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कृषि, जैव-संसाधन और पारंपरिक ज्ञान सफल स्टार्टअप को दे सकते हैं जन्म : जितेंद्र
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सीएसआईआर में कार्यक्रम में मौजूद केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्यौगिकी मंत्री डॉ.जितेंद्र सिंह। विभ
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्यौगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि कृषि जैव संसाधन और पारंपरिक ज्ञान सफल स्टार्टअप को जन्म दे सकते हैं। वह शुक्रवार को इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीग्रेटिव मेडिसिन में आयोजित राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस पर कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंचे थे।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार संस्थान के अत्याधुनिक शोध व स्टार्टअप ग्रोथ को बढ़ावा देने के प्रति प्रतिबद्ध है। उन्होंने संस्थान के समृद्ध इतिहास पर प्रकाश डाला जिसकी शुरुआत महाराजा हरि सिंह के विजन और भारतीय फार्माकोलॉजी के जनक सर राम नाथ चोपड़ा के अग्रणी काम से हुई थी। उन्होंने कहा कि मौजूदा नेतृत्व में आईआईएम अपनी वैज्ञानिक और इनोवेशन संचालित पहचान को मजबूत रख रही है।
लैवेंडर खेती पूर्वोत्तर राज्यों तक पहुंची
डॉ. जितेंद्र ने कहा कि डोडा में लैवेंडर की खेती के रूप में जो सफर शुरू हुआ था वह अब उत्तराखंड और हिमाचल से लेकर पूर्वोत्तर राज्यों तक हिमालयी क्षेत्र में फैल गया है। इस पहल ने दिखाया कि कैसे कृषि, जैव-संसाधन और पारंपरिक ज्ञान सफल स्टार्टअप को जन्म दे सकते हैं। 2014 में स्टार्टअप इंडिया, स्टैंडअप इंडिया की शुरुआत महत्वपूर्ण कदम था। कुछ सौ उद्यमों से आज भारत में 2 लाख से अधिक स्टार्टअप हैं। उन्होंने छात्रों व शिक्षकों को रिसर्च, इनोवेशन और वैल्यू एडिशन पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रोत्साहित किया।
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कंपनियों के बीच एमओयू
कार्यक्रम में बायोनेस्ट इनक्यूबेशन सेंटर और ट्राइब रूट एसेंशियल्स प्राइवेट लिमिटेड के बीच समझौता ज्ञापन हुआ। निदेशक डॉ. जबीर अहमद ने बताया कि संस्थान से अब तक 128 स्टार्टअप इनक्यूबेट किए गए हैं और स्टार्टअप द्वारा बाजार में 18 उत्पाद लॉन्च किए गए हैं।
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जम्मू। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्यौगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि कृषि जैव संसाधन और पारंपरिक ज्ञान सफल स्टार्टअप को जन्म दे सकते हैं। वह शुक्रवार को इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीग्रेटिव मेडिसिन में आयोजित राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस पर कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंचे थे।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार संस्थान के अत्याधुनिक शोध व स्टार्टअप ग्रोथ को बढ़ावा देने के प्रति प्रतिबद्ध है। उन्होंने संस्थान के समृद्ध इतिहास पर प्रकाश डाला जिसकी शुरुआत महाराजा हरि सिंह के विजन और भारतीय फार्माकोलॉजी के जनक सर राम नाथ चोपड़ा के अग्रणी काम से हुई थी। उन्होंने कहा कि मौजूदा नेतृत्व में आईआईएम अपनी वैज्ञानिक और इनोवेशन संचालित पहचान को मजबूत रख रही है।
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लैवेंडर खेती पूर्वोत्तर राज्यों तक पहुंची
डॉ. जितेंद्र ने कहा कि डोडा में लैवेंडर की खेती के रूप में जो सफर शुरू हुआ था वह अब उत्तराखंड और हिमाचल से लेकर पूर्वोत्तर राज्यों तक हिमालयी क्षेत्र में फैल गया है। इस पहल ने दिखाया कि कैसे कृषि, जैव-संसाधन और पारंपरिक ज्ञान सफल स्टार्टअप को जन्म दे सकते हैं। 2014 में स्टार्टअप इंडिया, स्टैंडअप इंडिया की शुरुआत महत्वपूर्ण कदम था। कुछ सौ उद्यमों से आज भारत में 2 लाख से अधिक स्टार्टअप हैं। उन्होंने छात्रों व शिक्षकों को रिसर्च, इनोवेशन और वैल्यू एडिशन पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रोत्साहित किया।
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कार्यक्रम में बायोनेस्ट इनक्यूबेशन सेंटर और ट्राइब रूट एसेंशियल्स प्राइवेट लिमिटेड के बीच समझौता ज्ञापन हुआ। निदेशक डॉ. जबीर अहमद ने बताया कि संस्थान से अब तक 128 स्टार्टअप इनक्यूबेट किए गए हैं और स्टार्टअप द्वारा बाजार में 18 उत्पाद लॉन्च किए गए हैं।