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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   Forest Department did not provide land for the building again work of Gosadan's stopped

इमारत के लिए वन विभाग ने नहीं दी जमीन, फिर रुका गोसदन का काम

Sat, 27 Feb 2021 12:10 PM IST
करिश्मा चिब सतीश वालिया, जम्मू
सतीश वालिया, जम्मू Published by: करिश्मा चिब Updated Sat, 27 Feb 2021 12:10 PM IST
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नगरोटा में बनाए जा रहे गोसदन का काम फिर से रुक गया है। यहां पर पहले 97 कनाल में गोसदन बनाया जाना था, लेकिन 50 कनाल जमीन वन विभाग की निकली है, जिसे विभाग देने को तैयार नहीं। बाकी जमीन नगर निगम की है। वन विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि वन भूमि पर किसी भी तरह की इमारत नहीं बनाई जा सकती। हालांकि खाली जमीन को चरागाह के रूप में प्रयोग किया जा सकता है। इस कारण वन विभाग ने गोसदन का काम रुकवा दिया है। इससे पहले फंड न मिलने से भी काम में रुकावट आई थी। इस पर नगर निगम ने पहले चरण में क्रेट बाल लगाने पर काम पूरा कर लिया है।

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अब दोबारा से डीपीआर तैयारी की जाएगी। नगर निगम अधिकारियों के अनुसार अतिरिक्त भूमि की तलाश की जा रही है। पहले 97 कनाल जमीन पर प्रोजेक्ट के लिए डीपीआर बनाई गई थी। अब 47 कनाल जमीन के लिए डीपीआर तैयार की जा रही है। इसमें बहुमंजिला इमारतें तैयार की जाएंगी और पशुओं को रखा जाएगा। शहर में लावारिश पशुओं की तादाद ज्यादा है। पशुओं के कारण सड़क हादसे भी हो रहे हैं। समाधान के लिए गोशाला का निर्माण किया जा रहा है। अब डीपीआर को मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद दोबारा प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया जाएगा।
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2018 में फाइनल हुआ था प्रोेजेक्ट
इस गोसदन में एक साथ हजारों पशुओं को रखने की सुविधा मिलनी है। यहां पर दूध की डेयरी और अन्य प्लांट भी लगाए जाने हैं और आय अर्जित की जानी है। फरवरी 2018 में प्रोेजेक्ट फाइनल हुआ था। यहां पर अत्याधुनिक गोशाला तैयार की जानी है। जनवरी 2020 में प्रोजेक्ट पर क्रेट बाल लगाने का काम शुरू हुआ। दो साल बीत जाने के बाद भी अन्य प्रोजेक्टों पर काम शुरू नहीं हो पाया है।


100 करोड़ रुपये होने हैं प्रोजेक्ट पर खर्च
प्रोजेक्ट पर 100 करोड़ की राशि खर्च की जानी है। इसमें एक साथ सैकड़ों लोगों को रोजगार भी दिया जाना है। फूलों से अगरबत्तियां तैयार की जानी हैं। इसके अलावा गोबर से भी बायोगैस प्लांट निर्मित होने हैं।

गोसदन के लिए दोबारा से डीपीआर तैयार की जा रही है। वन विभाग की शर्तों के अनुसार 50 कनाल वन भूमि पर काम नहीं किया जा सकता। अब शेष बची 47 कनाल में ही प्रोजेक्ट बनाया जाएगा।  - डॉ. सुशील कुमार, वेटरनरी अधिकारी, नगर निगम

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