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Jammu News: जीएमसी की इमरजेंसी में रात्रि ड्यूटी पर पेंच, रात 11 से 12 बजे तक सेवा देने पर अड़े कंसल्टेंट
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जीएमसी की इमरजेंसी में शाम 4ः30 से अगली सुबह 10 बजे तक संकाय सदस्य व सलाहकार डॉक्टर (वरिष्ठ डॉक्टर) की उपलब्धता सुनिश्चित बनाने पर पेंच फंस गया है। जीएमसी प्रशासन के साथ विभिन्न संकायों की हुई बैठक में सलाहकार डॉक्टर रात्रि 11 से 12 बजे तक ही रोस्टर ड्यूटी देने पर अड़े हैं जबकि प्रशासन ने इमरजेंसी में चौबीस घंटे सलाहकार डॉक्टरों की ड्यूटी के लिए आदेश निकाला है। यह आदेश स्वतंत्रता दिवस के बाद भी लागू नहीं हो पाया और अब सितंबर से नई व्यवस्था अमल में लाने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए विभागीय अध्यक्षों से रोस्टर मांगे हैं।
जीएमसी प्रशासन ने 3 अगस्त को आदेश जारी कर एचओडी मेडिसिन, सर्जरी, एनेस्थीसिया और आर्थोपेडिक्स से सलाहकार डॉक्टरों के रोस्टर मांगे थे। आदेश के मुताबिक रोस्टर सात अगस्त तक देने थे। सलाहकार डॉक्टर को शाम से अगले दिन तक रोस्टर के मुताबिक इमरजेंसी में उपलब्ध रहना था, लेकिन यह संभव नहीं हो पा रहा। जीएमसी प्रशासन ने नई व्यवस्था लागू करने से पहले संबंधित विभागों के संकाय सदस्यों के साथ बैठक की। सुझाव मिला कि रात्रि 11 से 12 बजे तक ही सेवाएं दे पाएंगे। इस पर प्रशासन भी लगभग सहमत हो गया है।
टेस्ट की लंबी सूची से नहीं मिलेगी निजात
इमरजेंसी में आने वाले मरीजों की अकसर शिकायत रहती है कि शाम के बाद अगली सुबह तक वरिष्ठ डॉक्टर नहीं मिलता। रात में इमरजेंसी जूनियर के साथ पीजी डॉक्टरों और रजिस्ट्रार के हवाले रहती है। मरीजों का आरोप है कि जूनियर डॉक्टरों की ओर से बेवजह लंबे टेस्ट लिख कर दे दिए जाते हैं। अगर वरिष्ठ डॉक्टर इमरजेंसी में उपलब्ध रहे तो जरूरी टेस्ट ही करवाने पड़ें। इससे इलाज जल्द शुरू हो पाएगा। अधिक टेस्ट करवाने में ही पूरी रात बीत जाती है और लंबे इंतजार से दर्द बढ़ जाता है।
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निजी प्रैक्टिस में व्यस्त रहते हैं वरिष्ठ डॉक्टर
पूरी रात सेवाएं नहीं देने का कारण यह भी है कि अधिकांश वरिष्ठ डॉक्टर कार्यालय के बाद निजी प्रैक्टिस में व्यस्त रहते हैं। प्रमुख और निजी क्लीनिकों पर डॉक्टरों के पास रोजाना सैकड़ों मरीज पहुंचते हैं। कई डॉक्टर ऐसे भी हैं जो रात तक निजी अस्पतालों में ऑपरेशन में जुटे रहते हैं। यही नहीं, तड़के से ही यह प्रक्रिया शुरू हो जाती है। इस वजह से सभी वरिष्ठ डॉक्टरों के लिए जीएमसी की इमरजेंसी में रोस्टर ड्यूटी देना बड़ी चुनौती है।
वरिष्ठ डॉक्टरों को इमरजेंसी में अधिक समय तक बिठाने का उद्देश्य उनकी देखरेख को बढ़ाना है, ताकि रोगी चिकित्सा देखभाल मजबूत हो सके। कोशिश की जा रही है कि शुरू में रात्रि 11 से 12 बजे तक वरिष्ठ डॉक्टर उपलब्ध रहें। जरूरत के मुताबिक व्यवस्थाएं तय की जाएंगी।
