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Jammu News: शरीर में चर्बी और वजन को कैसे काबू करते हैं हार्मोन... जेयू में चर्चा
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। शरीर में चर्बी जमा होने, भूख लगने और वजन बढ़ने में हार्मोन की अहम भूमिका होती है। इनका शरीर पर क्या असर पड़ता है और मोटापे व जिगर की बीमारियों से इनका क्या संबंध है, इस पर जम्मू विश्वविद्यालय में चर्चा हुई।
कनाडा की यूनिवर्सिटी ऑफ सस्केचेवान के प्रोफेसर सूरज उन्नियप्पन ने अपने शोध के जरिये नेस्फैटिन-1 और उससे मिलते-जुलते एक अन्य हार्मोन के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ये हार्मोन शरीर में ऊर्जा के इस्तेमाल और चर्बी को नियंत्रित करने में भूमिका निभाते हैं।
विवि के प्राणी विज्ञान विभाग और यूनिवर्सिटी साइंस इंस्ट्रूमेंटेशन सेंटर (यूएसआईसी) की ओर से बुधवार को शोध संगोष्ठी और एमएससी के विद्यार्थियों के लिए व्याख्यान आयोजित किए गए। प्रो. उन्नियप्पन ने बताया कि इन हार्मोन का अध्ययन शरीर में चर्बी से जुड़ी गड़बड़ियों को समझने में मदद कर सकता है।
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विद्यार्थियों के लिए हुए पहले व्याख्यान में प्रो. उन्नियप्पन ने बताया कि दिमाग किस तरह पिट्यूटरी ग्रंथि को नियंत्रित करता है। यह ग्रंथि शरीर के कई जरूरी हार्मोन बनाती है। दूसरे व्याख्यान में उन्होंने पेट और अग्न्याशय से निकलने वाले हार्मोन के बारे में बताया। ये हार्मोन भूख, शरीर के वजन और खून में शुगर के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। इनका संबंध मधुमेह और मोटापे से भी है। कुलपति प्रो. उमेश राय ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से विद्यार्थियों और शोधार्थियों को नए विषयों पर जानने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रहे शोध को समझने का मौका मिलता है। इससे पढ़ाई के साथ शोध को भी बढ़ावा मिलता है।
कार्यक्रम में प्राणी विज्ञान विभाग के प्रमुख, यूएसआईसी के निदेशक और प्राणी विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, पर्यावरण विज्ञान व जैव प्रौद्योगिकी विभागों के शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी शामिल हुए।
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जम्मू। शरीर में चर्बी जमा होने, भूख लगने और वजन बढ़ने में हार्मोन की अहम भूमिका होती है। इनका शरीर पर क्या असर पड़ता है और मोटापे व जिगर की बीमारियों से इनका क्या संबंध है, इस पर जम्मू विश्वविद्यालय में चर्चा हुई।
कनाडा की यूनिवर्सिटी ऑफ सस्केचेवान के प्रोफेसर सूरज उन्नियप्पन ने अपने शोध के जरिये नेस्फैटिन-1 और उससे मिलते-जुलते एक अन्य हार्मोन के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ये हार्मोन शरीर में ऊर्जा के इस्तेमाल और चर्बी को नियंत्रित करने में भूमिका निभाते हैं।
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विवि के प्राणी विज्ञान विभाग और यूनिवर्सिटी साइंस इंस्ट्रूमेंटेशन सेंटर (यूएसआईसी) की ओर से बुधवार को शोध संगोष्ठी और एमएससी के विद्यार्थियों के लिए व्याख्यान आयोजित किए गए। प्रो. उन्नियप्पन ने बताया कि इन हार्मोन का अध्ययन शरीर में चर्बी से जुड़ी गड़बड़ियों को समझने में मदद कर सकता है।
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विद्यार्थियों के लिए हुए पहले व्याख्यान में प्रो. उन्नियप्पन ने बताया कि दिमाग किस तरह पिट्यूटरी ग्रंथि को नियंत्रित करता है। यह ग्रंथि शरीर के कई जरूरी हार्मोन बनाती है। दूसरे व्याख्यान में उन्होंने पेट और अग्न्याशय से निकलने वाले हार्मोन के बारे में बताया। ये हार्मोन भूख, शरीर के वजन और खून में शुगर के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। इनका संबंध मधुमेह और मोटापे से भी है। कुलपति प्रो. उमेश राय ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से विद्यार्थियों और शोधार्थियों को नए विषयों पर जानने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रहे शोध को समझने का मौका मिलता है। इससे पढ़ाई के साथ शोध को भी बढ़ावा मिलता है।
कार्यक्रम में प्राणी विज्ञान विभाग के प्रमुख, यूएसआईसी के निदेशक और प्राणी विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, पर्यावरण विज्ञान व जैव प्रौद्योगिकी विभागों के शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी शामिल हुए।