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Interview : गुलाम नबी आजाद की दो टूक- जो कांग्रेस की चाल पर चलेगा... डूब जाएगा, जंग लग चुकी है पार्टी को
Fri, 24 May 2024 06:37 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Fri, 24 May 2024 06:37 AM IST
सार
पूर्व कांग्रेसी और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद अपनी पार्टी प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिक आजाद के जरिये सियासी जंग में डटे हैं। वे कांग्रेस पर लगातार हमलावर हैं।
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गुलाम नबी आजाद
- फोटो : ani
विस्तार
पूर्व कांग्रेसी और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद खुद चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। मगर, अपनी पार्टी प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिक आजाद के जरिये सियासी जंग में डटे हैं। वे कांग्रेस पर लगातार हमलावर हैं। गुलाम नबी आजाद ने नितिन यादव से विशेष बातचीत में कई सवालों के खुलकर जवाब दिए...
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आपने कांग्रेस छोड़कर नई पार्टी क्यों बनाई?
कांग्रेस में अब जंग लग चुकी है। वहां किसी प्रकार का काम करने की परंपरा नहीं है। जहां पर काम करने की बात नहीं, वहां पर रहकर क्या करता।
इतने साल बाद लगा कि कांग्रेस में जंग लग गई है?
मैं वहां काम सिखाना चाहता था। वह ऐसा करना नहीं चाहते थे, इसलिए मैं वहां से चला आया। मेरे साथ जो लोग राज्यों में प्रभारी बनते थे, या महासचिव बनते थे, वह काम ही नहीं करना चाहते थे। मैं जहां जाता था, वहां से जिताकर लाता था, लेकिन बाकी सब हार कर आते थे। जिला कमेटियों और प्रदेश कमेटियों का भी यही हाल है। मैं तो अपने कार्यकर्ताओं से भी कहता हूं, जो कांग्रेस की चाल पर चलेगा, डूब जाएगा। कांग्रेस की नीतियों में दिक्कत नहीं है। वहां लोग वर्क कल्चर को बदलना नहीं चाहते।
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राहुल गांधी के बारे में आप क्या कहना चाहते हैं?
मैं उनके बारे में क्या कहूं। सब देख और जान रहे हैं, वह कैसे काम करते हैं। ज्यादा कहने की जरूरत ही नहीं है।
आप पर भाजपा के प्रति नरम रुख के आरोप लग रहे हैं?
लोग कुछ भी कहते रहें। मेरी अपनी पार्टी है। सीएम रहते हुए विकास कराया था और अब भी विकास की राजनीति करना चाहता हूं। भाजपा हो या कोई और पार्टी...मेरा कहना है कि धर्म की राजनीति ठीक नहीं है। बचपन में पढ़ाया जाता था कि लकड़ियां इकट्ठा रहती हैं, तो टूटती नहीं हैं। अलग-अलग कर दिया जाए, तो तोड़ा जा सकता है। सबको एकजुट होकर रहना चाहिए। सीमा पर पहले से ही काफी दुश्मन हैं। ऐसे में देश को आगे बढ़ाने की बात होनी चाहिए।
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अनुच्छेद-370 हटाने पर आपका क्या कहना है?
अब हटाकर क्या हो गया? अब तो बस ढांचा रह गया था। इसकी अब आवश्यकता ही नहीं थी। जब यह अनुच्छेद लगाया गया था, तो विदेश, रक्षा और मुद्रा के अधिकार ही जम्मू-कश्मीर के पास नहीं थे। इसके अलावा सब कुछ अपना था। तब यहां का खुद का राष्ट्रपति और न्यायपालिका थी। इनको तो नेहरू और इंदिरा ने पहले से ही खत्म कर दिया था। अब तो बस जमीन सहित कुछ अधिकार रह गए थे। अब तो इसे ऐसे ही रहने देना चाहिए था। भाजपा वालों को मुझसे सलाह लेनी चाहिए थी। सही तरीका बताता।