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जम्मू: दो साल पहले लगी थी मराठा बस्ती में आग, फिर खाक हुईं 500 झुग्गियां
Mon, 03 Jun 2019 08:34 PM IST
Pranjal Dixit
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: Pranjal Dixit
Updated Mon, 03 Jun 2019 08:34 PM IST
सार
- अब दोबारा नहीं बसने दिया जाएगा, पुलिस प्रशासन सख्ती के मूड में, जांच के भी आदेश
- तबाह होने से बच गया शहर, पास में था आयल डिपो, रेलवे स्टेशन तक भी पहुंच सकती थी लपटे
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विस्तार
रेलवे स्टेशन के पास करीब 500 झुग्गियां जलकर राख हो गईं। एक साल पहले ही यहां झुग्गियों में आग लग गई थी। अभी मुश्किल से लोगों ने अपनी झुग्गियां तैयार की थीं। पूरी तरह से यह बन भी नहीं पाई थीं कि दोबारा आग लग गई। यह तो गनीमत है कि भीषण आग में किसी की जान नहीं गई। वरना आग की लपटों ने झुग्गियों में अन्न के एक-एक दाने तक को राख कर दिया।
इसी जगह पर पिछले साल मई के महीने में भी आग लगी थी। करीब 500 झुग्गियां पूरी तरह से जलकर राख हो गई थीं। मराठा बस्ती के बिल्कुल पास एक मछी मोहल्ला है, यहां पर उत्तर प्रदेश और बिहार से आए लोग झुग्गियों में रहते हैं। एक तरफ रोहिंग्या रहते हैं। रोहिंग्या रेलवे लाइन की तरफ रहते हैं। आग लगने का करण शार्ट सर्किट ही बताया जा रहा है।
रोहिंग्या बस्ती से लगी आग
बिहार की रहने वाली फूलकांति अपने परिवार के साथ राख हो चुकी झुग्गी में तिरपाल ओढ़ कर बैठी हुई थी। फूलकांति ने बताया कि रोहिंग्या बस्ती में रात को करीब 1 बजे आग लग गई। वहीं पर एक झुग्गी में आग लगी और अन्य झुग्गियों तक पहुंच गई क्योंकि हवा नीचे की तरफ थी। रात को गर्मी भी बहुत थी। इसलिए एक पल में ही सब झुग्गियां जलकर राख हो गईं। इसी तरह से यहां रहने वाले इंद्र का कहना है कि रात को अपनी झुग्गी में सो रहा था, तभी आग की तपिश का एहसास हुआ और बाहर दौड़कर भागा। उसका बच्चा भी साथ था। वह मुश्किल से उसे लेकर बाहर निकला।
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500 झुग्गियां राख, कोई हताहत नहीं
यह किसी करीश्मे से कम नहीं कि 500 झुग्गियां एकदम से जलकर राख हो गईं लेकिन इसमें कोई हताहत नहीं हुआ। वरना पूरी तरह से लकड़ी और मोम के तिरपाल से बनी झुग्गियों में भीषण आग से बाहर निकल पाना आसान नहीं। पिछली दफा जब आग लगी थी।
गर्मी ने ही बचाया
गर्मी की वजह से अधिकतर लोग जाग रहे थे। जो सोए भी थे, वो झुग्गियों के बाहर ही सोए हुए थे। शायद यहीं एक वजह है कि झुग्गियां जल जाने में भी कोई हताहत नहीं हुआ।
कई संस्थाएं मदद करने को पहुंची
आग लगने के बाद सबकुछ विरान हो गया। ऐसे में लोगों की मदद करने के लिए कई संस्थाएं पहुंची। बच्चों को दूध, फल और अन्य के लिए खाने के पैकेट लाए गए। नगर निगम की गाड़ियों ने लोगों के लिए पानी पहुंचाया। दिनभर संस्थाएं बच्चों के लिए जरूरी सामान लेकर पहुंचती रहीं।
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इसी जगह पर पिछले साल मई के महीने में भी आग लगी थी। करीब 500 झुग्गियां पूरी तरह से जलकर राख हो गई थीं। मराठा बस्ती के बिल्कुल पास एक मछी मोहल्ला है, यहां पर उत्तर प्रदेश और बिहार से आए लोग झुग्गियों में रहते हैं। एक तरफ रोहिंग्या रहते हैं। रोहिंग्या रेलवे लाइन की तरफ रहते हैं। आग लगने का करण शार्ट सर्किट ही बताया जा रहा है।
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रोहिंग्या बस्ती से लगी आग
बिहार की रहने वाली फूलकांति अपने परिवार के साथ राख हो चुकी झुग्गी में तिरपाल ओढ़ कर बैठी हुई थी। फूलकांति ने बताया कि रोहिंग्या बस्ती में रात को करीब 1 बजे आग लग गई। वहीं पर एक झुग्गी में आग लगी और अन्य झुग्गियों तक पहुंच गई क्योंकि हवा नीचे की तरफ थी। रात को गर्मी भी बहुत थी। इसलिए एक पल में ही सब झुग्गियां जलकर राख हो गईं। इसी तरह से यहां रहने वाले इंद्र का कहना है कि रात को अपनी झुग्गी में सो रहा था, तभी आग की तपिश का एहसास हुआ और बाहर दौड़कर भागा। उसका बच्चा भी साथ था। वह मुश्किल से उसे लेकर बाहर निकला।
