बाढ़ प्रभावितों को अब आने वाली भीषण ठंड की चिंता
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बचपन में किताबों में हम एक कहानी पढ़ा करते थे। उस कहानी के मुताबिक कश्मीर घाटी पहले सतीसर झील होती थी। उस झील में एक जलोत बाबा राक्षस रहता था, जो पानी से निकल कर लोगों को परेशान करता था। कश्मीर में आई बाढ़ ने सतीसर झील के साथ-साथ जलोत बाबा की कहानी को हकीकत में बदल दिया है।
बेरीनाग गांव से निकल कर अनंतनाग, पुलवामा से श्रीनगर, बारामुला से होते हुए पाकिस्तान के बीच सदियों से बेहद खामोशी से बहने वाली झेलम नदी इस बार हजारों लोगों की जिंदगी और लाखों लोगों के भविष्य के सपने पलक झपकते ही लील गई। किसी के लिए महज ले देकर अपना मकान बचा है, तो किसी के पास उसका भी आसरा नहीं है।
जन्नत में सड़ी-गली लाशों से उठती दुर्गंध
सेबों के बाग, व्यापार का जरिया, रोजी रोटी का आसरा, सब कुछ खत्म हो गया है। धरती की जन्नत कहे जाने वाले कश्मीर में जगह-जगह बिखरी लोगों व पशुओं की सड़ी-गली लाशों से उठती दुर्गंध और लोगों के दिल दहला देने वाले रुदन से फिजां तारी है। हां, पैदा होते ही हमेशा पुलिस को देखते रहने की आदी जनता को अब इनके चेहरे नजर नहीं आते।
बहरहाल सब कुछ गंवा कर नसीब के सहारे जिंदा बच गए लोगों को एक महीने बाद शुरू होने वाली भीषण सर्दी और ठहरे पानी से पैदा होने वाली बीमारियों का खौफ अभी से सता रहा है। इस विभिषका में जान की बाजी लगाने वाले गुमनाम लोग गुमनाम ही रह जाने वाले हैं। बहरहाल अब बाढ़ से बुरी तरह उजड़ चुके धरती के स्वर्ग में जिंदा बच गए लोगों को बचाने की जरूरत है।
फिलहाल बड़ी समस्या जल भराव के कारण महामारी फैलने का खतरा है। फिलहाल धरती का स्वर्ग मलबे का ढेर बना है। सवाल लाजिमी है कि क्या कश्मीर मलबे के ढेर से बाहर आ कर एक बार फिर धरती का स्वर्ग बनेगा?
पानी चढ़ते ही डूब गई राज्य सरकार
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनका महकमा तो बाढ़ का पानी चढ़ते ही लोगों से पहले ही डूब गए हैं। महज फोटो खिंचवाने के लिए हेलीकाप्टर से ब्रेड का टुकड़ा फेंकते मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के सियासी चेहरे के साथ ही लोगों को बचाने के बहाने प्रचार पाने की केंद्र सरकार की सियासी भूख भी साफ दिखाई दी।
अभी जिंदा है इंसानियत
बीते करीब एक हफ्ते से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करते हुए कई बार कई वाकयों ने इंसानियत के जिंदा रहने का अहसास भी कराया। घाटी में धर्म की दीवारें तोड़ कर मदद के लिए बढ़े हाथ के ढेरों नजारे भी सामने आए। मसलन कश्मीर के एमएफ हुसैन कहे जाने वाले और मछली पकड़ने के शौकीन पेंटर मसूद हुसैन ने अपनी मछली पकड़ने वाली नाव से अपने उन पड़ोसियों को बाहर निकाला जो दूसरे धर्म के थे।
(हिमांशु मिश्र से विशेष बातचीत)