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Enemy Agents Ordinance: शत्रु एजेंट अध्यादेश क्या है, जिससे मकबूल भट को हुई थी फांसी, अभी क्यों है चर्चा में

Fri, 28 Jun 2024 07:02 PM IST
kumar गुलशन कुमार डिजिटल डेस्क, जम्मू
डिजिटल डेस्क, जम्मू Published by: kumar गुलशन कुमार Updated Fri, 28 Jun 2024 07:02 PM IST
सार

शत्रु एजेंट अध्यादेश के तहत आतंकी मकबूल भट को फांसी की सजा सुनाई गई थी। उसे दिल्ली की तिहाड़ जेल में 11 फरवरी 1984 को फांसी दी गई थी। आतंकी मकबूल को सीआईडी इंस्पेक्टर अमर चंद की हत्या के मामले में दोषी पाया गया था।

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Enemy Agents Ordinance : What is the Enemy Agents act due to which Maqbool Bhat hanged
जम्मू कश्मीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जम्मू कश्मीर में आतंकियों के मददगारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाने की तैयारी हैं। जम्मू कश्मीर पुलिस प्रमुख आआर स्वैन ने हाल ही में प्रदेश में आतंकियों की मददगारों के खिलाफ शत्रु एजेंट अध्यादेश के तहत मुकदमा चलाए जाने का प्रस्ताव दिया है। यह कानून यूएपीए से भी कठोर है और इसमें मौत की सजा, आजीवन कारावास और जुर्माने का भी प्रावधान है।

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शत्रु एजेंट अध्यादेश के तहत आतंकी मकबूल भट को फांसी की सजा सुनाई गई थी। उसे दिल्ली की तिहाड़ जेल में 11 फरवरी 1984 को फांसी दी गई थी। आतंकी मकबूल को सीआईडी इंस्पेक्टर अमर चंद की हत्या के मामले में दोषी पाया गया था।

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Enemy Agents Ordinance : What is the Enemy Agents act due to which Maqbool Bhat hanged
सुरक्षाबल (फाइल) - फोटो : एजेंसी

कब हुई इस कानून की शुरुआत

शत्रु एजेंट अध्यादेश को सबसे पहले जम्मू-कश्मीर में डोगरा महाराजा के समय में 1917 में पेश किया गया। शब्द 'अध्यादेश' डोगरा युग के दौरान इस्तेमाल किए जाने वाले कानूनों के नामकरण को दर्शाता है।

यह शत्रु एजेंट अध्यादेश दुश्मन के बजाय उसके एजेंटों या मदगारों को लक्षित करता है। कश्मीर पर 1947 के कबायली आक्रमण के संदर्भ में दुश्मन को परिभाषित करता है। जो कोई भी व्यक्ति शत्रु की सहायता करने करता है, उसे शत्रु एजेंट माना जाता है। 1948 में इस अध्यादेश को कानून के रूप में फिर से लागू किया गया। शत्रु एजेंट अध्यादेश को बाद में 1957 के जम्मू-कश्मीर संविधान में धारा 157 के तहत शामिल करके संरक्षित किया गया।

Enemy Agents Ordinance : What is the Enemy Agents act due to which Maqbool Bhat hanged
सुरक्षाबल (फाइल) - फोटो : एजेंसी

370 हटने के बाद क्या हुआ

अनुच्छेद 370 के निरस्त करने के बाद शत्रु एजेंट अध्यादेश और सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) जैसे प्रमुख सुरक्षा कानून को बरकरार रखा गया है। रणबीर दंड संहिता (आरपीसी) जैसे कुछ कानूनों को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के साथ बदला गया है।

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सुरक्षाबल (फाइल) - फोटो : एजेंसी

इसमें कैसे चलता है मुकदमा

शत्रु एजेंट अध्यादेश के तहत मुकदमा उच्च न्यायालय के परामर्श से सरकार द्वारा नियुक्त विशेष न्यायाधीश द्वारा चलाया जाता है। अध्यादेश के तहत अभियुक्त अदालत की इजाजत के बिना वकील नहीं रख सकता है। फैसले के खिलाफ अपील का कोई प्रावधान नहीं है।

अपील तभी की जा सकती है जब उम्रकैद या मौत की सजा मिली हो लेकिन सजा का रिव्यू हाईकोर्ट के आदेश पर नियुक्त कोई सरकारी अधिकारी करेगा और उसका फैसला ही आखिरी माना जाएगा।

इतना ही नहीं, इस कानून के तहत चलने वाले मुकदमे से जुड़े किसी भी रिकॉर्ड की कॉपी सिर्फ आरोपी और उसके वकील को ही मिलती है। कोई तीसरा इसे नहीं देख सकता।

इसके अलावा सरकार की इजाजत के बिना अगर कोई व्यक्ति मुकदमे या आरोपी से जुड़ी किसी भी जानकारी का खुलासा करता है या उसे प्रकाशित करता है तो दोषी पाए जाने पर दो साल तक की जेल या जुर्माना हो सकता है।

शत्रु एजेंट अध्यादेश के विरोध में आईं महबूबा

पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने शुक्रवार को शत्रु एजेंट अध्यादेश के विरोध में आवाज उठाई है। इसे लेकर महबूबा ने कहा कि जम्मू कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था की कीमत संवैधानिक अधिकारों और कानून के शासन को खत्म करके नहीं चुकाई जानी चाहिए। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर..

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