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Jammu News: डेलीवेजरों ने बयां की दास्तां, मात्र 9,300 रुपये में घर चलाना मुश्किल
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पीडीडी डेलीवेजरों का धरना 17वें दिन भी रहा जारी
संवाद न्यूज एजेंसी।
जम्मू। लंबित मांगों को लेकर बिजली विकास विभाग (पीडीडी) डेलीवेजरों का एमडी कार्यालय बाहु प्लाजा के बाहर धरना रविवार को 17वें दिन भी जारी रहा। धरने पर बैठे कर्मियों ने अपनी परेशानियां बताते हुए कहा कि मात्र 9,300 रुपये वेतन मिलता है। इससे घर चलाना मुश्किल हो रहा है।
यूनियन के अध्यक्ष अखिल शर्मा ने कहा कि सरकार उनके हक में निर्णय लेने में समय लगा रही है। उच्चाधिकारियों के आश्वासन पर उन्होंने भूख-हड़ताल जरूर स्थगित की है, लेकिन आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक मांगें पूरी नहीं की जातीं। पक्की नाैकरी के उनकी मांगों में जिन 557 कर्मियों की डीपीसी की गई है, उनकी सूची जारी करना व लिस्ट को अपग्रेड करना, दिव्यांग कर्मियों को उचित मुआवजा देना, न्यूनतम वेतन लागू करना, ड्यूटी के दौरान जिन कर्मियों की मृत्यु हुई है उनके परिजनों की बीमा राशि प्रदान करना व वेतन जारी करना शामिल हैं।
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विभाग में काम करते 21 वर्ष बीत गए हैं। मात्र 9300 रुपये वेतन मिलता है, जिसमें घर का गुजर-बसर करना कठिन है। हम गुरबत का जीवन जी रहे हैं। परिवार में कुल पांच सदस्य है। महंगाई जिस प्रकार से बड़ रही है, वेतन वृद्धि उस तरह से नहीं हो रही। विभाग केवल काम ले रहा है, हमारी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।
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विक्रम सिंह, डेलीवेजर
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विभाग में काम करते 18 वर्ष बीत गए हैं। वेतन इतना कम है कि परिवार में छह सदस्यों का पेट पालना मुश्किल हो रहा है। बढ़ती महंगाई ने जीना मुहाल किया हुआ है। सरकार उनकी लगातार अनदेखी कर रही है।
- आशीष वर्मा, डेलीवेजर
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संवाद न्यूज एजेंसी।
जम्मू। लंबित मांगों को लेकर बिजली विकास विभाग (पीडीडी) डेलीवेजरों का एमडी कार्यालय बाहु प्लाजा के बाहर धरना रविवार को 17वें दिन भी जारी रहा। धरने पर बैठे कर्मियों ने अपनी परेशानियां बताते हुए कहा कि मात्र 9,300 रुपये वेतन मिलता है। इससे घर चलाना मुश्किल हो रहा है।
यूनियन के अध्यक्ष अखिल शर्मा ने कहा कि सरकार उनके हक में निर्णय लेने में समय लगा रही है। उच्चाधिकारियों के आश्वासन पर उन्होंने भूख-हड़ताल जरूर स्थगित की है, लेकिन आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक मांगें पूरी नहीं की जातीं। पक्की नाैकरी के उनकी मांगों में जिन 557 कर्मियों की डीपीसी की गई है, उनकी सूची जारी करना व लिस्ट को अपग्रेड करना, दिव्यांग कर्मियों को उचित मुआवजा देना, न्यूनतम वेतन लागू करना, ड्यूटी के दौरान जिन कर्मियों की मृत्यु हुई है उनके परिजनों की बीमा राशि प्रदान करना व वेतन जारी करना शामिल हैं।
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विभाग में काम करते 21 वर्ष बीत गए हैं। मात्र 9300 रुपये वेतन मिलता है, जिसमें घर का गुजर-बसर करना कठिन है। हम गुरबत का जीवन जी रहे हैं। परिवार में कुल पांच सदस्य है। महंगाई जिस प्रकार से बड़ रही है, वेतन वृद्धि उस तरह से नहीं हो रही। विभाग केवल काम ले रहा है, हमारी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।
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विक्रम सिंह, डेलीवेजर
विभाग में काम करते 18 वर्ष बीत गए हैं। वेतन इतना कम है कि परिवार में छह सदस्यों का पेट पालना मुश्किल हो रहा है। बढ़ती महंगाई ने जीना मुहाल किया हुआ है। सरकार उनकी लगातार अनदेखी कर रही है।
- आशीष वर्मा, डेलीवेजर