कश्मीर में जख्मों पर मरहम से पहले सर्जरी होगी। केंद्र सरकार उपद्रवियों, अलगाववादियों और आतंकियों को किसी तरह की रियायत देने के मूड में नहीं है। केंद्र ने रियासत सरकार को अपनी मंशा बता दी है। गृह मंत्री राजनाथ सिंह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल की मीटिंग के बाद तैयार हुई नई रणनीति के तहत पत्थरबाजों पर भी सख्ती बढ़ाई जाएगी।
रणनीति के तहत दक्षिणी, उत्तरी और मध्य कश्मीर में घर-घर सर्च अभियान चलाकर एक-एक व्यक्ति के बारे में डाटा संग्रह किया जाना है। अमरनाथ यात्रा के मद्देनजर सुरक्षा बल और सेना सबसे पहले दक्षिणी कश्मीर के चप्पे-चप्पे को खंगाल रही है। आतंकी बुरहान वानी की मौत के बाद पांच महीने तक चली हिंसा के दौर में सुरक्षा बलों की कार्रवाई में मारे गए पत्थरबाजों के परिवारों को 5 लाख रुपये का मुआवजा और परिवार के एक व्यक्ति को नौकरी देने की प्रक्रिया फिलहाल थम गई है।
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Mehbooba Mufti
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मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने विधानसभा में इसका एलान किया था। मुख्यमंत्री ने इसके लिए अफसरों की उच्चस्तरीय कमेटी भी गठित की है। शासन के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक फिलहाल इस निर्णय को लागू करने की प्रक्रिया धीमी की गई है। भाजपा ने इस निर्णय पर विरोध जताया था। केंद्र सरकार को भी इस फैसले में जल्दबाजी पर एतराज है। सूत्रों का कहना है कि केंद्र ने साफ किया है कि ऐसा कोई कदम फिलहाल ठीक नहीं होगा, जिससे पत्थरबाजों को प्रोत्साहन मिले।
अब दरबार श्रीनगर पहुंच गया है। लिहाजा हिंसा बढ़ने की आशंका है। अलगाववादी और उपद्रवी सरकार के कामकाज को बाधित कर जन असंतोष का संदेश फैलाना चाहते हैं। इस बाबत आतंकी संगठन और उपद्रवी संयुक्त रणनीति पर काम कर रहे हैं। रियासत सरकार ने स्थानीय आतंकियों, उपद्रवियों और कम उम्र के पत्थरबाजों के प्रति पहेल नरम रुख अपनाया था, लेकिन केंद्र की नई रणनीति के बाद अब गिरफ्तार पत्थरबाजों की रिहाई की गति भी धीमी हुई है।
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आतंकवादी
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घाटी में 250 युवा आतंकी संगठनों में हुए भर्ती
श्रीनगर उपचुनाव में हिंसा और अब पत्थरबाजी में बड़े पैमाने पर छात्र-छात्राओं की शिरकत से सुरक्षा बलों की परेशानियां बढ़ीं है। केंद्र की मंशा के अनुरूप रियासत सरकार ने उपद्रवियों पर सख्ती शुरू की है। सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों के मुताबिक पिछले साल जुलाई से अबतक कश्मीर के विभिन्न क्षेत्रों से लगभग 250 युवक आतंकी संगठनों में भर्ती हुए हैं। आतंकी संगठनों में भर्ती होने वाले युवकों की संख्या दक्षिणी कश्मीर में सबसे ज्यादा है। इस कारण हर परिवार का डाटा संग्रह किया जा रहा है, ताकि गायब युवकों की सही संख्या के बारे में जानकारी मिल सके।