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भद्रवाह में बंपर रूप से खिले डिजिटलिस पुरपुरिया फूल
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भद्रवाह। कोरोना संक्रमण के बीच डोडा जिले की सुरम्य भद्रवाह घाटी में पर्यटन पूरी तरह ठप रहा, लेकिन मानवीय गतिविधियों की अनुपस्थिति में मूल रूप से यूरोप में पैदा होने वाला डिजिटलिस पुरपुरिया फूल की यहां बंपर पैदावार हुई है। यह फूल यूरोप के समशीतोष्ण वातावरण में पैदा होता है। विशेषज्ञों को विश्वास है अगले आने वाले सीजन में इसकी वजह से पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होगी। यह फूल सिर्फ एक माह के लिए ही खिलता है।
पर्यटन से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले वर्ष अप्रैल से जून तक चार लाख से अधिक पर्यटकों के आने की वजह से इस बार बेहतर सीजन की उम्मीद थी परंतु कोरोना महामारी के कारण पर्यटन पूरी तरह ठप रहा। मानवीय गतिविधियों के अभाव में जंगली फूल डिजिटलिस पुरपुरिया जिसे फॉक्स ग्लोव भी कहते हैं जमकर खिला है। अगले आने वाले सीजन में यह पर्यटकों को भरपूर आकर्षित करेगा।
भद्रवाह विकास प्राधिकरण ने कोरोना लॉकडाउन के कारण आगामी सीजन में आने वाले यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए बुनियादी ढांचे को और मजबूत किया है। यह वुडलैंड्स पौधा औषधीय होता है। इसमें छोटी-छोटी घंटियों के आकार के फूल निकलते हैं और झालर के आकार में दिखते हैं। मुख्य रूप से यूरोप के शांत समशीतोष्ण क्षेत्रों के अलावा यह भद्रवाह और उत्तरी कश्मीर के गुलमर्ग इलाके में होता है। पर्वतीय वातावरण संस्थान के विभागाध्यक्ष नीरज शर्मा बताते हैं कि यह सबसे नाजुक लेकिन आकर्षक पौधों में से एक है जो मई से जून के आसपास गर्मियों की शुरुआत में खिलता है, इसे अधिक देखभाल की जरूरत नहीं होती। यह सफेद और गुलाबी रंग के होते हैं।
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-कोरोना ने बुरी तरह प्रभावित किया
पर्यटन क्षेत्र से जुडे़ मनोज कोतवाल बताते हैं कि पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए ये हमारे लिए ट्रंप कार्ड होते थे। हमें इस वर्ष जनवरी में अच्छी बुकिंग भी मिलनी शुरू हो गई थी परंतु कोरोना ने सभी चीजों पर पानी फेर दिया। पर्यटकों के न आने के कारण इस व्यवसाय से जुड़े लोगों को काफी झटका लगा है। मिनी कश्मीर के रूप में प्रसिद्ध भद्रवाह घाटी में पर्यटक इन दुर्लभ फूलों को देखने के लिए बड़ी संख्या में आते हैं। डिजिटलिस पुरपुरिया इसका मुख्य आकर्षण होता है।
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पर्यटन से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले वर्ष अप्रैल से जून तक चार लाख से अधिक पर्यटकों के आने की वजह से इस बार बेहतर सीजन की उम्मीद थी परंतु कोरोना महामारी के कारण पर्यटन पूरी तरह ठप रहा। मानवीय गतिविधियों के अभाव में जंगली फूल डिजिटलिस पुरपुरिया जिसे फॉक्स ग्लोव भी कहते हैं जमकर खिला है। अगले आने वाले सीजन में यह पर्यटकों को भरपूर आकर्षित करेगा।
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भद्रवाह विकास प्राधिकरण ने कोरोना लॉकडाउन के कारण आगामी सीजन में आने वाले यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए बुनियादी ढांचे को और मजबूत किया है। यह वुडलैंड्स पौधा औषधीय होता है। इसमें छोटी-छोटी घंटियों के आकार के फूल निकलते हैं और झालर के आकार में दिखते हैं। मुख्य रूप से यूरोप के शांत समशीतोष्ण क्षेत्रों के अलावा यह भद्रवाह और उत्तरी कश्मीर के गुलमर्ग इलाके में होता है। पर्वतीय वातावरण संस्थान के विभागाध्यक्ष नीरज शर्मा बताते हैं कि यह सबसे नाजुक लेकिन आकर्षक पौधों में से एक है जो मई से जून के आसपास गर्मियों की शुरुआत में खिलता है, इसे अधिक देखभाल की जरूरत नहीं होती। यह सफेद और गुलाबी रंग के होते हैं।
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पर्यटन क्षेत्र से जुडे़ मनोज कोतवाल बताते हैं कि पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए ये हमारे लिए ट्रंप कार्ड होते थे। हमें इस वर्ष जनवरी में अच्छी बुकिंग भी मिलनी शुरू हो गई थी परंतु कोरोना ने सभी चीजों पर पानी फेर दिया। पर्यटकों के न आने के कारण इस व्यवसाय से जुड़े लोगों को काफी झटका लगा है। मिनी कश्मीर के रूप में प्रसिद्ध भद्रवाह घाटी में पर्यटक इन दुर्लभ फूलों को देखने के लिए बड़ी संख्या में आते हैं। डिजिटलिस पुरपुरिया इसका मुख्य आकर्षण होता है।