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बरसात से पहले संभाग में डायरिया की दस्तक
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जम्मू। संभाग के कई जिलों में बरसात से पहले ही डायरिया ने दस्तक दी है। अस्पतालों में दूषित पानी और अस्वच्छता के कारण डायरिया से पीड़ित लोगों की संख्या बढ़ रही है। इसमें 0 से 5 साल तक के बच्चे ज्यादा प्रभावित हैं। शहर के ही प्रमुख जच्चा-बच्चा अस्पताल एसएमजीएस की ओपीडी में आधे डायरिया के मरीज आ रहे हैं। डाक्टरों के अनुसार आगामी मानसून के पहुंचने पर खासतौर पर पहाड़ी इलाकों में डायरिया के मामलों में तेजी से इजाफा होगा। मौजूदा समय में डायरिया का असर सप्ताह से दिख रहा है।
जम्मू-कश्मीर में अमूमन जून के आखिर या जुलाई के पहले सप्ताह में मानसून पहुंचता है। संभाग के कठुआ, उधमपुर, रियासी, राजोरी और जम्मू आदि जिलों में हर साल डायरिया सैकड़ों लोगों को प्रभावित करता है। कई बार समय पर उचित इलाज नहीं मिलने से कई लोगों की जान जा चुकी है। एसएमजीएस अस्पताल के बाल रोग विभाग के एचओडी डॉक्टर जीएस सैनी के अनुसार बरसात में ई-कोली बैक्टीरिया अधिक सक्रिय रहता है, जो डायरिया की मुख्य वजह होता है। इसमें दूषित पानी का सेवन करने से उल्टी और दस्त के साथ बुखार होता है। वर्तमान में जम्मू में पारा लगातार 42 से 44 डिग्री के बीच चल रहा है। ऐसे वातावरण में साफ-सफाई न रखने के कारण डायरिया बढ़ता है।
एनएचएम के संभागीय नोडल अधिकारी डॉक्टर प्रवीण योगराज का कहना है कि डायरिया के लक्षण में एक ही दिन में तीन से ज्यादा बार दस्त आना रहता है। इसमें दस्त पहले और बाद में कैसे आती है उस पर डायरिया का प्रभाव निर्भर करता है। गंदा पानी की अधिकांश पेट संबंधी बीमारियों का कारण बनता है। बच्चों को रोटा वायरस आम तौर पर अपनी चपेट में लेता है। इसी तरह इंट्राइटस मामले में मरीज को दस्त के साथ उल्टी नहीं आती है। जबकि कोलिट्स मामले में दस्त और उल्टी दोनों रहते हैं। एक साथ कई लोगों को डायरिया की चपेट में आने का मुख्य कारण दूषित खाना या पानी का सेवन करना है। इसमें किसी दावत में किसी पदार्थ में दूषित पानी का प्रयोग करने से डायरिया फैलता है। छोटे बच्चों को बोतल से दूध देने में सही साफ-सफाई न रखने पर भी डायरिया होता है। मां को कम से कम छह माह बच्चे को स्तनपान करवाना चाहिए। अस्पताल में जिंक स्रिप निशुल्क उपलब्ध है जो पीड़ित बच्चे को 14 दिन देना होता है।
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ये हैं डायरिया के लक्षण
- कोई पदार्थ खाने से पेट में दर्द होना
- सेहत अचानक बिगड़ना, उल्टी और दस्त एक साथ लगना
- हल्के या तेज बुखार की शिकायत होना
- पानी की कमी से मुंह का सूखना
बचाव
- दूषित पानी की आशंका पर पानी को उबाल कर पीएं
- खाना बनाने के बाद अधिक देर तक खुले में न रखें
- उल्टी या दस्त अधिक होने पर तुरंत इलाज लें
4. दुग्ध पदार्थों को सही तापमान में रखें
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जम्मू-कश्मीर में अमूमन जून के आखिर या जुलाई के पहले सप्ताह में मानसून पहुंचता है। संभाग के कठुआ, उधमपुर, रियासी, राजोरी और जम्मू आदि जिलों में हर साल डायरिया सैकड़ों लोगों को प्रभावित करता है। कई बार समय पर उचित इलाज नहीं मिलने से कई लोगों की जान जा चुकी है। एसएमजीएस अस्पताल के बाल रोग विभाग के एचओडी डॉक्टर जीएस सैनी के अनुसार बरसात में ई-कोली बैक्टीरिया अधिक सक्रिय रहता है, जो डायरिया की मुख्य वजह होता है। इसमें दूषित पानी का सेवन करने से उल्टी और दस्त के साथ बुखार होता है। वर्तमान में जम्मू में पारा लगातार 42 से 44 डिग्री के बीच चल रहा है। ऐसे वातावरण में साफ-सफाई न रखने के कारण डायरिया बढ़ता है।
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एनएचएम के संभागीय नोडल अधिकारी डॉक्टर प्रवीण योगराज का कहना है कि डायरिया के लक्षण में एक ही दिन में तीन से ज्यादा बार दस्त आना रहता है। इसमें दस्त पहले और बाद में कैसे आती है उस पर डायरिया का प्रभाव निर्भर करता है। गंदा पानी की अधिकांश पेट संबंधी बीमारियों का कारण बनता है। बच्चों को रोटा वायरस आम तौर पर अपनी चपेट में लेता है। इसी तरह इंट्राइटस मामले में मरीज को दस्त के साथ उल्टी नहीं आती है। जबकि कोलिट्स मामले में दस्त और उल्टी दोनों रहते हैं। एक साथ कई लोगों को डायरिया की चपेट में आने का मुख्य कारण दूषित खाना या पानी का सेवन करना है। इसमें किसी दावत में किसी पदार्थ में दूषित पानी का प्रयोग करने से डायरिया फैलता है। छोटे बच्चों को बोतल से दूध देने में सही साफ-सफाई न रखने पर भी डायरिया होता है। मां को कम से कम छह माह बच्चे को स्तनपान करवाना चाहिए। अस्पताल में जिंक स्रिप निशुल्क उपलब्ध है जो पीड़ित बच्चे को 14 दिन देना होता है।
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ये हैं डायरिया के लक्षण
- कोई पदार्थ खाने से पेट में दर्द होना
- सेहत अचानक बिगड़ना, उल्टी और दस्त एक साथ लगना
- हल्के या तेज बुखार की शिकायत होना
- पानी की कमी से मुंह का सूखना
बचाव
- दूषित पानी की आशंका पर पानी को उबाल कर पीएं
- खाना बनाने के बाद अधिक देर तक खुले में न रखें
- उल्टी या दस्त अधिक होने पर तुरंत इलाज लें
4. दुग्ध पदार्थों को सही तापमान में रखें