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पुलवामा मुठभेड़ में तीन आतंकी ढेर, मेजर समेत 5 जवान शहीद, एनकाउंटर खत्म
Tue, 19 Feb 2019 05:39 AM IST
Pranjal Dixit
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: Pranjal Dixit
Updated Tue, 19 Feb 2019 05:39 AM IST
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पुलवामा मुठभेड़ में इसी घर में छिपे थे आतंकी
- फोटो : अमर उजाला
जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों ने पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड पाकिस्तानी आतंकी कामरान समेत आतंकी संगठन जैश के तीन आतंकियों को मार गिराया। इस दौरान एक मेजर समेत चार जवान और एक पुलिसकर्मी शहीद हो गए। क्रॉस फायरिंग में एक पत्थरबाज भी मारा गया। 17 घंटे से अधिक चली मुठभेड़ में ब्रिगेडियर, लेफ्टिनेंट कर्नल, डीआईजी पुलिस समेत सुरक्षा बलों के नौ लोग घायल हुए हैं। घटनास्थल से हथियार और गोला बारूद बरामद किया गया है।
आतंकियों की मौजूदगी की सूचना पर सुरक्षा बलों ने रविवार की आधी रात के बाद लगभग डेढ़ बजे जिले के पिंगलीना इलाके में घेराबंदी कर सर्च ऑपरेशन शुरू किया। घेरा सख्त होता देख एक मकान में छिपे आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई से रात लगभग डेढ़ बजे मुठभेड़ शुरू हो गई। रातभर रुक रुककर फायरिंग होती रही। इस बीच सुबह सुरक्षा बलों ने दोबारा जोरदार तरीके से ऑपरेशन शुरू किया। इसमें जैश के तीन आतंकियों को मार गिराने में सफलता मिली।
लेथपोरा हमले की जिम्मेदारी जैश-ए-मोहम्मद ने ली थी। इस हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे। 78 वाहनों का काफिला जम्मू से श्रीनगर जा रहा था तभी लेथपोरा के पास फिदायीन ने विस्फोटकों से भरी कार को काफिले की बस से टकराकर कर विस्फोट किया था। काफिले में लगभग ढाई हजार सीआरपीएफ जवान शामिल थे, जिनमें से ज्यादातर छुट्टियां काटकर ड्यूटी पर लौट रहे थे।
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कामरान और राशिद दोनों थे पाकिस्तानी
राज्यपाल के सलाहकार के विजय कुमार ने बताया कि मारे गए आतंकियों में एक पाकिस्तानी आतंकी गाजी रशीद उर्फ कामरान था। इसका पुलवामा के लेथपोरा में 14 फरवरी को सीआरपीएफ के काफिले पर हुए फिदायीन हमले में हाथ बताया जाता है। दूसरा स्थानीय आतंकी हिलाल अहमद (निवासी-पिंगलीना) था। तीसरा पाकिस्तानी आतंकी राशिद भाई उर्फ उमर गाजी था। डीजीपी दिलबाग सिंह ने कहा कि मारे गए आतंकी पुलवामा हमले में शामिल हो सकते हैं, इसकी जांच की जा रही है।
दो साल से सक्रिय था कामरान
सुरक्षा एजेंसियां कामरान की लेथपोरा हमले में भूमिका की जांच कर रही थी। कामरान संगठन का आपरेशनल कमांडर था। पिछले साल फरवरी में मुफ्ती वकास के मारे जाने के बाद उसने संगठन की बागडोर संभाली थी। वह 2017 से पुलवामा व अवंतीपोरा में सक्रिय था। उसका आतंकवाद से जुड़ा लंबा इतिहास रहा है। वह संगठन में युवाओं की भर्ती करने के साथ ही कई हमलों में भी शामिल रहा है। वह नूर त्राली तथा मुफ्ती वकास के पुराने जैश नेटवर्क पर काम कर रहा था। हिलाल भी कई आतंकी घटनाओं में शामिल रहा था।
