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मोदी जी, क्या ऐसे पढ़ेगी जम्मू की बिटिया?

Mon, 09 Feb 2015 01:36 AM IST
Updated Mon, 09 Feb 2015 01:36 AM IST
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DU not admitting JK students selected under PMSSS

रियासत के संसाधन विहीन मेधावी विद्यार्थियों की उच्च शिक्षा का रास्ता आसान करने के लिए बनी मानव संसाधन मंत्रालय की प्राइम मिनिस्टर स्पेशल स्कॉलरशिप स्कीम में चयनित 51 छात्र-छात्राओं के सपने सफर शुरू होने से पहले ही बिखरते नजर आ रहे हैं। इसी स्कीम के झमेले में फंस कर बुरी तरह हताश हो चुकी है जम्मू के अशोक नगर की रहने वाली अवंतिका।

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बाहरवीं की परीक्षा में 92 प्रतिशत अंक लाकर आटो ड्राइवर की बेटी अवंतिका दत्ता ने अपने माता-पिता ही नहीं पूरे शहर का सिर फ़ख्र से ऊंचा कर दिया था। योजना के तहत श्रीनगर में हुई काउंसिलिंग के दौरान एआईसीटीई की ओर से अवंतिका को आगे की पढ़ाई के लिए (दिल्ली यूनिवर्सिटी) डीयू का कमला नेहरू कालेज आवंटित किया गया।
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अवंतिका की जिंदगी का दूसरा पहलू भी है। वो बेहद गरीब परिवार से है। उसके पिता ऑटो चलाते हैं, लेकिन बेटी की पढ़ाई के खर्च में कोई कसर नहीं छोड़ते। जिस हकीकत पर से अवंतिका की मां ने पर्दा उठाया उसे जानकर हैरत में पड़ जायेंगे।
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काउंसलिंग का लेटर लेटकर जब अवंतिका दिल्ली के कमला नेहरू कॉलेज पहुंची तो उससे कहा गया कि प्राइम मिनिस्टर स्पेशल स्कॉलरशिप स्कीम (PMSSS) के बारे में कुछ नहीं पता। डीयू और कालेज प्रशासन ने इस योजना के बारे में जानकारी नहीं होने की बात कहकर दाखिला नहीं दिया। फिर अवंतिका अपनी मां के साथ एआईसीटीई के दफ्तर पहुंची।

अवंतिका के सपनों को नहीं मिल पाए पंख!

DU not admitting JK students selected under PMSSS

यहां से अवंत‌िका और उसकी मां को यूजीसी के दफ्तर भेज दिया गया। अवंतिका की मां ने बताया कि यूजीसी के अधिकारियों ने डीयू जाकर वीसी दफ्तर में मिलने की बात कहते हुए कहा कि सभी विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया गया है कि पीएमएसएसएस के तहत स्टूडेंट्स को दाखिला दें। लेकिन डीयू वीसी के दफ्तर पहुंचने के बाद कहा गया कि पूरी बात एक पत्र में लिखकर अपनी बात बतायें।

अवंतिका को यही बात कचोटती रहती है कि कड़ी मेहनत और लगन के साथ पढ़ाई करके 92 प्रतिशत अंक लाये और मनपसंद कालेज मिलने के बावजूद दाखिला नहीं मिला। दाखिला न मिलने से ज्यादा मलाल साल खराब होने का है। पिछले पांच महीने से अपनी बेटी की कोशिशों में शामिल अवंतिका की मां मीना बख्शी ने कहा कि, बेटी ने परिवार का नाम रोशन तो किया लेकिन उसके सपनों को वो पंख नहीं मिल पाए जिसकी वह हकदार है।

अवंतिका की मां का कहना है कि वीसी ऑफिस से भरोसा दिलाया गया था कि इस मामले में जल्द से जल्द कार्रवाई की जायेगी। लेकिन जब कोई सुनवाई नहीं हुई तो उन्होंने दोबारा कमला नेहरू कॉलेज में संपर्क किया। कॉलेज ने फिर वही बात दोहराई। कहा की प्रधानमंत्री की योजना के बारे में कॉलेज को कुछ भी नहीं पता है। डीयू और कॉलेज के तमाम चक्कर लगाने के बाद एक अधिकारी ने कहा कि यहां ऐसे दाखिला नहीं मिल पायेगा। बेहतर होगा अपने घर लौट जाओ।

रोते हुए कटा दिल्ली से जम्मू का सफर

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इसके बाद तो अवंतिका के सपने चकनाचूर हो गये। दिल्ली से जम्मू के पूरे रास्ते अवंतिका रोते हुये गई। उसे भरोसा नहीं हो पा रहा था कि उसकी जैसी मेधावी छात्रा के साथ लोग इस तरह से बर्ताव कर रहे हैं। अवंतिका की मां का कहना है कि उन्होंने मानव संसाधन मंत्रालय का भी दरवाजा खटखटाया लेकिन किसी ने कुछ नहीं किया।

मीना बख्शी ने कहा कि एक ओर प्रधानमंत्री द्वारा बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान चलाया जा रहा है। दूसरी ओर होनहार बेटी को दाखिला न देकर अभियान की धज्जियां उड़ाई जा रहीं हैं। उन्होंने कहा कि अगर दिल्ली यूनिवर्सिटी या एआईसीटीई प्रशासन की ओर से कोई कार्यवाही नहीं होती है तो वह कंज्यूमर कोर्ट की शरण लेंगी।

अवंतिका की तरह ही जम्मू की कंचन बाला भी इस योजना की पीड़ित हैं। कंचन का कहना है कि, एडमिशन तो मिला नहीं, उलटे भागदौड़ में करीबन 50 हजार रुपए खर्च हो गए। मामले में एआईसीटीई के एक अधिकारी का कहना है कि, इस बारे में यूजीसी को कई बार लिखा गया। यूजीसी की तरफ से भी डीयू के वीसी को पत्र भेजा गया। इन दोनों की ही तरह कई अन्य चयनित छात्राओं को भी दाखिला नहीं मिला।

स्कॉलरश‌िप स्कीम, जिसके बारे में कोई नहीं जानता

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5000 बच्चों को पीएमएसएसएस योजना के तहत अगले पांच सालों के लिए विभिन्न राज्यों में उच्च शिक्षा के लिए भेजा जाना था। छात्रों के लिए जेके बोर्ड से इंटर पास होना अनिवार्य था।

योजना का कुल बजट 1200 करोड़ रुपए रखा गया था। जिसमें से हर सामान्य डिग्री कोर्स कर रहे छात्र पर हर साल 1.3 लाख रुपए खर्च किए जाने थे। इंजीनियरिंग के छात्रों का सालाना बजट 2.25 लाख और मेडिकल कोर्स के छात्रों का सालाना बजट 4 लाख रखा गया था। 4500 छात्रों का चयन सामान्य डिग्री कोर्स के लिए किया जाना था। 250 छात्रों का चयन इंजीनियरिंग और 250 का चयन मेडिकल कोर्स के लिए किया जाना था।

एआईसीटीई ने 2012 के चयनित छात्रों की काउंसलिंग 2014 में कराई। उसमें भी यह शर्त लगा दी कि एक कॉलेज में दो एडमिशन नहीं होंगे।

कांउसलिंग के बाद 51 छात्रों को डीयू के 41 कॉलेजों में एडमिशन के लिए प्रोवीजनल सर्टिफिकेट दे दिया गया लेकिन उन्हें एडमिशन नहीं मिला।

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