सुखद संकेत है कि मानसिक सेहत पर बात हो रही है।
डॉ. जगदीप थापा, मनोचिकित्सक
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- विशेषज्ञ बोले-यह सकारात्मक बदलाव
अरुण कुमार
जम्मू। जम्मू-कश्मीर में मानसिक स्वास्थ्य अब टैबू नहीं रहा है। समाज में इसको लेकर धीरे-धीरे लेकिन बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। सालों तक चुप्पी, समाज के डर के साए में दबे मानिसक रोगों पर अब लोग खुलकर बात करने लगे हैं। इसका परिणाम है टेली-मानस सेवा है, जिसके माध्यम से अब तक एक लाख से अधिक लोगों ने परामर्श लिया है। देश में जहां परामर्श लेने वाले पुरुषों की संख्या ज्यादा है, वहीं जम्मू-कश्मीर में महिलाओं की सबसे ज्यादा कॉल आती है।
जम्मू-कश्मीर स्वास्थ्य विभाग ने अक्तूबर 2022 में टेली मानस सुविधा शुरू की थी। इसे विशेष रूप से मानसिक स्वास्थ्य से जूझ रहे लोगों की मदद के लिए शुरू किया था। इसके अब सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे है। यह सेवा ने सिर्फ लोगों का जीवन बचा रही है, बल्कि आर्थिक हिसाब से उनके लिए लाभदायक है। इस तरह सेवाएं के लिए लोगों को निजी अस्पतालों में हजारों रुपये परामर्श शुल्क देना पड़ता है, लेकिन यहां एक काॅल पर उन्हें यह सेवां निशुल्क मिल रही है।
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जम्मू-कश्मीर में प्रतिदिन 150 से 200 कॉल आ रही हैं। हाल में हुए भारत- पाकिस्तान के बीच तनाव के बीच जम्मू, कठुआ, सांबा पुंछ और राजोरी जिले से सबसे ज्यादा परामर्श कॉल आए थे। अभी तक आए एक लाख से अधिक कॉल में से 87450 कॉल खुद उपयोगकर्ताओं द्वारा की गई। वहीं 15731 कॉल टेली मानस द्वारा की गई फॉलो- अप या आउटरीच कॉल्स थी। जनसंख्या के अनुपात में सबसे अधिक कॉल प्राप्त करने वाले राज्यों में जम्मू-कश्मीर सबसे ऊपर है। जम्मू-कश्मीर देश के सबसे व्यस्त टेली-मानस केंद्रों में भी शामिल है। आईएमएचएएनएस के परिसर में 19 काउंसलर, सात मनोरोग विशेष साइकेट्रिस्ट और आईएमएचएएनसएस कश्मीर की टीम के क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट का बैकअप स्टाफ तैनात है। लोग टेली मानस के 14416 नंबर पर निशुल्क कॉल कर सकते है।
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2023 में वीडियो परामर्श सेवाएं भी शुरू कीं
टेली मानस सेंटर में सोमवार से शुक्रवार तक वीडियो परामर्श सेवाएं शुरू हुई हैं। इन सेवाओं को देने में जम्मू-कस्मीर देश के सबसे अच्छे केंद्रों में से एक हैं। अक्तूबर 2023 में इस सेवा की शुरुआत की थी। अभी तक 400 से अधिक मरीज वीडियो परामर्श हो चुके हैं। इस सेवा के शुरू होने से बड़ी संख्या में अवसादग्रस्त लोगों की मदद की जा सकी है।
इसे भी जानें
1-एलओसी से लगे क्षेत्र जैसे गुरेज, कर्णा, जम्मू संभाग के राजोरी, पुंछ, डोडा, किश्तवाड़, कठुआ व रियासी तक सेवा की पहुंच।
2- सबसे ज्यादा मामले अवसाद (38.5 प्रतिशत) के हैं। चिंता (एंग्जायटी) पैनिक अटैक, फोबिया के 20 प्रतिशत, परीक्षा कार्यस्थल या रिश्तों में तनाव के 9.27 प्रतिशत मामले।
3.4 प्रतिशम मामले में आत्महत्या की प्रवृति या प्रयास से जुड़े है।
हमारी सेवा प्रदेश के हर क्षेत्र में है
जम्मू-कश्मीर में टेली मानस के सकारात्मक परिणाम मिल रहे है। हमारे पास विशेषज्ञों की टीम है जो लोगों की जीवन को बचा रही और सकारात्मक बदलाव ला रही है। हमने वीडियो परामर्श की सुविधा की है, जिससे और मजबूत करने की कोशिश है। हमारी सेवा प्रदेश के हर क्षेत्र में है।
प्रो. अरशद हुसैन, नोडल अधिकारी, टेली मानस, जम्मू-कश्मीर
सुखद संकेत: मानसिक सेहत पर हो रही बात
टेली मानस आने से सकारात्मक बदलाव हुआ। मैं 40 साल से मनोचिकित्सक हूं। इंटरनेट आने से लोगों में जागरूकता बढ़ी है। मानसिक स्वास्थ्य से जूझ रहे 70 फीसदी लोगों को पहले इलाज ही नहीं लेते थे। स्कूल जाने वाले बच्चों को मनोचिकित्सक के पास लाने से लोग बचते थे। मनोचिकित्सक के पास कोई जाना नहीं चाहता था। यह सुखद संकेत है कि मानसिक सेहत पर बात हो रही है।
डॉ. जगदीप थापा, मनोचिकित्सक