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आतंकियों की मौजूदगी की सूचना पर सुरक्षा बलों ने रविवार की आधी रात के बाद लगभग डेढ़ बजे जिले के पिंगलीना इलाके में घेराबंदी कर सर्च ऑपरेशन शुरू किया। घेरा सख्त होता देख एक मकान में छिपे आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई से रात लगभग डेढ़ बजे मुठभेड़ शुरू हो गई। रातभर रुक रुककर फायरिंग होती रही। इस बीच सुबह सुरक्षा बलों ने दोबारा जोरदार तरीके से ऑपरेशन शुरू किया। इसमें जैश के तीन आतंकियों को मार गिराने में सफलता मिली।
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लेथपोरा हमले की जिम्मेदारी जैश-ए-मोहम्मद ने ली थी। इस हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे। 78 वाहनों का काफिला जम्मू से श्रीनगर जा रहा था तभी लेथपोरा के पास फिदायीन ने विस्फोटकों से भरी कार को काफिले की बस से टकराकर कर विस्फोट किया था। काफिले में लगभग ढाई हजार सीआरपीएफ जवान शामिल थे, जिनमें से ज्यादातर छुट्टियां काटकर ड्यूटी पर लौट रहे थे।
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कामरान और राशिद दोनों थे पाकिस्तानी
राज्यपाल के सलाहकार के विजय कुमार ने बताया कि मारे गए आतंकियों में एक पाकिस्तानी आतंकी गाजी रशीद उर्फ कामरान था। इसका पुलवामा के लेथपोरा में 14 फरवरी को सीआरपीएफ के काफिले पर हुए फिदायीन हमले में हाथ बताया जाता है। दूसरा स्थानीय आतंकी हिलाल अहमद (निवासी-पिंगलीना) था। तीसरा पाकिस्तानी आतंकी राशिद भाई उर्फ उमर गाजी था। डीजीपी दिलबाग सिंह ने कहा कि मारे गए आतंकी पुलवामा हमले में शामिल हो सकते हैं, इसकी जांच की जा रही है।
दो साल से सक्रिय था कामरान
सुरक्षा एजेंसियां कामरान की लेथपोरा हमले में भूमिका की जांच कर रही थी। कामरान संगठन का आपरेशनल कमांडर था। पिछले साल फरवरी में मुफ्ती वकास के मारे जाने के बाद उसने संगठन की बागडोर संभाली थी। वह 2017 से पुलवामा व अवंतीपोरा में सक्रिय था। उसका आतंकवाद से जुड़ा लंबा इतिहास रहा है। वह संगठन में युवाओं की भर्ती करने के साथ ही कई हमलों में भी शामिल रहा है। वह नूर त्राली तथा मुफ्ती वकास के पुराने जैश नेटवर्क पर काम कर रहा था। हिलाल भी कई आतंकी घटनाओं में शामिल रहा था।
ये हुए शहीद
मेजर विभूति शंकर ढौडियाल (डंगवाल रोड, देहरादून-उत्तराखंड), सिपाही अजय कुमार (बस्तीकरी-निवारी, मेरठ-उत्तर प्रदेश), सिपाही हरि सिंह (राजगढ़, रेवाड़ी-हरियाणा), हवलदार सियो राम (टिबा बसात, झूंझनू-राजस्थान), हेड कांस्टेबल अब्दुल रशीद (जेके पुलिस)
ये नौ हुए घायल
ऑपरेशन में डीआईजी दक्षिणी कश्मीर अमित कुमार, राष्ट्रीय राइफल्स 12 सेक्टर के ब्रिगेडियर व उनका अंगरक्षक, लेफ्टिनेंट कर्नल, दो मेजर तथा तीन जवान मुठभेड़ में घायल हुए हैं। अमित को पैर में गोली लगी है।
मुठभेड़ शुरू होते ही भड़की हिंसा
मुठभेड़ शुरू होते ही इलाके में हिंसा भड़क उठी। आसपास के गांवों से लोग मौके पर जुट गए। उन्होंने सुरक्षा बलों पर भारी पथराव कर आपरेशन में खलल डालने की कोशिश की। इन्हें तितर बितर करने के लिए सुरक्षा बलों ने आंसू गैस के गोले दागे। इससे भी स्थिति नहीं संभली तो पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया। हिंसक झड़पों में कुछ लोगों के घायल होने की सूचना है।
मेजर विभूति शंकर ढौडियाल (डंगवाल रोड, देहरादून-उत्तराखंड), सिपाही अजय कुमार (बस्तीकरी-निवारी, मेरठ-उत्तर प्रदेश), सिपाही हरि सिंह (राजगढ़, रेवाड़ी-हरियाणा), हवलदार सियो राम (टिबा बसात, झूंझनू-राजस्थान), हेड कांस्टेबल अब्दुल रशीद (जेके पुलिस)
