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सूखी सर्दी ने बिगाड़ी जम्मवासियों की सेहत

Sat, 10 Jan 2015 11:43 PM IST
Updated Sat, 10 Jan 2015 11:43 PM IST
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dry winter weather creat many problem in people's

बारिश नहीं होने के चलते लोगों कों सूखी सर्दी से जूझना पड़ रहा है। सूखी सर्दी लोगों की सेहत बिगाड़ रही है। लोग खांसी, जुकाम और बुखार से पीडि़त हो रहे हैं। बच्चे इसकी चपेट में ज्यादा हैं। अचानक ठंड की चपेट में आने से कमजोर बच्चों में हाइपोथर्मिया की शिकायत बढ़ी है। रेसप्रेटरी संक्रमित रोगों से बच्चों के साथ हर आयु वर्ग के लोग प्रभावित हैं।

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सर्द हवाओं के साथ दिन और रात के तापमान में सामान्य से ज्यादा गिरावट से बच्चों में हाइपोथर्मिया की शिकायत बढ़ी है। तापमान के अचानक उतार-चढ़ाव से शरीर इसके हिसाब से खुद को तेजी से ढाल नहीं पाता है। हाइपोथर्मिया में कमजोर बच्चे बाहर के तापमान को झेल नहीं पाते हैं, इससे भीतर का तापमान गड़बड़ा जाता है।
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शरीर के ठंडा होने से कई तरह की दिक्कतें आ जाती हैं। इसकी चपेट में छह माह से कम आयु वर्ग के बच्चे ज्यादा आते हैं। बच्चों में एक्यूट ब्रोंकोलाइटस (सांस संबंधी) भी परेशानी हो जाती है। इसमें सांस की नली में सूजन आ जाने के कारण पीडि़त बच्चा सामान्य रूप में सांस नहीं ले पाता है। पीडि़त की हालत निमोनिया की तरह हो जाती है। बड़े बच्चों में जुकाम, खांसी और बुखार की शिकायत अधिक हो रही है।
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एसएमजीएस में रोजाना 300-350 की ओपीडी

dry winter weather creat many problem in people's

शहर के प्रमुख जच्चा-बच्चा अस्पताल एसएमजीएस में रोजाना 300-350 की ओपीडी होती है, लेकिन इस मौसम में अधिकांश शिशु रोगी रेसप्रेटरी इंफेक्शन से पीडि़त होकर पहुंच रहे हैं। जीएमसी के अधीक्षक डा. रविंद्र रतनपाल के अनुसार दिन और रात के मौसम में काफी अंतर होने के कारण सेहत पर असर पड़ रहा है।

इनमें अधिकांश लोग दिन की धूप के बाद रात के मौसम को लेकर लापरवाह हो जाते हैं, जिससे छाती संबंधी रोग पनप रहे हैं। बारिश न होने के कारण वायरल सक्रिय होकर सेहत खराब कर रहे हैं।

ऐसे करें बचाव
1. बच्चों को नंगे पांव न घूमने दें
2. तापमान के हिसाब से पर्याप्त कपड़े पहनें
3. रात में दोपहिया वाहन पर ड्राइविंग से परहेज करें
4. सर्द हवाओं में शरीर को पूरी तरह ढककर रखें

विशेषज्ञों की कमी बरकरार
जिला स्तर के दूरवर्ती क्षेत्रों के चिकित्सा केंद्रों में विशेषज्ञ डाक्टरों की कमी से लोगों को सर्दी में ज्यादा दिक्कतें झेलनी पड़ती हैं। इसमें सर्जन, शिशु, गायनी, त्वचा आदि विशेषज्ञों की कमी से लोगों को छोटे से इलाज के लिए भी शहरी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है।

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