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Jammu News: गर्मी की छुट्टियों के बाद कुप्रबंध के बीच खुले सरकारी स्कूल
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। गर्मी की 30 छुट्टियों के बाद सरकारी स्कूल खुले। सोमवार को पहले ही दिन चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई। कहीं बच्चों को झाड़ू हाथ में लेकर कक्षाओं सहित बरामदे की सफाई करनी पड़ी, ताे कहीं गंदगी के बीच सुबह की प्रार्थना सभा हुई। शहर के अधिकतर स्कूलों में ऐसे ही हालात देखने के लिए मिले। बायोमेट्रिक हाजिरी के कारण शिक्षक तो समय पर पहुंचे, लेकिन कक्षाएं देरी से लगीं।
यह खुलासा हायर सेकेंडरी से लेकर प्राइमरी स्कूलों में अमर उजाला की पड़ताल से हुआ। प्राइमरी स्कूलों में तो बच्चों की संख्या भी कम देखने के लिए मिली। 60 बच्चों के स्कूल में सिर्फ 12 ही स्कूल पहुंचे थे। सरकारी स्कूलों के बच्चों के साथ यूं तो हर संस्था स्वच्छता अभियान चलाती है, लेकिन स्वच्छता को लेकर कोई भी आगे नहीं आता। स्कूलों में सफाई कर्मी की तैनाती नहीं होने के कारण शिक्षक भी बच्चों से ही सफाई करवा रहे हैं।
सबसे पहले सुबह 8 बजे गवर्नमेंट गर्ल्स हाई स्कूल भगवती नगर का दौरा किया। शिक्षक कार्यालय में बैठे थे। कक्षाओं के ताले तक नहीं खुले थे। जो बच्चे स्कूल पहुंचे थे उनसे पहले परिसर में सफाई करवाई जा रही थी। कोई झाड़ू लगा रहा था तो कुछ बच्चे सूखे पत्ते उठा रहे थे। यह सिलसिला सुबह 8:30 बजे तक जारी था। इस स्कूल में 14 के करीब शिक्षक तैनात हैं।
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सुबह 8:15 बजे - एक तरफ प्रार्थना, दूसरी ओर सफाई
गर्वनमेंट गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल कनाल रोड में सुबह आठ बजे तक विद्यार्थी और शिक्षक पहुंच चुके हैं। एक तरफ विद्यार्थी प्रार्थना कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ सफाई हो रही है। स्कूल शुरू होने के बाद सफाई करवाई जा रही थी। पहला दिन था तो कक्षाएं भी समय पर नहीं लगीं। सफाई कर्मी तैनात नहीं होने से नगर निगम के कर्मी को बुलाया गया था। परिसर में जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे थे।
समय 8:20 - सफाई हो रही, पर पढ़ाई नहीं
गवर्नमेंट प्राइमरी स्कूल बेलीचराना में पहले दिन सिर्फ 12 बच्चे पहुंचे। स्कूल में 60 बच्चों का दाखिला है। दो ही शिक्षक हैं जो समय पर आए थे, लेकिन न प्रार्थना हुई न ही क्लास लगी। शिक्षक आया से सफाई करवा रहे थे। मिड-डे-मील बनने की तैयारी चल रही है।
...तो इसलिए बच्चाें से सफाई
1. बजट के बावजूद सुविधा नहीं : जम्मू-कश्मीर में शिक्षा के लिए 1,2,899 करोड़ रुपये बजट आवंटित किया है। प्रदेश में 1,76459 के करीब शिक्षक हैं। बजट का एक तिहाई हिस्सा शिक्षकों के वेतन पर खर्च हो रहा है। इसके बावजूद बच्चों के लिए सुविधाएं बढ़ाने पर जरा भी ध्यान नहीं दिया जा रहा।
2.अनुदान का कम प्रयोग : सरकारी स्कूलों में सफाई कर्मी के पद नहीं है। ऐसे में स्कूल शिक्षा विभाग सफाई व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए प्रति स्कूल दस हजार रुपये तक अनुदान देता है। इससे प्रबंधन सफाई कर्मी को संविदा पर रखते हैं।
3. निगरानी नहीं : शिक्षकों के काम की निगरानी सही प्रकार से नहीं हो रही। स्कूलाें में शिक्षक समय पर आ रहे हैं, लेकिन कक्षाएं देरी लगा रहे हैं।
4. निरीक्षण का अभाव : साेमवार काे स्कूल खुलने के दिन अधिकारियों के निरीक्षण की व्यवस्था नहीं थी। इसी कारण शर्मनाक तस्वीर सामने आई।
स्कूलों में सफाई के लिए अनुदान दिया जाता है। कुछ स्कूलों में सफाई की समस्या है। टीमें नियमित रूप से जांच कर रही हैं। बच्चों से सफाई करवाना गलत है। अगर ऐसा है तो स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
