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कोरोना का असर: पटरी से उतर गया जम्मू-कश्मीर का प्राचीन हस्तशिल्प और हथकरघा उद्योग

Wed, 19 May 2021 12:16 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: जम्मू और कश्मीर ब्यूरो Updated Wed, 19 May 2021 12:16 AM IST
सार

प्रदेश में हजारों लोगों की आजीविका हथकरघा और हस्तशिल्प उद्योगों से जुड़ी है। ऐसे परंपरागत उद्योगों को बचाए रखने के लिए सरकार को आर्थिक सहायता और उत्पाद की बिक्री में मदद की जरूरत है।
 

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Corona infected Handicrafts and handloom related artisans continue to have difficulties for second consecutive year
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

लगातार दूसरे वर्ष कोरोना महामारी के कारण प्रदेश का प्राचीन हस्तशिल्प, हथकरघा उद्योग पटरी से उतर गया है। कोरोना कर्फ्यू और मांग की कमी से हुनरमंद हाथों पर आर्थिक मंदी की मार पड़ी है। प्रदेश में लगभग 40 हजार कारगीर हैंडलूम और हैंडीक्राफ्ट विभाग से पंजीकृत हैं, जबकि प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से तीन लाख से अधिक लोग इस कारोबार से जुड़े हैं। यह उद्योग सीधे तौर पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्थानीय लोगों के रोजगार से जुड़ा है। कोरोना के कारण प्रदेश में पर्यटकों का नहीं आना और अंतराष्ट्रीय स्तर पर मांग कम होने से इस कारोबार को बड़ा झटका लगा है।

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स्थानीय कारीगरों को पर्यटन सीजन का बड़ा इंतजार रहता है, लेकिन इस बार न पर्यटक पहुंच रहे हैं और न ही निर्यात के लिए बड़ी मांग है। कोरोना में दो वर्षों से बने हालात के कारण उत्पादों की मांग घट गई है, जिसका असर इस उद्योग से जुड़े लोगों पर हुआ है।
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हर साल एक हजार करोड़ तक का होता है निर्यात
विभाग के आकंडों के अनुसार पिछले पांच वर्षों में हथकरधा से जुड़े सामान का निर्यात एक हजार करोड़ रुपये से अधिक का हुआ है। 2014-15 की बात करें तो 1278.04 करोड़ रुपये का निर्यात हुआ है, जबकि 2015-16 में ये 1059.41, 2016-17 में 1151.12 करोड़, 2017-18 में 1090.12 जबकि 2018-19 में 917.66 करोड़ का निर्यात हुआ है। इसमें सबसे ज्यादा कारपेट, शॉल, पेपर माशी और चेन स्टिच हैं। वहीं पिछलेे दो सालों में निर्यात की संख्या में काफी कमी दर्ज हुई है।
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कोरोबार पूरी तरह से प्रभावित हुआ है। विदेशों से आने वाले ऑर्डर नहीं मिल रहे हैं, जिससे काम ठप पड़ा गया है। केवल एनजीओ के लिए सामान बन रहा है। सरकार की ओर से हमें कोई मदद नहीं मिली है। मदद की हमें सख्त जरूरत है। सरकार ने श्रमिकों के लिए आर्थिक मदद जारी की, लेकिन कारगीर और बुनकरों को अलग रखा, जो उचित नहीं है। सरकार को चाहिए वे कारगीरों की सुध ले।-पद्मश्री गुलाम रसूल, हस्तशिल्पी और कारीगर संघ के अध्यक्ष

सरकार की ओर से अभी कारगीरों को आर्थिक मदद देने की बात नहीं की गई है। अगर ऐसे कोई आदेश आता है तो हम उसपे काम करेंगे। जम्मू संभाग में 20 हजार से अधिक कारीगर और बुनकर पंजीकृत हैं। इन लोगों के सामान को बाजार उपलब्ध करने के लिए विभाग की ओर से प्रदर्शनी लगाई जाती है। इस वर्ष की शुरुआत में ऐसी प्रदर्शनी लगाई गई थी। कोरोना की हालात में सुधार आने के बाद प्रदर्शनी और ट्रेड फेयर का आयोजन किया जाएगा। -विकास गुप्ता, निदेशक हस्तशिल्प और हथकरघा निदेशालय जम्मू

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