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Jammu News: पहले चरण की काउंसलिंग पूरी, 2462 में से 850 सीटें ही भर पाईं
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-इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिले के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों से ज्यादा हैं सीटें
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों में पहले चरण की काउंसलिंग मुकम्मल हो गई है। तीन दिन तक चली काउंसलिंग प्रक्रिया के बाद 850 अभ्यर्थियों को प्रदेश के विभिन्न निजी व सरकारी कॉलेजों में सीटें आवंटित हुई हैं। इंजीनियरिंग कॉलेजों में कुल 2462 सीटें हैं जबकि अभ्यार्थियों की संख्या 1662 ही है। पहले चरण की काउंसलिंग के बाद अभी भी 1612 सीटें खाली बची हैं।
प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों में समय की जरूरत के हिसाब से पाठ्यक्रम न होने, बेहतर प्लेसमेंट व शिक्षा नहीं मिलने से अभ्यर्थी इन कॉलेजाें में प्रवेश को महत्व नहीं देते हैं। वे अन्य राज्यों के इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिले को लेकर ज्यादा रुझान दिखाते हैं। यही कारण है प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों में सीटें ज्यादा हैं और दाखिला लेने वाले कम। पहले चरण के बाद अब दूसरे चरण की काउंसलिंग होगी। पहले चरण में जिन उम्मीदवारों की सीट मिली हैं उनमें से काफी विद्यार्थी विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं के तहत अन्य राज्यों में पढ़ने जाते हैं। प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिले के लिए जम्मू-कश्मीर बोर्ड ऑफ प्रोफेशनल एंट्रेस एग्जामिनेशन (बोपी) ने प्रवेश परीक्षा नौ जून को ली थी। 1662 अभ्यार्थियों ने परीक्षा दी थी। जिन 850 उम्मीदवारों को विभिन्न कॉलेजों में दाखिला मिला है, उन्हें नौ जुलाई तक संबंधित कॉलेज में रिपोर्ट करना होगा। बोपी के सचिव शब्बीर हुसैन कीन ने कहा कि सभी अभ्यर्थियों को सीटें मिलें इसके लिए दूसरे, तीसरे या चौथे चरण तक काउंसलिंग करेंगे।
पाठ्यक्रम में समय के हिसाब से नहीं हो रहा बदलाव
बीत कुछ सालों से इंजीनियरिंग कॉलेजों में सीटें खाली रह रही हैं। लगातार कम होती जा रही अभ्यर्थियों की संख्या के पीछे बड़ा कारण बेहतर प्लेसमेंट नहीं मिलना है। वहीं कॉलेजों में समय के हिसाब से पाठ्यक्रम में जरूरी बदलाव नहीं होते हैं। काउंसलिंग प्रक्रिया में शामिल एक अभ्यर्थी ने कहा कि बड़ी संख्या में छात्र अन्य कॉलेजों का रुख करते हैं। प्रदेश के कॉलेजों में न शिक्षा का स्तर है न ही प्लेसमेंट। सरकार को चाहिए की इंजीनियरिंग कॉलेजों के पाठ्यक्रम में जरूरी बदलाव करे।
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों में पहले चरण की काउंसलिंग मुकम्मल हो गई है। तीन दिन तक चली काउंसलिंग प्रक्रिया के बाद 850 अभ्यर्थियों को प्रदेश के विभिन्न निजी व सरकारी कॉलेजों में सीटें आवंटित हुई हैं। इंजीनियरिंग कॉलेजों में कुल 2462 सीटें हैं जबकि अभ्यार्थियों की संख्या 1662 ही है। पहले चरण की काउंसलिंग के बाद अभी भी 1612 सीटें खाली बची हैं।
प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों में समय की जरूरत के हिसाब से पाठ्यक्रम न होने, बेहतर प्लेसमेंट व शिक्षा नहीं मिलने से अभ्यर्थी इन कॉलेजाें में प्रवेश को महत्व नहीं देते हैं। वे अन्य राज्यों के इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिले को लेकर ज्यादा रुझान दिखाते हैं। यही कारण है प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों में सीटें ज्यादा हैं और दाखिला लेने वाले कम। पहले चरण के बाद अब दूसरे चरण की काउंसलिंग होगी। पहले चरण में जिन उम्मीदवारों की सीट मिली हैं उनमें से काफी विद्यार्थी विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं के तहत अन्य राज्यों में पढ़ने जाते हैं। प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिले के लिए जम्मू-कश्मीर बोर्ड ऑफ प्रोफेशनल एंट्रेस एग्जामिनेशन (बोपी) ने प्रवेश परीक्षा नौ जून को ली थी। 1662 अभ्यार्थियों ने परीक्षा दी थी। जिन 850 उम्मीदवारों को विभिन्न कॉलेजों में दाखिला मिला है, उन्हें नौ जुलाई तक संबंधित कॉलेज में रिपोर्ट करना होगा। बोपी के सचिव शब्बीर हुसैन कीन ने कहा कि सभी अभ्यर्थियों को सीटें मिलें इसके लिए दूसरे, तीसरे या चौथे चरण तक काउंसलिंग करेंगे।
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पाठ्यक्रम में समय के हिसाब से नहीं हो रहा बदलाव
बीत कुछ सालों से इंजीनियरिंग कॉलेजों में सीटें खाली रह रही हैं। लगातार कम होती जा रही अभ्यर्थियों की संख्या के पीछे बड़ा कारण बेहतर प्लेसमेंट नहीं मिलना है। वहीं कॉलेजों में समय के हिसाब से पाठ्यक्रम में जरूरी बदलाव नहीं होते हैं। काउंसलिंग प्रक्रिया में शामिल एक अभ्यर्थी ने कहा कि बड़ी संख्या में छात्र अन्य कॉलेजों का रुख करते हैं। प्रदेश के कॉलेजों में न शिक्षा का स्तर है न ही प्लेसमेंट। सरकार को चाहिए की इंजीनियरिंग कॉलेजों के पाठ्यक्रम में जरूरी बदलाव करे।
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