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Jammu News: जीएमसी जम्मू में पहली बार स्टेम सेल थेरेपी से हुआ गठिया का इलाज, देश के चुनिंदा अस्पताल में शामिल हुआ संस्थान
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जम्मू। राजकीय मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) के ऑर्थोपेडिक्स विभाग के चिकित्सकों ने शुक्रवार को पहली बार ऑस्टियोआर्थराइटिस (गठिया या जोड़ों के दर्द) से पीड़ित मरीज के लिए स्टेम सेल थेरेपी की। शानदार पहल के साथ ही जीएमसी देश के उन चुनिंदा अस्पतालों में शामिल हो गया है जहां घुटना प्रत्यारोपण के बजाय स्टेम सेल का इस्तेमाल किया गया है।
सांबा के बैंगलर की रहने वाली बुजुर्ग बिश्नो देवी (65) ऑस्टियोआर्थराइटिस के कारण घुटने के दर्द से परेशान थीं। कई अस्पताल में गईं लेकिन राहत नहीं मिली। सभी ने घुटना प्रत्यारोपण ही उपाय बताया। परिजन भी राजी हो गए थे लेकिन इसी बीच किसी के कहने पर बिश्नो देवी को लेकर परिजन जीएमसी पहुंचे। ऑर्थोपेडिक्स के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. बियास देव ने जांच के बाद स्टेम सेल थेरेपी से इलाज करने का निर्णय लिया। शुक्रवार को बोन एंड जॉइंट हॉस्पिटल में सफल स्टेम सेल थेरेपी ऑपरेशन किया। प्रदेश के पहले ऑपरेशन में उनका सहयोग डॉ. ताहिर अफजल और डॉ. तदील रशीद ने किया।
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आयुष्मान भारत योजना के तहत मिली राहत
बिश्नो देवी का इलाज आयुष्मान भारत योजना के तहत किया गया। इसमें एक भी पैसा खर्च नहीं हुआ। बिश्नो देवी और उनके परिजन ने इलाज करने वाली टीम और जीएमसी प्रशासन, खासकर प्राचार्य डॉ. आशुतोष गुप्ता का सुविधा को उपलब्ध कराने के लिए आभार व्यक्त किया।
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जानिए क्या है स्टेम सेल थेरेपी
स्टेम सेल थेरेपी के जरिये शरीर की क्षतिग्रस्त कोशिकाओं को दोबारा ठीक किया जा सकता है। स्टेम कोशिकाएं शरीर की मास्टर सेल्स होती हैं। यह किसी भी अन्य कोशिका का रूप ले सकती हैं। इनका उपयोग गठिया समेत अन्य बीमारियों के इलाज में हो रहा है। यह काफी विकसित और आधुनिक तकनीक है। इसे रीजेनरेटिव मेडिसिन भी कहा जाता है। डॉ. बियास देव ने बताया कि इलाज के लिए सख्त कोल्ड चेन बनाए रखने की जरूरत होती है। इसमें स्टेम सेल को -90 डिग्री सेल्सियस तापमान वाले लिक्विड नाइट्रोजन चैंबर में ले जाया जाता है। डे-केयर प्रक्रिया में मरीज को उसी दिन छुट्टी दी जा सकती है।
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सांबा के बैंगलर की रहने वाली बुजुर्ग बिश्नो देवी (65) ऑस्टियोआर्थराइटिस के कारण घुटने के दर्द से परेशान थीं। कई अस्पताल में गईं लेकिन राहत नहीं मिली। सभी ने घुटना प्रत्यारोपण ही उपाय बताया। परिजन भी राजी हो गए थे लेकिन इसी बीच किसी के कहने पर बिश्नो देवी को लेकर परिजन जीएमसी पहुंचे। ऑर्थोपेडिक्स के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. बियास देव ने जांच के बाद स्टेम सेल थेरेपी से इलाज करने का निर्णय लिया। शुक्रवार को बोन एंड जॉइंट हॉस्पिटल में सफल स्टेम सेल थेरेपी ऑपरेशन किया। प्रदेश के पहले ऑपरेशन में उनका सहयोग डॉ. ताहिर अफजल और डॉ. तदील रशीद ने किया।
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आयुष्मान भारत योजना के तहत मिली राहत
बिश्नो देवी का इलाज आयुष्मान भारत योजना के तहत किया गया। इसमें एक भी पैसा खर्च नहीं हुआ। बिश्नो देवी और उनके परिजन ने इलाज करने वाली टीम और जीएमसी प्रशासन, खासकर प्राचार्य डॉ. आशुतोष गुप्ता का सुविधा को उपलब्ध कराने के लिए आभार व्यक्त किया।
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जानिए क्या है स्टेम सेल थेरेपी
स्टेम सेल थेरेपी के जरिये शरीर की क्षतिग्रस्त कोशिकाओं को दोबारा ठीक किया जा सकता है। स्टेम कोशिकाएं शरीर की मास्टर सेल्स होती हैं। यह किसी भी अन्य कोशिका का रूप ले सकती हैं। इनका उपयोग गठिया समेत अन्य बीमारियों के इलाज में हो रहा है। यह काफी विकसित और आधुनिक तकनीक है। इसे रीजेनरेटिव मेडिसिन भी कहा जाता है। डॉ. बियास देव ने बताया कि इलाज के लिए सख्त कोल्ड चेन बनाए रखने की जरूरत होती है। इसमें स्टेम सेल को -90 डिग्री सेल्सियस तापमान वाले लिक्विड नाइट्रोजन चैंबर में ले जाया जाता है। डे-केयर प्रक्रिया में मरीज को उसी दिन छुट्टी दी जा सकती है।