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नीट के परिणाम में फिर चमके जम्मू-कश्मीर के होनहार
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जम्मू। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने शुक्रवार देर शाम नीट के परिणाम घोषित कर दिए। इस बार भी जम्मू-कश्मीर के विद्यार्थियों का प्रदर्शन बेहतर रहा। पुलवामा जिले के बासित खान ने देश में 188वां रैंक हासिल किया है। बताया जाता है कि वह कश्मीर का पहला छात्र है जिसने 720 में से 695 अंक हासिल किए हैं। इसके अलावा सरनजीत ने 682 अंकों के साथ 504, जयवीर ने 675 अंकों के साथ 953 और लेबा ऐजाज ने 675 अंकों के साथ 954 वां रैंक हासिल किया है। इसके अलावा आकाश इंस्टीट्यूट के विद्यार्थियों में आयुषी ने 678 अंक, अरुजा समस्याल ने 671, शिवानी ने 659, अमन पुनीत ने 648, सत्यम कटोच ने 645 और जानवी गुप्ता ने 628 अंक हासिल किए। इंस्टीट्यूट के निदेशक राज भरत भगत ने सभी विद्यार्थियों को बधाई दी।
देर शाम घोषित हुए परिणाम को नीट की साइट पर देखने में विद्यार्थियों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ा। 2 जी इंटरनेट होने के चलते साइट खुलने में काफी वक्त लग रहा था। कुछ विद्यार्थियों को मशक्कत के बाद अपना परिणाम पता चला। कई सुबह के इंतजार में हैं।
ट्यूशन से मदद मिली : अरुजा
अरुजा समस्याल ने 671 अंक हासिल किए हैं। उन्होंने बताया कि लॉकडाउन की वजह से ट्यूशन बंद हो गई, तो पढ़ाई में दिक्कत आई। पढ़ाई करने का कोई निर्धारित समय नहीं था जब भी मौका मिलता था तो पढ़ाई कर लेती थी। ट्यूशन से काफी मदद मिली।
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बचपन से डॉक्टर बनने का सपना : शिवानी
659 अंक हासिल करने वाली शिवानी शर्मा ने कहा कि छठी कक्षा से डॉक्टर बनने का सपना देखा था। इसके लिए 11वीं कक्षा से ही मेहनत करनी शुरू कर दी थी। पूरे दो साल ट्यूशन की मदद से पढ़ाई की। उन्होंने बताया कि वह सुबह कम पढ़ती थी लेकिन देर रात तक पढ़ाई करती थी।
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देर शाम घोषित हुए परिणाम को नीट की साइट पर देखने में विद्यार्थियों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ा। 2 जी इंटरनेट होने के चलते साइट खुलने में काफी वक्त लग रहा था। कुछ विद्यार्थियों को मशक्कत के बाद अपना परिणाम पता चला। कई सुबह के इंतजार में हैं।
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ट्यूशन से मदद मिली : अरुजा
अरुजा समस्याल ने 671 अंक हासिल किए हैं। उन्होंने बताया कि लॉकडाउन की वजह से ट्यूशन बंद हो गई, तो पढ़ाई में दिक्कत आई। पढ़ाई करने का कोई निर्धारित समय नहीं था जब भी मौका मिलता था तो पढ़ाई कर लेती थी। ट्यूशन से काफी मदद मिली।
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बचपन से डॉक्टर बनने का सपना : शिवानी
659 अंक हासिल करने वाली शिवानी शर्मा ने कहा कि छठी कक्षा से डॉक्टर बनने का सपना देखा था। इसके लिए 11वीं कक्षा से ही मेहनत करनी शुरू कर दी थी। पूरे दो साल ट्यूशन की मदद से पढ़ाई की। उन्होंने बताया कि वह सुबह कम पढ़ती थी लेकिन देर रात तक पढ़ाई करती थी।