{"_id":"5dedf70b8ebc3e1ba715a76d","slug":"farmers-engaged-in-covering-the-crop-in-poonch-after-rain-and-firing-stopped","type":"story","status":"publish","title_hn":"जम्मू-कश्मीरः गोलाबारी और बारिश थमी तो खिल उठे चेहरे, फसल समेटने में जुटे किसान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जम्मू-कश्मीरः गोलाबारी और बारिश थमी तो खिल उठे चेहरे, फसल समेटने में जुटे किसान
Mon, 09 Dec 2019 12:56 PM IST
प्रशांत कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Mon, 09 Dec 2019 12:56 PM IST
विज्ञापन
गोलाबारी बंद होने के चलते मक्की साफ करता किसान
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
करीब एक सप्ताह बाद नियंत्रण रेखा पर शांति होने, रविवार को धूप खिलने से पुंछ जिले के दिगवार सेक्टर में किसानों के चेहरे खिल उठे। वह मक्की की फसल सुखाने और उसे समेटने में जुट गए हैं। क्षेत्र के किसानों ने कहा कि अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद पाकिस्तानी सेना की तरफ से नियंत्रण रेखा पर सभी सेक्टरों में लगातार गोलाबारी की जा रही है, जिसके कारण हम लोग इस बार बड़ी मुश्किल से कभी देर शाम तो कभी सुबह परिवार के साथ मक्की की फसल की कटाई की थी।
विज्ञापन
उसके बाद गोलाबारी और फिर जल्दी ही बारिश शुरू होने से मक्की की फसल कई दिन तक खेतों में ही पड़ी रही। हालांकि हमें पाकिस्तानी गोलाबारी से खेतों में पड़ी मक्की के जल जाने का हर समय खतरा बना रहता था। इससे हमें इस बार मक्की के नष्ट होने की चिंता सता रही थी।
विज्ञापन
ऐसे में डेढ़-दो सप्ताह से क्षेत्र में नियंत्रण रेख पर शांति बनी होने, गोलाबारी बंद रहने के साथ ही मौसम साफ बना हुआ है। इसके चलते हम कुछ दिन से मक्की के दानों को मकानों की छतों पर सुखाने और उसे समेटने का काम कर रहे हैं ताकि दोबारा गोलाबारी शुरू होने से पहले ही मक्की को घरों के अंदर सुरक्षित पहुंचा सकें।
विज्ञापन