आर्थिक जगत में अलग-थलग पड़ा जम्मू-कश्मीर,1 जुलाई से नहीं लागू होगा जीएसटी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जम्मू-कश्मीर एक जुलाई से आर्थिक क्षेत्र में अलग-थलग हो जाएगा। रियासत में पूरे देश के साथ एक जुलाई को अब जीएसटी लागू नहीं हो सकेगा। जीएसटी लागू करने के लिए विधानसभा सत्र में कश्मीर के हालत पर तो चर्चा हुई, लेकिन जीएसटी पर किसी ने एक शब्द भी नहीं कहा।
अलबत्ता संसदीय कार्य मंत्री ने इस मुद्दे को सदन की बिजनेस एडवाइजरी की बैठक में एजेंडा में शुमार करने की भी जरूरत नहीं समझी। बिजनेस एडवाइजरी कमेटी ने बैठक में तय कर लिया कि सिर्फ मृत सदस्यों को श्रद्धांजलि देकर सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया जाएगा। इससे पहले सर्वदलीय बैठक में इसका फैसला हो चुका था।
यानी जिस मुद्दे के लिए सत्र बुलाया गया, उस पर बिल्कुल चर्चा नहीं करने पर सभी दलों में आम सहमति बन गई। अब सर्वदलीय पैनल अपनी रिपोर्ट जुलाई में देगा। इसलिए ही मानसून सत्र में जीएसटी विधेयक पारित कराना संभव हो पाएगा। इस तरह जम्मू कश्मीर में जीएसटी कम से कम दो माह देरी से लागू होने की संभावना है।
रियासत को होगा 10 हजार करोड़ का नुकसान
अगर अलगाववादियों और विपक्ष का विरोध तब भी जारी रहा तो जीएसटी का मामला खटाई में पड़ सकता है। एक जुलाई से जीएसटी लागू नहीं होने के कारण अब रियासत को 10 हजार करोड़ का नुकसान होगा। साथ ही जम्मू कश्मीर की अर्थव्यवस्था चरमरा सकती है।
रियासत से फल और सामान बाहर भेजने में दिक्कत होगी। दूसरे राज्यों से आने वाले सामानों पर दो तरह के टैक्स लगेंगे। एक टैक्स जीएसटी के तहत होगा और दूसरा रियासत सरकार के कानून के तहत वसूला जाएगा। इससे सामानों के दाम बढ़ जाएंगे। रियासत को महंगाई झेलनी पड़ेगी।