ये नौ हुए घायल
ऑपरेशन में डीआईजी दक्षिणी कश्मीर अमित कुमार, राष्ट्रीय राइफल्स 12 सेक्टर के ब्रिगेडियर व उनका अंगरक्षक, लेफ्टिनेंट कर्नल, दो मेजर तथा तीन जवान मुठभेड़ में घायल हुए हैं। अमित को पैर में गोली लगी है।
मुठभेड़ शुरू होते ही भड़की हिंसा
मुठभेड़ शुरू होते ही इलाके में हिंसा भड़क उठी। आसपास के गांवों से लोग मौके पर जुट गए। उन्होंने सुरक्षा बलों पर भारी पथराव कर आपरेशन में खलल डालने की कोशिश की। इन्हें तितर बितर करने के लिए सुरक्षा बलों ने आंसू गैस के गोले दागे। इससे भी स्थिति नहीं संभली तो पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया। हिंसक झड़पों में कुछ लोगों के घायल होने की सूचना है।
लेथपोरा से मुठभेड़ स्थल 12 किमी दूर
पुलवामा के लेथपोरा में जिस जगह हमला हुआ था वहां से मुठभेड़ स्थल 12 किमी दूर है। बताते हैं कि हमले की साजिश में शामिल रहे आतंकियों को सुरक्षा बलों ने ट्रैक कर लिया था। हमले वाले दिन से ही पुलवामा के इस इलाके में लगातार आतंकियों को ट्रेस किया जा रहा था।
बड़ा भाई होने के नाते घर जाने की अपील
मुठभेड़ स्थल से पुलवामा पुलिस का एक वीडियो सामने आया है। इसमें एक पुलिसकर्मी स्थानीय लोगों से वापस चले जाने की गुहार लगा रहा है। पत्थरबाजी तथा विरोध प्रदर्शन के बीच पुलवामा पुलिस का एक जवान लोगों से माइक पर गुहार लगा रहा है कि वह पुलवामा पुलिस की तरफ से आप सभी से कहना चाहते हैं कि आप की जान हमारे लिए कीमती है। आप नौजवान हैं आपकी जिंदगी है, आप मेहरबानी करके वापस चले जाइए। आप अपनी जान की हिफ ाजत के लिए वापस चले जाइए। आपका बड़ा भाई होने के नाते आपको खबरदार करता हूं कि आप जज्बात से मत काम लीजिए, वापस चले जाइए। आपके घरवाले आपका इंतजार कर रहे हैं।
ऑफिसर लीड कर रहे थे ऑपरेशन
राज्यपाल के सलाहकार के विजय कुमार और डीजीपी दिलबाग सिंह ने शहीद हेड कांस्टेबल अब्दुल रशीद (टंगधार, कुपवाड़ा) को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान सलाहकार ने कहा कि मुठभेड़ के दौरान इतने लोगों के घायल होने से यह साबित होता है कि ऑफिसर ऑपरेशन को लीड कर रहे थे।
पुलवामा के लेथपोरा में जिस जगह हमला हुआ था वहां से मुठभेड़ स्थल 12 किमी दूर है। बताते हैं कि हमले की साजिश में शामिल रहे आतंकियों को सुरक्षा बलों ने ट्रैक कर लिया था। हमले वाले दिन से ही पुलवामा के इस इलाके में लगातार आतंकियों को ट्रेस किया जा रहा था।
बड़ा भाई होने के नाते घर जाने की अपील
मुठभेड़ स्थल से पुलवामा पुलिस का एक वीडियो सामने आया है। इसमें एक पुलिसकर्मी स्थानीय लोगों से वापस चले जाने की गुहार लगा रहा है। पत्थरबाजी तथा विरोध प्रदर्शन के बीच पुलवामा पुलिस का एक जवान लोगों से माइक पर गुहार लगा रहा है कि वह पुलवामा पुलिस की तरफ से आप सभी से कहना चाहते हैं कि आप की जान हमारे लिए कीमती है। आप नौजवान हैं आपकी जिंदगी है, आप मेहरबानी करके वापस चले जाइए। आप अपनी जान की हिफ ाजत के लिए वापस चले जाइए। आपका बड़ा भाई होने के नाते आपको खबरदार करता हूं कि आप जज्बात से मत काम लीजिए, वापस चले जाइए। आपके घरवाले आपका इंतजार कर रहे हैं।
ऑफिसर लीड कर रहे थे ऑपरेशन
