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हिंदी दिवस: जम्मू-कश्मीर में पहली बार सरकारी दस्तावेज हिंदी में, 370 हटने के बाद बदली हवा
Wed, 14 Sep 2022 10:13 AM IST
kumar गुलशन कुमार
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: kumar गुलशन कुमार
Updated Wed, 14 Sep 2022 10:13 AM IST
सार
हिंदी को प्रदेश में बढ़ावा देने के लिए अब भी सरकारी स्तर पर बहुत कुछ किया जाना शेष है। तमाम सरकारी आदेश जो अब तक केवल अंग्रेजी में निकल रहे हैं, उसे भी हिंदी में उपलब्ध कराने की व्यवस्था होनी चाहिए
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हिंदी दिवस 2022
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में काफी अहम बदलाव हुए हैं। यह न केवल आतंकवाद व अलगाववाद पर अंकुश और विकास कार्यों के पंख लगने से जुड़ा है, बल्कि पहली बार सरकारी दस्तावेज हिंदी में उपलब्ध होने शुरू हो गए हैं। सरकार ने बड़ी पहल करते हुए लैंड पासबुक को हिंदी में उपलब्ध कराना शुरू कर दिया है। यह अंग्रेजी व उर्दू में भी होगा।
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पहली बार सरकार की ओर से मुफ्त में लैंड पासबुक दिया जाएगा। हालांकि, हिंदी को प्रदेश में बढ़ावा देने के लिए अब भी सरकारी स्तर पर बहुत कुछ किया जाना शेष है। तमाम सरकारी आदेश जो अब तक केवल अंग्रेजी में निकल रहे हैं, उसे भी हिंदी में उपलब्ध कराने की व्यवस्था होनी चाहिए। अब भी अदालती कामकाज में अंग्रेजी का बोलबाला है। एफआईआर उर्दू व अंग्रेजी में ही दर्ज हो रही है। इसके लिए शिकायतकर्ताओं को उर्दू के जानकारों का सहारा लेना पड़ रहा है।
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केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद जम्मू-कश्मीर में हिंदी को राजभाषा का दर्जा मिले दो साल हो गए हैं, लेकिन सरकारी कार्यालयों में अभी भी हिंदी को जमीनी स्तर पर लागू नहीं किया जा रहा। अभी भी कार्यालयों में हिंदी में कामकाज शुरू नहीं हो पाया है। ज्यादातर काम अंग्रेजी और उर्दू में हो रहा है। हिंदी को रोजगार की भाषा बनाने के प्रयास नहीं हो रहे हैं। अदालतों, पुलिस और राजस्व विभाग में काम के लिए जाने वाले लोगों को भाषा संबंधी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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