फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   HC calls for report from jail on non-appearance of Yasin Malik in terror case New Delhi

आतंकी फंडिंग केस: यासीन मलिक के पेश न होने पर हाईकोर्ट सख्त, जेल प्रशासन से मांगी रिपोर्ट

Wed, 14 Oct 2026 01:52 PM IST
Nikita Gupta अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: Nikita Gupta Updated Wed, 14 Oct 2026 01:52 PM IST
सार

दिल्ली हाईकोर्ट ने आतंकी फंडिंग मामले में यासीन मलिक के वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेश नहीं होने पर जेल प्रशासन से रिपोर्ट मांगी है और 9 दिसंबर को अगली सुनवाई पर उसे पेश करने का निर्देश दिया है।

विज्ञापन
HC calls for report from jail on non-appearance of Yasin Malik in terror case New Delhi
यासीन मलिक (फाइल फोटो) - फोटो : X @ANI

विस्तार

दिल्ली हाईकोर्ट ने आतंकी फंडिंग मामले में अलगाववादी नेता और जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के प्रमुख यासीन मलिक के अदालत में पेश नहीं होने पर जेल प्रशासन से रिपोर्ट तलब की है। बुधवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि मलिक को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यवाही में शामिल होना था लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अदालत ने संबंधित जेल अधीक्षक से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी है।

विज्ञापन
Trending Videos

न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति अरुण भारद्वाज की पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 9 दिसंबर को तय करते हुए निर्देश दिया कि उस दिन यासीन मलिक को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश किया जाए।

हाईकोर्ट राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें आतंकी फंडिंग मामले में मलिक की उम्रकैद की सजा को बढ़ाकर मृत्युदंड देने की मांग की गई है। मलिक फिलहाल तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहा है। उसने पहले अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होकर एनआईए की याचिका का विरोध करने की इच्छा जताई थी।

विज्ञापन
विज्ञापन

जेल प्रशासन ने पहले अदालत से मलिक को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश करने की अनुमति मांगी थी। आवेदन में उसे बेहद उच्च जोखिम वाला कैदी बताते हुए सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के मद्देनजर अदालत में शारीरिक रूप से पेश करने से बचने की बात कही गई थी। हाईकोर्ट ने इस अनुरोध को मंजूरी दे दी थी।

2022 में सुनाई गई थी उम्रकैद की सजा
दिल्ली की एक विशेष अदालत ने 24 मई 2022 को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) और भारतीय दंड संहिता के तहत दोषी ठहराते हुए यासीन मलिक को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। मलिक ने आरोपों को स्वीकार कर लिया था। इसके बाद एनआईए ने सजा बढ़ाकर मृत्युदंड देने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में अपील दायर की।

एनआईए का तर्क है कि केवल दोष स्वीकार करने और मुकदमे का सामना नहीं करने के आधार पर किसी आतंकवादी को मृत्युदंड से बचने का लाभ नहीं मिलना चाहिए। एजेंसी ने यह भी कहा है कि मलिक के कई आतंकी संगठनों और लश्कर-ए-ताइबा के समर्थकों से संबंध रहे हैं।

वहीं, मलिक ने अपने जवाब में दावा किया था कि उसने करीब तीन दशकों तक जम्मू-कश्मीर में शांति स्थापित करने के लिए विभिन्न प्रधानमंत्रियों, खुफिया अधिकारियों और अन्य प्रभावशाली लोगों के साथ अनौपचारिक संवाद प्रक्रिया में भूमिका निभाई थी। विशेष अदालत ने पहले मृत्युदंड की मांग खारिज करते हुए कहा था कि मलिक के अपराध गंभीर हैं और भारत की एकता के लिए चुनौती थे, लेकिन यह मामला मृत्युदंड देने के लिए 'दुर्लभतम से दुर्लभ' श्रेणी में नहीं आता।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed