Exclusive: वीडियो में देखें कैसे जवानों ने विस्फोट कर 3 आतंकियों को किया ढेर
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दक्षिणी कश्मीर के अनंतनाग जिले के हुसनपोरा आरवानी में 48 घंटे तक चली मुठभेड़ में सुरक्षा बलों ने उस मकान को उड़ा दिया जहां आतंकी छिपे थे। मकान से दो आतंकियों के जले हुए शव बरामद किए गए। पुलिस ने शिनाख्त के लिए डीएनए सैंपल लिया है। मुठभेड़ में लश्कर के तीन स्थानीय आतंकी मारे गए हैं। मुठभेड़ स्थल से तीन एके-47 रायफल भी बरामद की गई है।
मारे गए आतंकियों में गोफबल कुलगाम का माजिद जरगर और वेससु काजीगुंड का रोहेल अमीन शामिल है। शवों को इन इलाकों के बुजुर्गों को सौंप दिया गया। जनाजे में काफी संख्या में लोग शामिल हुए। इस दौरान देश विरोधी नारेबाजी की गई। कुछ देर के लिए हाईवे जाम कर प्रदर्शन किया गया।
उधर, पुलिस द्वारा जारी बयान में बताया गया है कि बुधवार को जानकारी मिली थी कि इलाके के मुश्ताक अहमद गनई के घर में 2 से 3 आतंकी छिपे हुए हैं। मुश्ताक लश्कर का ओजीडब्ल्यू है जो न केवल उन्हें पनाह बल्कि सभी सुविधाएं भी उपलब्ध करवाता करता था।
सूचना पर सेना, सीआरपीएफ और जम्मू कश्मीर पुलिस द्वारा साझा अभियान चलाया गया। तलाशी के दौरान जब वह मकान में घुसे तो आतंकियों ने उन पर गोलियां बरसाई। इसके बाद शुरू हुई मुठभेड़ दो दिन तक चली।
दोनों शव किसके थे?
पुलिस के अनुसार ऑपरेशन उस समय समाप्त हुआ जब जम्मू कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ की क्विक एक्शन टीम (क्यूएटी) ने एक साथ उस मकान पर धावा बोला जहां आतंकी छिपे हुए थे। इस दौरान सेना द्वारा उन्हें कवर फायर दिया गया। सर्च ऑपरेशन के दौरान आतंकियों के 2 शव और 3 एके राइफलें बरामद हुई। पुलिस के अनुसार शिनाख्त के लिए आतंकियों के डीएनए सैंपल लिए गए हैं।
दोनों आतंकियों को दफनाए जाने के दौरान यह चर्चा रही कि उन्होंने स्वयं उपस्थित होकर अपने जिंदा होने का सबूत दिया। जिस दौरान शवों को दफनाया जा रहा था तो नकाबपोश आतंकियों ने अपने सकुशल होने की जानकारी दी। नकाब हटाकर अपना चेहरा दिखाया तब जाकर लोगों को यकीन हुआ कि वे सुरक्षित हैं। अब चर्चा इस बात की है कि आखिर दोनों शव किसके थे।