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जेएंडके में हो रहा करोड़ों का गड़बड़झाला

Sat, 28 Mar 2015 01:40 PM IST
Updated Sat, 28 Mar 2015 01:40 PM IST
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grant not released due to irregularities in records

रियासत के विभिन्न विभागों में अनियमितताओं के चलते विकास कार्यों के लिए जारी करोड़ों की राशि पर रोक लग गई है। स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, गृह, विधि, सहकारिता, आवास और शहरी विकास विभाग में गड़बडि़यां पाई गई हैं। अनियमितताओं के चलते करीब 16.30 करोड़ की राशि मंजूर होने के बावजूद जारी नहीं हो पाई।

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यह खुलासा सोशल, जनरल, इकोनामिक (नान पीएसयू) सेक्टर के लिए कैग रिपोर्ट 2014 में किया गया है। कश्मीर के स्वास्थ्य सेवा निदेशक की ओर से घाटी के विभिन्न अस्पतालों में बेहतर उपचार की सुविधाएं मुहैया करवाने के लिए पांच सीटी स्कैन मशीनों की खरीद का प्रस्ताव सरकार को भेजा गया था।
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इस प्रस्ताव को सरकार ने 2010 में मंजूर कर 7.31 करोड़ की राशि जारी की। आडिट जांच में पाया गया कि एक फर्म को ही टेंडर मिले। सरकार ने सप्लाई आर्डर पर रोक लगा दी। इसके बाद विभाग ने दोबारा टेंडर जारी कर पहले वाली कंपनी को ही सप्लाई आर्डर जारी किया।

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यहां भी मिली गड़बड़

grant not released due to irregularities in records

2014 के जून महीने तक कंपनी से उपकरण हासिल नहीं हुए और 7.31 करोड़ की राशि ब्लाक हो गई। स्वास्थ्य विभाग में स्वास्थ्य सेवा निदेशक जम्मू ने डोडा जिले में 2008-09 में गुंदना और बारथ में प्राइमरी हेल्थ सेंटरों के निर्माण की जरूरत जताई थी। इसके लिए 1.55 करोड़ की राशि जारी हुई।

बहरहाल, आडिट जांच में मई 2012 में पाया गया कि विभाग की ओर से प्राइमरी हेल्थ सेंटरों के निर्माण के लिए निशानदेही की गई भूमि ही नहीं अधिग्रहित हुई। इस वजह से 1.55 करोड़ की राशि ब्लाक हो गई। विधि विभाग की ओर से जिला और सेशन जज डोडा की अदालत के निर्माण के लिए 2.12 करोड़ का प्रस्ताव प्रशासनिक मंजूरी के लिए भेजा गया था।

इसके लिए पूरी राशि को मंजूर कर दिया गया। आरएंडबी विभाग की ओर से जेकेपीसीसी को निर्माण कार्य सौंपा गया, लेकिन आडिट रिपोर्ट में पाया गया कि कोर्ट कांप्लेक्स के निर्माण के लिए जिस जगह की निशानदेही की गई उसे योग्य नहीं पाया गया।

...और रोक दी गई ग्रांट

grant not released due to irregularities in records

निर्माण एजेंसी ने नये सिरे से प्रोजेक्ट के निर्माण के लिए 12.07 करोड़ का प्रोजेक्ट प्रस्ताव भेजा। विभाग की ओर से निर्माण एजेंसी को फंड जारी करने से पूर्व जगह की निशानदेही को फाइनल करने में नाकाम रहने पर 2.12 करोड़ की राशि ब्लाक हो गई।

शहरी विकास विभाग की ओर से लघु और मध्यम कस्बों में शहरी ढांचा विकास योजना के तहत बेहतर सुविधाएं मुहैया करवाने के लिए संभाग के सात कसबों अखनूर, सुंदरबनी, सांबा, डोडा, भद्रवाह, पुंछ और कठुआ की निशानदेही हुई।

आडिट जांच में पाया गया कि सांबा, पुंछ और कठुआ में एनबीसीसी को 2.23 करोड़ की राशि जारी की गई। विभाग छह सालों में एनबीसीसी को भूमि उपलब्ध नहीं करवा पाया, जिससे यह राशि ब्लाक हो गई।

सहकारिता विभाग में भी केंद्रीय प्रायोजित योजना के तहत गोदामों के गैर योजनाबद्ध तरीके से निर्माण की वजह से 2.26 करोड़ की राशि का निवेश रुक गया।

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