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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   Every Sunday when people in the valley are busy with their work, Mir Danish Nabi is strolling among the mounta

J&K: दानिश ने साै अल्पाइन झीलों की मैपिंग, हर रविवार पहाड़ों पर बिताते समय, घाटी की खूबसूरती को कर रहे जगजाहिर

Sat, 13 Dec 2025 01:47 PM IST
निकिता गुप्ता अमृतपाल सिंह बाली अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
अमृतपाल सिंह बाली अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर Published by: निकिता गुप्ता Updated Sat, 13 Dec 2025 01:47 PM IST
सार

बांदीपोरा के 28 वर्षीय मीर दानिश नबी ने पिछले पांच वर्षों में कश्मीर की 100 से अधिक ऊंचाई वाली अल्पाइन झीलों की खोज, दस्तावेजीकरण और मैपिंग की। उनका काम न केवल डिजिटल आर्काइव बना बल्कि पारिस्थितिकी और एडवेंचर टूरिज्म को भी बढ़ावा देने वाला प्रेरणास्रोत बन गया है।

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Every Sunday when people in the valley are busy with their work, Mir Danish Nabi is strolling among the mounta
मीर दानिश नबी। - फोटो : self

विस्तार

हर रविवार जब घाटी में लोग अपने-अपने कार्यों में व्यस्त होते हैं तो मीर दानिश नबी पहाड़ों और बादलों के बीच टहल रहे होते हैं। एक पुराने बैकपैक, हाथ में जीपीएस डिवाइस और हिमालय जितना ही पक्का इरादा लिए उत्तरी कश्मीर के बांदीपोरा जिले के इस 28 वर्षीय युवक ने वह कर दिखाया जो बहुत कम लोग कर दिखाते हैं। बीते पांच साल में दानिश ने कश्मीर के सबसे मुश्किल इलाकों में 100 से ज्यादा ऊंचाई वाली अल्पाइन झीलों को फतह किया है। उन्हें डॉक्यूमेंट किया और उनकी मैपिंग की।

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दानिश कहते हैं कि उनका यह सफर एक निजी खोज के तौर पर शुरू हुआ और अब एक जरूरी डिजिटल आर्काइव बन गया है। उनकी जियोटैग की गई तस्वीरें और नोट्स जिन्हें इस हफ्ते उन्होंने एक वीडियो में शेयर किया है एक छिपे हुए कश्मीर को दर्शाती हैं। दावा किया कि ऊंची पहाड़ियों के बीच ठंडे पानी की झीलें, पर्यटकों को न दिखने वाले ग्लेशियर के तालाब और ऐसे घास के मैदान जो सिर्फ उनके हाथ से बनाए मैप पर ही मौजूद हैं।
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दानिश ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि ये झीलें सिर्फ पानी की जगहें नहीं हैं। ये इस इलाके की पारिस्थितिकी धड़कन और इसकी अनछुई विरासत हैं। कई झीलों के तो लोकल नाम भी नहीं हैं। मैं उन्हें कुछ समय के लिए नाम देता हूं, पास की चोटी, पानी के रंग या उनके आसपास के फूलों के आधार पर जब तक कि उनका कोई नामकरण नहीं करता। दानिश का काम खोज से कहीं आगे है। वह अब पारिस्थितिकी और सम्मान पर आधारित एडवेंचर टूरिज्म के मुखर समर्थक हैं। वह कहते हैं कि हमें हाईवे पर और होटलों की जरूरत नहीं है। हमें इन झीलों तक जाने के लिए निशान वाले रास्ते, बेसिक शेल्टर, ट्रेंड लोकल गाइड और एक रेस्क्यू ग्रिड चाहिए।
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बांदीपोरा और उससे आगे के युवाओं के लिए दानिश एक प्रेरणास्रोत बन चुके हैं। दानिश ने कहा, हाल में 100 अल्पाइन लेक्स पूरे किए। सात दिसंबर को मेरा पड़ाव 100वीं झील दुरिनार-2 थी। इसमें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता। इस साल ही मैंने 31 लेक्स किए हैं। वर्ष 2014 से यह शुरू किया था। परिवार का शुरू से ही सहयोग रहा। दानिश ने कहा कि मां ने बहुत समर्थन दिया। मेरे नाना भी यह शौक रखते थे। दानिश ने बताया कि अपने समय में वह पैदल गुरेज घाटी जाते थे और उनसे सुनी कहानियों से मुझे भी प्रेरणा मिली।

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प्रदेश की सभी अल्पाइन व हाई एल्टीट्यूड झीलों को करना है फतह : दानिश ने कहा कि मेरा एक लक्ष्य है कि जम्मू-कश्मीर में जितनी भी अल्पाइन और हाई एल्टीट्यूड झीलें हैं उन्हें फतह करना। मैं चाहता हूं कि और युवा भी इस शौक को अपनाएं क्योंकि आजकल की व्यस्त दिनचर्या में यह एक ‘’स्ट्रेस बस्टर’’ का काम करती हैं। उन्होंने संदेश दिया कि सभी ट्रैकर्स को पर्यावरण का खास ख्याल रखते हुए इन जगहों पर कचरा नहीं छोड़ना चाहिए। यह अनमोल खजाना है जिसकी रक्षा करना हमारा फर्ज है।

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