अपनों के इंतजार में पथरा रहीं आंखें
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आरएस पुरा के गांव बनोटा के निवासी रामाकांत ने बड़ी ही फरियादी आवाज में एयरफोर्स स्टेशन से बाहर आती एक महिला को कहा मैडम जी मेरे भी परिवार के बारे में पूछ दो।
उनका दामाद अशोक थापा सचिवालय में कार्यरत है जो अपनी पत्नी अनुराधा और तीन वर्ष की बेटी के साथ श्रीनगर में ही फंसा हुआ है। दामाद और बेटी के साथ कोई संपर्क नहीं हो पाने से परेशान रामाकांत कुमार एयरफोर्स स्टेशन के अन्दर जाने वाले और बाहर आने वाले हर इंसान से अपने परिवार के बारे में जानकारी लेने की कोशिश में जुटे हुये हैं।
रामाकांत ने बताया कि वह सोमवार से नियमित तौर पर यहां आ रहे हैं। लेकिन उन्हें कहीं से कोई जानकारी नहीं मिल रही है।
घाटी में फंसे अपनों के इंतजार में बेहाल हुए लोग
दिल में अपनों के सकुशल लौटने की उम्मीद में उनकी आंखें पथरा गई हैं। होठों पर एक ही सवाल...पता करवा दो कि मेरे परिवार वाले कब आएंगे। एयरफोर्स स्टेशन के गेट के बाहर कई लोग अपनों की बाट जोह रहे हैं।
जैसे ही आकाश में जहाज उड़ता देखते हैं, उनकी सारी उम्मीदें प्रबल हो जाती हैं। लेकिन अपनों को लौटता नहीं देख आंखों में आंसू रह रहकर सैलाब बनकर उमड़ रहे थे। गुजरात के रहने वाले दीपक का पूरा परिवार बटमालू में फंसा हुआ है।
माता-पिता, पत्नी संध्या और उसकी अठारह महीने की बच्ची की कोई खबर नहीं है। दीपक कहता है कि सात अगस्त को परिवार के साथ कुछ सेकंड के लिए बात हुई थी और उनके पास खाना तो दूर पीने के लिए पानी भी नहीं है, बच्ची भी दूध के लिये तरस रही है।
हर आने वाले जहाज पर टिकी रहती हैं निगाहें
उनके एक अन्य साथी रामदीन के अनुसार उनकी जाति के कम से भी कम पंद्रह सौ लोग घाटी के कानीकदल, बटमालू और करन नगर इलाकों में फंसे हुए हैं। यह लोग पुराने कपड़ों के बदले बर्तन बेचने का काम करते हैं।
पंजाब के रहने वाले प्रेम जी का पूरा परिवार कानीकदल में फंसा हुआ है। उनकी तस्वीरें दिखाते हुए प्रेम जी के न सिर्फ हाथ कांप रहे थे, बल्कि उनकी बूढ़ी आंखों से आंसू भी टपक रहे थे।
हाथों में अपने भाई की तसवीर लिए जानकारी लेने की कोशिश में जुटे सुनील ने बताया कि शनिवार को उसकी बात उसके भाई से हुई थी और अभी तक कोई अता-पता नहीं है।