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500 झुग्गियां राख, कोई हताहत नहीं
यह किसी करीश्मे से कम नहीं कि 500 झुग्गियां एकदम से जलकर राख हो गईं लेकिन इसमें कोई हताहत नहीं हुआ। वरना पूरी तरह से लकड़ी और मोम के तिरपाल से बनी झुग्गियों में भीषण आग से बाहर निकल पाना आसान नहीं। पिछली दफा जब आग लगी थी।
गर्मी ने ही बचाया
गर्मी की वजह से अधिकतर लोग जाग रहे थे। जो सोए भी थे, वो झुग्गियों के बाहर ही सोए हुए थे। शायद यहीं एक वजह है कि झुग्गियां जल जाने में भी कोई हताहत नहीं हुआ।
कई संस्थाएं मदद करने को पहुंची
आग लगने के बाद सबकुछ विरान हो गया। ऐसे में लोगों की मदद करने के लिए कई संस्थाएं पहुंची। बच्चों को दूध, फल और अन्य के लिए खाने के पैकेट लाए गए। नगर निगम की गाड़ियों ने लोगों के लिए पानी पहुंचाया। दिनभर संस्थाएं बच्चों के लिए जरूरी सामान लेकर पहुंचती रहीं।
अब दोबारा नहीं बसने दिया जाएगा, पुलिस प्रशासन सख्ती के मूड में, जांच के भी आदेश
रेलवे स्टेशन के पास मराठा बस्ती के नजदीक बसी मछी मार्केट और रोहिंग्या बस्ती अब दोबारा बसने नहीं दी जाएगी। क्योंकि एक साल में एक ही समय और एक ही जगह आग लगने से कई सवाल उठ रहे हैं। इस घटना को पुलिस ने गंभीरता से लिया है। सूत्रों का कहना है कि अब पुलिस यहां पर दोबारा किसी को नहीं बसने देंगे।
इस बीच इस मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं। आग लगने के बाद कुछ लोगों ने विरोध भी किया है कि बस्ती पूरी तरह से अवैध रूप से बसी हुई है। यहां पर रोहिंग्या अवैध रूप से बसे हैं। यहीं नहीं, इस आग लेकर मछी मार्केट और रोहिंग्या बस्ती के बीच तनातनी तक देखने को मिली है।
रोहिंग्याओं का कहना है कि आग मछी मार्केट की तरफ से लगी तो मछी मार्केट वालों को कहना है कि आग रोहिंग्या बस्ती से लगी है॥ इन आरोपों को देखते हुए पुलिस ने इस मामले को विवादसीन माना है। इसलिए अब यह तय किया है कि इन लोगों को यहां दोबारा नहीं बसने दिया जाएगा।
इस बीच इस मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं। आग लगने के बाद कुछ लोगों ने विरोध भी किया है कि बस्ती पूरी तरह से अवैध रूप से बसी हुई है। यहां पर रोहिंग्या अवैध रूप से बसे हैं। यहीं नहीं, इस आग लेकर मछी मार्केट और रोहिंग्या बस्ती के बीच तनातनी तक देखने को मिली है।
रोहिंग्याओं का कहना है कि आग मछी मार्केट की तरफ से लगी तो मछी मार्केट वालों को कहना है कि आग रोहिंग्या बस्ती से लगी है॥ इन आरोपों को देखते हुए पुलिस ने इस मामले को विवादसीन माना है। इसलिए अब यह तय किया है कि इन लोगों को यहां दोबारा नहीं बसने दिया जाएगा।
तबाह होने से बच गया शहर, पास में था आयल डिपो, रेलवे स्टेशन तक भी पहुंच सकती थी लपटे
मराठा बस्ती के पास लगी आग पूरे शहर को तबाह कर सकती थी। बस्ती के पास ही आयल कंपनियों का डीपो है। यह तो संयोग है कि आग लगने के वक्त हवा दक्षिण की तरफ(त्रिकुटा नगर) की तरफ थी। यदि हवा उस समय उत्तर की तरफ होती तो आग की लपटें बस्ती से मात्र 100 गज पर स्थित आयल डीपो की तरफ पहुंच सकती थी। एक ही झटके में आयल डीपो में आग लगने से सबकुछ तबाह हो जाता।
यहीं नहीं, आयल डीपो के पास ही रेलवे स्टेशन भी है। पहले तो रेलवे स्टेशन और आयल डीपो के पास इस तरह से रोहिंग्याओं का बसना ही एक बड़ा सवाल है। जो एक बड़ा खतरा भी है। कुछ लोगों ने इसका विरोध भी किया है। कहा गया कि आयल डीपो तक आग पहुंचने से भारी नुकसान हो सकता था। बस्ती के पास सीआरपीएफ बटालियन भी है।
यहीं नहीं, आयल डीपो के पास ही रेलवे स्टेशन भी है। पहले तो रेलवे स्टेशन और आयल डीपो के पास इस तरह से रोहिंग्याओं का बसना ही एक बड़ा सवाल है। जो एक बड़ा खतरा भी है। कुछ लोगों ने इसका विरोध भी किया है। कहा गया कि आयल डीपो तक आग पहुंचने से भारी नुकसान हो सकता था। बस्ती के पास सीआरपीएफ बटालियन भी है।