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जमीन के लिए किसानों ने भरी हुंकार

Mon, 13 Apr 2015 01:14 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, कठुआ
ब्यूरो/अमर उजाला, कठुआ Updated Mon, 13 Apr 2015 01:14 AM IST
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farmer protest for compensation of land

जम्मू यूनिवर्सिटी के कठुआ कैंपस के लिए जमीन देने वाले किसानों को अब तक बदले में दी गई भूमि पर कब्जा नहीं मिल पाया है। इसके विरोध में किसानों ने पिछले दिनों कैंपस का निर्माण कार्य रुकवा दिया था।

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रविवार को कठुआ कैंपस में एकत्रित किसानों ने ऐलान कर दिया कि जब तक उनका हक नहीं दिया जाता, वह किसी भी सूरत में कठुआ कैंपस का निर्माण नहीं होने देंगे।

किसानों ने कैंपस परिसर में जोरदार प्रदर्शन करते हुए कहा कि वे आर-पार की लड़ाई की मन बना चुके हैं। उन्हें मरना पसंद है, लेकिन हक लिए बिना पीछे हटना मंजूर नहीं।
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प्रदर्शनकारियों में शामिल गफूर अहमद ने कहा कि उनके कुनबे की चालीस कनाल भूमि यूनिवर्सिटी कैंपस के लिए अधिग्रहीत की गई है।

इसी भूमि के बूते घर का खर्च चलता था। भूमि अधिग्रहण के बाद से मुआवजे के तौर पर भूमि नहीं मिलने की वजह से वे लाचार हो गए हैं। घर का खर्च चलाने के लिए उन्हें माल मवेशी तक बेचने पड़े हैं।
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बलराम सिंह, मुश्ताक अली ने कहा कि अनुसूचित जाति, जनजाति व अन्य वर्ग के कुनबों ने बच्चों के भविष्य के लिए यूनिवर्सिटी कैंपस को भूमि दे दी।

उन्हें बदले में रख सरकार पलाई, चक दराब खान, जगतपुर और जंगलोट गांवों में अलग-अलग भूमि आवंटित की गई। बाकायदा मालिकाना हक दिया गया, लेकिन जंगलोट गांव में दी गई भूमि पर कब्जा नहीं दिलाया जा रहा है।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जब भी वह भूमि में फसल लगाने या फिर निर्माण के लिए जाते हैं तो उन्हें भू माफिया और प्रशासन की मिलीभगत से खदेड़ दिया जाता है।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सरकार और प्रशासन को किसानों का शुक्रगुजार होना चाहिए कि वह अपने रोजगार का एकमात्र साधन कृषि भूमि यूनिवर्सिटी कैंपस को देने के लिए राजी हो गए।


लेकिन, यहां पर तो किसानों के साथ धोखा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों के पाए भूमि ही एकमात्र रोजगार का विकल्प है। जब तक उन्हें उनका हक नहीं दिलाया जाता, वे निर्माण कार्य को आगे नहीं बढ़ने देंगे।

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