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Jammu News: विद्यार्थियों ने एआई से जाने पढ़ाई, नौकरी और रोजमर्रा की जिंदगी में हो रहे बदलाव
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- राष्ट्रीय महिला आयोग ने केंद्रीय विश्वविद्यालय जम्मू में आयोजित की कार्यशाला
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। राष्ट्रीय महिला आयोग ने यशोदा एआई अभियान के तहत शुक्रवार को केंद्रीय विश्वविद्यालय जम्मू में एक कार्यशाला आयोजित की। इसमें छात्रों को बताया गया कि कैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) हमारी पढ़ाई, नौकरी और रोजमर्रा की जिंदगी को बदल रहा है। साथ ही एआई के गलत इस्तेमाल से होने वाले खतरे जैसे फर्जी खबरें, साइबर अपराध और ऑनलाइन परेशानियों से कैसे बचा जाए इस पर भी चर्चा की गई।
कार्यशाला में यूनिवर्सिटी के अलग-अलग विभागों से आए छात्रों ने हिस्सा लिया। उन्हें समझाया गया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक तरफ नए मौके दे रहा है, तो दूसरी तरफ इसका गलत इस्तेमाल समाज और इंसाफ की व्यवस्था को नुकसान भी पहुंचा सकता है। कार्यक्रम चार हिस्सों में बंटा था, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से पढ़ाई और करियर के मौके, साइबर कानून और महिलाओं की ऑनलाइन सुरक्षा, तकनीक के नैतिक पहलू और आखिर में ट्रेनिंग। छात्रों ने चैटजीपीटी, साइबर दोस्त, महिला सुरक्षा एप और दूसरे नए टूल्स पर प्रैक्टिकल अभ्यास भी किया। राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने कहा कि तकनीक का असली फायदा तभी है, जब हम इसे जिम्मेदारी से इस्तेमाल करें। अगर छात्र एआई को समझदारी से अपनाएंगे तो वे अधिकारों की रक्षा करने में बड़ी भूमिका निभाएंगे।
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जानिए क्या है यशोदा एआई
यशोदा एआई राष्ट्रीय महिला आयोग का खास अभियान है जो छात्रों को डिजिटल जमाने में सुरक्षित और जिम्मेदार तरीके से आगे बढ़ने की ट्रेनिंग देता है। इसमें ऑनलाइन सुरक्षा, महिलाओं की डिजिटल सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की जानकारी और उसका सही इस्तेमाल शामिल है। इस पहल को फ्यूचर शिफ्ट लैब्स के सहयोग से चलाया जा रहा है और इसके जरिये देशभर के स्कूल, कॉलेज और सामाजिक संस्थानों तक पहुंच बनाई जा रही है।
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। राष्ट्रीय महिला आयोग ने यशोदा एआई अभियान के तहत शुक्रवार को केंद्रीय विश्वविद्यालय जम्मू में एक कार्यशाला आयोजित की। इसमें छात्रों को बताया गया कि कैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) हमारी पढ़ाई, नौकरी और रोजमर्रा की जिंदगी को बदल रहा है। साथ ही एआई के गलत इस्तेमाल से होने वाले खतरे जैसे फर्जी खबरें, साइबर अपराध और ऑनलाइन परेशानियों से कैसे बचा जाए इस पर भी चर्चा की गई।
कार्यशाला में यूनिवर्सिटी के अलग-अलग विभागों से आए छात्रों ने हिस्सा लिया। उन्हें समझाया गया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक तरफ नए मौके दे रहा है, तो दूसरी तरफ इसका गलत इस्तेमाल समाज और इंसाफ की व्यवस्था को नुकसान भी पहुंचा सकता है। कार्यक्रम चार हिस्सों में बंटा था, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से पढ़ाई और करियर के मौके, साइबर कानून और महिलाओं की ऑनलाइन सुरक्षा, तकनीक के नैतिक पहलू और आखिर में ट्रेनिंग। छात्रों ने चैटजीपीटी, साइबर दोस्त, महिला सुरक्षा एप और दूसरे नए टूल्स पर प्रैक्टिकल अभ्यास भी किया। राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने कहा कि तकनीक का असली फायदा तभी है, जब हम इसे जिम्मेदारी से इस्तेमाल करें। अगर छात्र एआई को समझदारी से अपनाएंगे तो वे अधिकारों की रक्षा करने में बड़ी भूमिका निभाएंगे।
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जानिए क्या है यशोदा एआई
यशोदा एआई राष्ट्रीय महिला आयोग का खास अभियान है जो छात्रों को डिजिटल जमाने में सुरक्षित और जिम्मेदार तरीके से आगे बढ़ने की ट्रेनिंग देता है। इसमें ऑनलाइन सुरक्षा, महिलाओं की डिजिटल सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की जानकारी और उसका सही इस्तेमाल शामिल है। इस पहल को फ्यूचर शिफ्ट लैब्स के सहयोग से चलाया जा रहा है और इसके जरिये देशभर के स्कूल, कॉलेज और सामाजिक संस्थानों तक पहुंच बनाई जा रही है।
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