सूरज सिंह राठौड़, मुख्य शिक्षा अधिकारी जम्मू
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जम्मू। गर्मी की 30 छुट्टियों के बाद सरकारी स्कूल खुले। सोमवार को पहले ही दिन चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई। कहीं बच्चों को झाड़ू हाथ में लेकर कक्षाओं सहित बरामदे की सफाई करनी पड़ी, ताे कहीं गंदगी के बीच सुबह की प्रार्थना सभा हुई। शहर के अधिकतर स्कूलों में ऐसे ही हालात देखने के लिए मिले। बायोमेट्रिक हाजिरी के कारण शिक्षक तो समय पर पहुंचे, लेकिन कक्षाएं देरी से लगीं।
यह खुलासा हायर सेकेंडरी से लेकर प्राइमरी स्कूलों में अमर उजाला की पड़ताल से हुआ। प्राइमरी स्कूलों में तो बच्चों की संख्या भी कम देखने के लिए मिली। 60 बच्चों के स्कूल में सिर्फ 12 ही स्कूल पहुंचे थे। सरकारी स्कूलों के बच्चों के साथ यूं तो हर संस्था स्वच्छता अभियान चलाती है, लेकिन स्वच्छता को लेकर कोई भी आगे नहीं आता। स्कूलों में सफाई कर्मी की तैनाती नहीं होने के कारण शिक्षक भी बच्चों से ही सफाई करवा रहे हैं।
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सबसे पहले सुबह 8 बजे गवर्नमेंट गर्ल्स हाई स्कूल भगवती नगर का दौरा किया। शिक्षक कार्यालय में बैठे थे। कक्षाओं के ताले तक नहीं खुले थे। जो बच्चे स्कूल पहुंचे थे उनसे पहले परिसर में सफाई करवाई जा रही थी। कोई झाड़ू लगा रहा था तो कुछ बच्चे सूखे पत्ते उठा रहे थे। यह सिलसिला सुबह 8:30 बजे तक जारी था। इस स्कूल में 14 के करीब शिक्षक तैनात हैं।
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सुबह 8:15 बजे - एक तरफ प्रार्थना, दूसरी ओर सफाई
गर्वनमेंट गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल कनाल रोड में सुबह आठ बजे तक विद्यार्थी और शिक्षक पहुंच चुके हैं। एक तरफ विद्यार्थी प्रार्थना कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ सफाई हो रही है। स्कूल शुरू होने के बाद सफाई करवाई जा रही थी। पहला दिन था तो कक्षाएं भी समय पर नहीं लगीं। सफाई कर्मी तैनात नहीं होने से नगर निगम के कर्मी को बुलाया गया था। परिसर में जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे थे।
समय 8:20 - सफाई हो रही, पर पढ़ाई नहीं
गवर्नमेंट प्राइमरी स्कूल बेलीचराना में पहले दिन सिर्फ 12 बच्चे पहुंचे। स्कूल में 60 बच्चों का दाखिला है। दो ही शिक्षक हैं जो समय पर आए थे, लेकिन न प्रार्थना हुई न ही क्लास लगी। शिक्षक आया से सफाई करवा रहे थे। मिड-डे-मील बनने की तैयारी चल रही है।
...तो इसलिए बच्चाें से सफाई
1. बजट के बावजूद सुविधा नहीं : जम्मू-कश्मीर में शिक्षा के लिए 1,2,899 करोड़ रुपये बजट आवंटित किया है। प्रदेश में 1,76459 के करीब शिक्षक हैं। बजट का एक तिहाई हिस्सा शिक्षकों के वेतन पर खर्च हो रहा है। इसके बावजूद बच्चों के लिए सुविधाएं बढ़ाने पर जरा भी ध्यान नहीं दिया जा रहा।
2.अनुदान का कम प्रयोग : सरकारी स्कूलों में सफाई कर्मी के पद नहीं है। ऐसे में स्कूल शिक्षा विभाग सफाई व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए प्रति स्कूल दस हजार रुपये तक अनुदान देता है। इससे प्रबंधन सफाई कर्मी को संविदा पर रखते हैं।
3. निगरानी नहीं : शिक्षकों के काम की निगरानी सही प्रकार से नहीं हो रही। स्कूलाें में शिक्षक समय पर आ रहे हैं, लेकिन कक्षाएं देरी लगा रहे हैं।
4. निरीक्षण का अभाव : साेमवार काे स्कूल खुलने के दिन अधिकारियों के निरीक्षण की व्यवस्था नहीं थी। इसी कारण शर्मनाक तस्वीर सामने आई।
स्कूलों में सफाई के लिए अनुदान दिया जाता है। कुछ स्कूलों में सफाई की समस्या है। टीमें नियमित रूप से जांच कर रही हैं। बच्चों से सफाई करवाना गलत है। अगर ऐसा है तो स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
सूरज सिंह राठौड़, मुख्य शिक्षा अधिकारी जम्मू