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Jammu News: पक्के घरों के मालिकों को खानाबदोश बना रही प्यास
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सूरज की तपिश बढ़ने के साथ मैदानी इलाकों में जा रहे लोग
दशकों से चल रहा यही सिलसिला, सरकारी योजनाओं का नहीं मिल रहा लाभ
संवाद न्यूज एजेंसी
पुरमंडल। हर बार की तरह इस बार भी पुरमंडल ब्लॉक के गांव खोड़ी खड़, गुज्जर नाला, किउली, गैर, बाला देब पचोली चाइ गांवों के दर्जनों लोग गर्मियां शुरू आते ही मैदानी क्षेत्रों की ओर निकलना शुरू हो गए हैं। ये लोग प्रतिवर्ष पानी की कमी के चलते अपनी घर छोड़ मैदानों में रहने जाते हैं। पानी को लेकर चलाई जा रहीं योजनाओं का इन गरीबों को अब तक लाभ नहीं मिल रहा है।
स्थानीय पूर्व जोनल शिक्षा अधिकारी बाघ अली, अली मोहम्मद, हुसैन मोहम्मद, अब्दुल हनीफ, आदि ने बताया कि गर्मियां आते ही पीने के पानी की किल्लत के कारण परिवार एवं मवेशियों सहित मैदानी इलाकों की ओर जाने पर मजबूर हो जाते हैं। लोगों को भीषण गर्मी में अपने पक्के मकान छोड़कर खुले में टेंट लगाकर रहना पड़ता है। इससे धूप, आंधी, बारिश जैसी परेशानियों से भी जूझना पड़ता है। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। खुले में रहने से जंगली जानवरों और विषैले कीड़े-मकोड़ों के काटने का भी डर बना रहता है। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद से अब तक कई सरकारें आईं और गईं लेकिन उनके पीने के पानी की समस्या का कोई हल नहीं हो पाया।
लोगों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि उनकी समस्या को जल्द हल किया जाए। उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जाए, ताकि उन लोगों को साल के 4 महीने खानाबदोश की जिंदगी न जीनी पड़े।
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दशकों से चल रहा यही सिलसिला, सरकारी योजनाओं का नहीं मिल रहा लाभ
संवाद न्यूज एजेंसी
पुरमंडल। हर बार की तरह इस बार भी पुरमंडल ब्लॉक के गांव खोड़ी खड़, गुज्जर नाला, किउली, गैर, बाला देब पचोली चाइ गांवों के दर्जनों लोग गर्मियां शुरू आते ही मैदानी क्षेत्रों की ओर निकलना शुरू हो गए हैं। ये लोग प्रतिवर्ष पानी की कमी के चलते अपनी घर छोड़ मैदानों में रहने जाते हैं। पानी को लेकर चलाई जा रहीं योजनाओं का इन गरीबों को अब तक लाभ नहीं मिल रहा है।
स्थानीय पूर्व जोनल शिक्षा अधिकारी बाघ अली, अली मोहम्मद, हुसैन मोहम्मद, अब्दुल हनीफ, आदि ने बताया कि गर्मियां आते ही पीने के पानी की किल्लत के कारण परिवार एवं मवेशियों सहित मैदानी इलाकों की ओर जाने पर मजबूर हो जाते हैं। लोगों को भीषण गर्मी में अपने पक्के मकान छोड़कर खुले में टेंट लगाकर रहना पड़ता है। इससे धूप, आंधी, बारिश जैसी परेशानियों से भी जूझना पड़ता है। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। खुले में रहने से जंगली जानवरों और विषैले कीड़े-मकोड़ों के काटने का भी डर बना रहता है। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद से अब तक कई सरकारें आईं और गईं लेकिन उनके पीने के पानी की समस्या का कोई हल नहीं हो पाया।
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लोगों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि उनकी समस्या को जल्द हल किया जाए। उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जाए, ताकि उन लोगों को साल के 4 महीने खानाबदोश की जिंदगी न जीनी पड़े।
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