आजाद की उम्मीदवारी से कांग्रेस ने साधे कई निशाने
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कांग्रेस के राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद की जम्मू कश्मीर में राज्यसभा सीट पर उम्मीदवारी से दोनों दलों नेकां और कांग्रेस के नेतृत्व ने कई निशाने साधे हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उमर अब्दुल्ला के बीच नई दिल्ली में हुई बैठक के बाद राज्यसभा चुनाव नेकां-कांग्रेस की ओर से संयुक्त रूप से लड़ने से कांग्रेस में आजाद और सोज गुट में गुटबाजी को फिलहाल विराम लगने के साथ-साथ महागठबंधन की दिशा को भी बल मिला है।
कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस पार्टी सूत्रों के अनुसार गुलाम नबी आजाद को राज्यसभा चुनाव लड़वाने से एक तो नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस में बनी दूरी कम हो गई है। इसके बाद कांग्रेस में आजाद और सोज गुट में चल रही गुटबाजी पर फिलहाल विराम लग गया है।
कांग्रेस में आजाद गुट के नेताओं ने हाल ही में बैठक कर प्रदेशाध्यक्ष प्रो. सैफुद्दीन सोज को पद से हटाने की मांग की थी। आजाद के राज्यसभा उम्मीदवार बनने से अब गुटबाजी पर रोक लग सकती है।
सियासी समीकरण बदलने से पीडीपी की मुश्किल
इसके अलावा रियासत में सियासी समीकरण बदलने से राज्यसभा चुनाव में पीडीपी और भाजपा के दो-दो उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने के रास्ते में अड़चन तो आई ही है साथ ही अब मतदान के माध्यम से ही जीत और हार निश्चित हो पाएगी।
इसके अलावा आजाद जिस सीट पर लड़ रहे हैं, वहां वह मजबूत स्थिति पर हैं और निर्दलीय इस सीट पर काफी अहम रोल अदा कर सकते हैं। कांग्रेस और नेकां के मिलने से भाजपा और पीडीपी नेताओं में जल्द औपचारिक बातचीत शुरू करने का भी दबाव बन गया है।