- डॉ. आशुतोष गुप्ता, प्रिंसिपल, जीएमसी
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जम्मू। जीएमसी की इमरजेंसी में शाम 4ः30 से अगली सुबह 10 बजे तक संकाय सदस्य व सलाहकार डॉक्टर (वरिष्ठ डॉक्टर) की उपलब्धता सुनिश्चित बनाने पर पेंच फंस गया है। जीएमसी प्रशासन के साथ विभिन्न संकायों की हुई बैठक में सलाहकार डॉक्टर रात्रि 11 से 12 बजे तक ही रोस्टर ड्यूटी देने पर अड़े हैं जबकि प्रशासन ने इमरजेंसी में चौबीस घंटे सलाहकार डॉक्टरों की ड्यूटी के लिए आदेश निकाला है। यह आदेश स्वतंत्रता दिवस के बाद भी लागू नहीं हो पाया और अब सितंबर से नई व्यवस्था अमल में लाने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए विभागीय अध्यक्षों से रोस्टर मांगे हैं।
जीएमसी प्रशासन ने 3 अगस्त को आदेश जारी कर एचओडी मेडिसिन, सर्जरी, एनेस्थीसिया और आर्थोपेडिक्स से सलाहकार डॉक्टरों के रोस्टर मांगे थे। आदेश के मुताबिक रोस्टर सात अगस्त तक देने थे। सलाहकार डॉक्टर को शाम से अगले दिन तक रोस्टर के मुताबिक इमरजेंसी में उपलब्ध रहना था, लेकिन यह संभव नहीं हो पा रहा। जीएमसी प्रशासन ने नई व्यवस्था लागू करने से पहले संबंधित विभागों के संकाय सदस्यों के साथ बैठक की। सुझाव मिला कि रात्रि 11 से 12 बजे तक ही सेवाएं दे पाएंगे। इस पर प्रशासन भी लगभग सहमत हो गया है।
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टेस्ट की लंबी सूची से नहीं मिलेगी निजात
इमरजेंसी में आने वाले मरीजों की अकसर शिकायत रहती है कि शाम के बाद अगली सुबह तक वरिष्ठ डॉक्टर नहीं मिलता। रात में इमरजेंसी जूनियर के साथ पीजी डॉक्टरों और रजिस्ट्रार के हवाले रहती है। मरीजों का आरोप है कि जूनियर डॉक्टरों की ओर से बेवजह लंबे टेस्ट लिख कर दे दिए जाते हैं। अगर वरिष्ठ डॉक्टर इमरजेंसी में उपलब्ध रहे तो जरूरी टेस्ट ही करवाने पड़ें। इससे इलाज जल्द शुरू हो पाएगा। अधिक टेस्ट करवाने में ही पूरी रात बीत जाती है और लंबे इंतजार से दर्द बढ़ जाता है।
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निजी प्रैक्टिस में व्यस्त रहते हैं वरिष्ठ डॉक्टर
पूरी रात सेवाएं नहीं देने का कारण यह भी है कि अधिकांश वरिष्ठ डॉक्टर कार्यालय के बाद निजी प्रैक्टिस में व्यस्त रहते हैं। प्रमुख और निजी क्लीनिकों पर डॉक्टरों के पास रोजाना सैकड़ों मरीज पहुंचते हैं। कई डॉक्टर ऐसे भी हैं जो रात तक निजी अस्पतालों में ऑपरेशन में जुटे रहते हैं। यही नहीं, तड़के से ही यह प्रक्रिया शुरू हो जाती है। इस वजह से सभी वरिष्ठ डॉक्टरों के लिए जीएमसी की इमरजेंसी में रोस्टर ड्यूटी देना बड़ी चुनौती है।
वरिष्ठ डॉक्टरों को इमरजेंसी में अधिक समय तक बिठाने का उद्देश्य उनकी देखरेख को बढ़ाना है, ताकि रोगी चिकित्सा देखभाल मजबूत हो सके। कोशिश की जा रही है कि शुरू में रात्रि 11 से 12 बजे तक वरिष्ठ डॉक्टर उपलब्ध रहें। जरूरत के मुताबिक व्यवस्थाएं तय की जाएंगी।
- डॉ. आशुतोष गुप्ता, प्रिंसिपल, जीएमसी