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'स्वराज' का वादा मुफ्ती के गले की फांस?

Thu, 01 Jan 2015 12:36 PM IST
Updated Thu, 01 Jan 2015 12:36 PM IST
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election promises create problem to mufti mohammad sayeed

विधान सभा चुनाव में 87 सीटों में से पीडीपी को 28 और भाजपा को 25 सीटें मिली हैं। बहुमत के लिए 44 विधायकों का समर्थन जरूरी है। बुधवार को पीडीपी की नेता महबूबा मुफ्ती राज्यपाल एनएन वोहरा से मिलकर सरकार गठन पर चर्चा करेंगी।

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भाजपा का प्रतिनिधिमंडल एक जनवरी को राज्यपाल से मिलेगा। भाजपा ने राज्य में उसके बगैर राज्य की स्थानीय पार्टियों के गठबंधन का विरोध किया है। सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने तो संकेत दिए वे भाजपा के साथ हाथ मिलाने के तैयार हैं।
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लेकिन पार्टी अध्यक्षा महबूबा मुफ्ती ने पार्टी नेताओं से इस मसले पर मीडिया में टिप्पणी करने से मना किया है। महबूबा मुफ्ती और उनके पिता मुफ्ती मोहम्मद सईद की मुश्किल ये है कि उन्होंने राज्य के लोगों से 'स्वराज' का वादा कर रखा है।
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सिविल सोसायटी समूहों का कहना है कि कल तक मुफ्ती मोहम्मद सईद भाजपा के कदमों को आगे बढ़ने से रोकने की बात कर रहे थे। लेकिन आज वे उसी भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाने के लिए उत्साहित हैं।

'भाजपा को रोकने की बात'

election promises create problem to mufti mohammad sayeed

भाजपा कश्मीर को भारत के साथ 'एकीकृत' करना चाहती है। जब से चुनाव नतीजे आए हैं तब से भाजपा और दूसरों दलों के बीच कथित तौर पर गुप्त बातचीत के दौर चले हैं। लेकिन अभी तक बात आगे नहीं बढ़ पाई है।

इस बीच कश्मीर में कुछ सिविल सोसायटी समूहों ने भाजपा सरकार की संभावना को घाटी के लिए खतरा बताया और मुफ्ती मोहम्मद सईद के विरोध में प्रदर्शन किए हैं।

एक प्रदर्शनकारी ने कहा, 'इस वक्त उस नारे को अमली जामा पहनाने का टाइम आ चुका है और उन्हें इस पर अमल करना चाहिए। कश्मीर के लोगों ने पीडीपी को भाजपा के खिलाफ वोट दिया है। हमारा साफ कहना है कि पीडीपी किसी कश्मीरी पार्टी के साथ गठबंधन करे लेकिन किसी भी कीमत पर भाजपा के साथ न जाए।'

राज्य की मौजूदा विधान सभा की अवधि 18 जनवरी तक है लेकिन राज्पाल ने इस चुनाव में दो बड़ी पार्टियों के तौर पर उभरी पीडीपी और भाजपा से कहा था कि वे सरकार बनाने को लेकर अपनी नीति को स्पष्ट करें।

उमर लंदन में

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राज्य में नई सरकार के गठन की कवायदों के बीच राज्य के निवर्तमान मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला लंदन चले गए हैं। उनकी गैर-मौजूदगी के कारण राज्य में अटकलों और अफवाहों का बाजार गर्म है।

साल 2002 में भी जब पीडीपी को 15 और कांग्रेस को 17 सीटें मिली थीं तो सरकार बनने की प्रक्रिया में 22 दिन की देरी हुई थी। इसके कारण राज्य में एक महीने के लिए राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया था।

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