राज्यपाल के सलाहकार के विजय कुमार और डीजीपी दिलबाग सिंह ने शहीद हेड कांस्टेबल अब्दुल रशीद (टंगधार, कुपवाड़ा) को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान सलाहकार ने कहा कि मुठभेड़ के दौरान इतने लोगों के घायल होने से यह साबित होता है कि ऑफिसर ऑपरेशन को लीड कर रहे थे।
कश्मीर के 50 गांव में शुरू हुआ मिशन 'आतंकियों का खात्मा', सेना-सीआरपीएफ-पुलिस ने बनाया मास्टर प्लान
कश्मीर में आतंकी वारदातों को अंजाम देने में कश्मीर के लोकल सपोर्ट का सबसे बड़ा हाथ है। इन हाथों को काटने के लिए अब सुरक्षा और खुफिया एजेंसियां पूरी तरह एक्शन मूड में आ गई हैं। दक्षिण कश्मीर में आतंकी संगठनों के लिए काम करने वाले युवकों से लेकर महिलाओं तक की कुंडली खंगालने में जम्मू कश्मीर पुलिस और आर्मी के खुफिया विंग के दिग्गज अफसरों की टीम काम पर लग गई है।
खासकर, पुलवामा के उस इलाके पर शिकंजा कसा गया है, जिस जगह पर सीआरपीएफ काफिले पर हमला हुआ। सूत्रों का कहना है कि श्रीनगर से लेकर पांपोर तक नेशनल हाईवे से सटे गांवों में आतंकियों का बड़ा लोकल नेटवर्क काम कर रहा है। करीब 50 ऐसे गांव हैं, जहां इन आतंकी संगठनों के लिए काम हो रहा है।
आतंकियों ने सीआरपीएफ पर हमले के लिए लेथपोरा का इलाका चुना था। लेथपोरा में आतंकियों के काम करने वाला बड़ा ग्रुप सक्रिय है। खुफिया एजेेंसियां लेथपोरा समेत अन्य जगहों पर लोकल नेटवर्क का रिकार्ड खंगाल रही हैं। इनके मोबाइल नंबर से लेकर उनका बैकग्राउंड, बैंक खातों और नौकरी तक का रिकार्ड खंगाला जा रहा है।
सूत्रों का यह भी कहना है कि खुफिया विंग के टाप के अधिकारियों को इसकी जिम्मेदारी दी गई है। इनमें कई 1990 के दशक में काम कर चुके हैं। कुछ रिटायर अफसरों की मदद ली जा रही है। खुफिया एजेंसियां आतंकियों के लोकल नेटवर्क को पूरी तरह से ध्वस्त करना चाहती हैं क्योंकि कश्मीर में आतंकी गतिविधियों की रीढ़ लोकल नेटवर्क है।
खासकर, पुलवामा के उस इलाके पर शिकंजा कसा गया है, जिस जगह पर सीआरपीएफ काफिले पर हमला हुआ। सूत्रों का कहना है कि श्रीनगर से लेकर पांपोर तक नेशनल हाईवे से सटे गांवों में आतंकियों का बड़ा लोकल नेटवर्क काम कर रहा है। करीब 50 ऐसे गांव हैं, जहां इन आतंकी संगठनों के लिए काम हो रहा है।
आतंकियों ने सीआरपीएफ पर हमले के लिए लेथपोरा का इलाका चुना था। लेथपोरा में आतंकियों के काम करने वाला बड़ा ग्रुप सक्रिय है। खुफिया एजेेंसियां लेथपोरा समेत अन्य जगहों पर लोकल नेटवर्क का रिकार्ड खंगाल रही हैं। इनके मोबाइल नंबर से लेकर उनका बैकग्राउंड, बैंक खातों और नौकरी तक का रिकार्ड खंगाला जा रहा है।
सूत्रों का यह भी कहना है कि खुफिया विंग के टाप के अधिकारियों को इसकी जिम्मेदारी दी गई है। इनमें कई 1990 के दशक में काम कर चुके हैं। कुछ रिटायर अफसरों की मदद ली जा रही है। खुफिया एजेंसियां आतंकियों के लोकल नेटवर्क को पूरी तरह से ध्वस्त करना चाहती हैं क्योंकि कश्मीर में आतंकी गतिविधियों की रीढ़ लोकल नेटवर्क है।
सूत्रों का कहना है कि अलगाववादियों, पूर्व आतंकियों, ओवर ग्राउंड वर्कर के परिवारों, स्कूल कालेज में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स तक की सूची बनाई जा रही है। इन सबके खिलाफ सख्ती से कार्रवाई करने का आदेश दिया गया है। राज्य पुलिस इन लोगों के खिलाफ देशद्रोह का मजबूत केस बनाने की तैयारी कर रही है।किसी पर नरमी के मूड में नहीं