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ब्रेंगी नाला की जांच कर रही टीम ने रिपोर्ट सौंपी
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श्रीनगर। अनंतनाग के कोकरनाग इलाके के वंदेवलगाम गांव से गुजरने वाला ब्रेंगी नाले की मुख्य धारा में बने गड्ढे (सिंक होल) की जांच कर रही कश्मीर विश्वविद्यालय, भू विज्ञान, खनन और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नालाजी के विशेषज्ञों की टीम ने अपनी रिपोर्ट शुक्रवार को उपायुक्त डॉ पियूष सिंघल को सौंप दी।
रिपोर्ट मिलने के बाद उपायुक्त डॉ.सिंगला ने कहा कि ऐसी प्राकृतिक घटना काफी समय के बाद देखने को मिली है। रिपोर्ट के अनुसार पूरे दक्षिण कश्मीर में चूना पत्थर (लाइमस्टोन) बहुतायत में मौजूद है। पानी के साथ प्रक्रिया से ही यह गड्ढा बनने का अनुमान है। 27 साल पहले भी इस इलाके में एक सिंकहोल बना था। अनंतनाग में चश्मों की बहुलता स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों की देन है। उन्होंने कहा कि अच्छाबल, वेरीनाग और कोकरनाग के जो चश्में हैं जिनका बहाव बहुत ज्यादा है वो भी ऐसे ही अंडरग्राउंड वॉटर चैनल्स के कारण बहाव बाहर आया है।
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ट्रेसर स्टडी कराई जाएगी
डॉ. सिंगला ने कहा कि इस गड्ढे को अब बंद किया जाएगा। जो पानी उसमें जाएगा उसे जाने देंगे बाकी लोगों की सिंचाई की जरूरतों को पूरा किया जाएगा। हम इसके पीछे के वैज्ञानिक कारणों का पता लगाना चाहते हैं। जल्द इसकी ट्रेसर स्टडी भी कराई जाएगी। जिसमें सिंकहोल में केमिकल डालकर पानी का बहाव पता लगाने की कोशिश की जाएगी।
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रिपोर्ट मिलने के बाद उपायुक्त डॉ.सिंगला ने कहा कि ऐसी प्राकृतिक घटना काफी समय के बाद देखने को मिली है। रिपोर्ट के अनुसार पूरे दक्षिण कश्मीर में चूना पत्थर (लाइमस्टोन) बहुतायत में मौजूद है। पानी के साथ प्रक्रिया से ही यह गड्ढा बनने का अनुमान है। 27 साल पहले भी इस इलाके में एक सिंकहोल बना था। अनंतनाग में चश्मों की बहुलता स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों की देन है। उन्होंने कहा कि अच्छाबल, वेरीनाग और कोकरनाग के जो चश्में हैं जिनका बहाव बहुत ज्यादा है वो भी ऐसे ही अंडरग्राउंड वॉटर चैनल्स के कारण बहाव बाहर आया है।
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ट्रेसर स्टडी कराई जाएगी
डॉ. सिंगला ने कहा कि इस गड्ढे को अब बंद किया जाएगा। जो पानी उसमें जाएगा उसे जाने देंगे बाकी लोगों की सिंचाई की जरूरतों को पूरा किया जाएगा। हम इसके पीछे के वैज्ञानिक कारणों का पता लगाना चाहते हैं। जल्द इसकी ट्रेसर स्टडी भी कराई जाएगी। जिसमें सिंकहोल में केमिकल डालकर पानी का बहाव पता लगाने की कोशिश की जाएगी।
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