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जुगाड़ पर चल रही जम्मू की फारेंसिक लैब
अमित वर्मा/अमर उजाला, जम्मू
Updated Sun, 16 Nov 2014 12:47 PM IST
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जम्मू संभाग में जब से नए जिले अस्तित्व में आए तब से अब तक इन नए जिलों के लिए मोबाइल फारेंसिक यूनिट की मंजूरी नहीं मिल सकी है, जिससे इन नए जिलों में वैकल्पिक आधार पर ही कामकाज हो रहा है। किसी प्रकार के अपराध की जांच पड़ताल करने में सहायक और वैज्ञानिक सतह पर इसे पुष्ट करने वाले फारेंसिक लैब (प्रयोगशाला) जम्मू एवं श्रीनगर में स्थापित हैं।
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वहीं, मिली जानकारी के मुताबिक जम्मू के फारेंसिक लैब में अब तक 56 पद रिक्त पड़े हैं। जम्मू-कश्मीर फारेंसिक लैब में 158 पदों की मंजूरी है, लेकिन इसमें 102 पदों पर ही स्टाफ कार्यरत हैं। हालांकि जम्मू फारेंसिक लैबोरेटरी के एक्सपर्ट करीब पंद्रह से बीस दिनों तक जिलों के कोर्ट में अपना पक्ष प्रस्तुत करने आते-जाते रहते हैं जो उनकी ड्यूटी में भी शामिल है।
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वहीं, जम्मू संभाग में बने नए जिले किश्तवाड़, डोडा, रामबन, रियासी, संाबा में अब तक मोबाइल फारेंसिक लैब यूनिट के लिए मंजूरी नहीं मिल सकी है। जबकि कश्मीर संभाग में बांडीपोरा, शोपियां, कुलगाम, लेह और कारगिल में भी मोबाइल फारेंसिक यूनिट खोलने की मंजूरी नहीं दी गई है, जिससे वैकल्पिक आधार पर काम करना पड़ रहा है।
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क्या होता है, क्या नहीं होता
बलात्कार, नारकोटिक्स, जहर, हत्या और संदिग्ध मौत के मामले में फारेंसिक लैब के एक्सपर्ट द्वारा लिए गए नमूनों से फारेंसिक लैब में विशेषज्ञों द्वारा जांच की जाती है। रेप के दौरान वस्त्र, नकली करेंसी, पकड़ी गई वस्तु चरस, हेरोइन या अन्य नशीली वस्तु है या नहीं, की जांच की जाती है।
जहां मोबाइल फारेंसिक यूनिट हैं
कठुआ, उधमपुर, राजोरी, पुंछ में मोबाइल फारेंसिक यूनिट की सुविधा मौजूद है।
वर्ष 2012 में 1668 मामले की हुई रिपोर्ट तैयार
जम्मू फारेंसिक लैब से पिछले तीन साल के अंतर्गत वर्ष 2012 में 1668 मामलों की रिपोर्ट तैयार की गई। जबकि वर्ष 2013 में 1666 मामले की रिपोर्ट बनाई गई। वहीं 2014 अक्तूबर तक 805 मामलों की रिपोर्ट तैयार कर भेजी जा चुकी है।
उधर, फारेंसिक लैबोरेटरी जम्मू के डायरेक्टर प्रदीप कुमार का कहना है कि लैब में आए नमूनों की जांच सुचारु रूप से की जाती है। अपराध क ी प्रकृति पर आधारित लिए गए नमूनों की जांच इस प्रयोगशाला में की जाती है। वहीं, इस प्रयोगशाला में किसी भी सिविलियन का प्रवेश वर्जित है।