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घरेलू हिंसा का एक बड़ा कारण महिलाओं की चुप्पी भी
बिंदू सिंह/अमर उजाला, जम्मू
Updated Wed, 29 Oct 2014 03:01 PM IST
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शहर के पाश क्षेत्र में रहने वाले एक वरिष्ठ अधिकारी ने अपनी पत्नी को सिर्फ इसलिए थप्पड़ रसीद कर दिए, क्योंकि उसने पति के साथ बहस की। बहस का विषय पति द्वारा शराब पीकर घर आना बना। मामला इतना बढ़ा कि महिला सेल तक पहुंच गया।
ऐसा ही मामला पौनी के महिला सेल में भी आया। पति जेब खर्च नहीं देता है। सास ने बहु को बाहर जाकर काम करने से मना कर रखा है। ऐसे में विरोध किया तो बात हाथापाई तक पहुंच गई। फिर यह मामला भी आखिरकार महिला सेल तक पहुंच गया। गौर करें, तो पिछले कुछ वर्षों में महिला सेल में ऐसे मामलों की बढ़ोतरी हुई है।
स्वयं को पढ़ा लिखा सभ्य वर्ग इसमें ज्यादा शामिल नजर आता है। खासकर शहर में बसर करने वाले। जनवरी 2014 से लेकर इस महीने की 28 तारीख तक महिला सेल में 964 शिकायतें दर्ज की गईं। इसमें से 554 समझौते करवाए गए, जबकि 96 मामलों को कोर्ट में आगे की कार्रवाई के लिए भेज दिया गया।
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इन मामलों में ज्यादातर मामले उच्च शिक्षा प्राप्त, कानून के जानकार, शिक्षक, अधिकारी, नौकरीपेशा शामिल हैं। ऐसे भी मामले हैं, जिनमें पति और पत्नी दोनों ही नौकरीपेशा हैं। घरेलू हिंसा, विवाहेतर संबंध, नशा और इगो प्रॉब्लम इनकी मूल जड़ हैं। पति पत्नी की आपसी बहस और तीसरे का हस्तक्षेप मामले को इतना पेचिदा कर देता है कि मामला महिला सेल तक पहुंच जाता है।
पढ़े लिखे परिवार के बीच हिंसा पर महिला सेल की इंचार्ज आरती ठाकुर कहती हैं कि पति-पत्नी का इगो क्लैश भी बड़ा कारण है। कई मामलों में विवाहेतर संबंध और नशा भी वजह बनता है।
रिश्ते की संवेदनशीलता को समझने की आवश्यकता
उनका कहना है कि यह बात गलत है कि पुरुष काम का तनाव गुस्से के रूप में पत्नी पर निकालते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि नौकरी पेशा पत्नी पति पर कभी हाथ नहीं उठाती। न ही शराब पीकर घर जाती हैं। न ही तनाव निकालती हैं। पति और पत्नी दोनों को रिश्ते की संवेदनशीलता को समझने की आवश्यकता है।
उनका कहना है कि महिलाओं के खिलाफ हो रही हिंसा का सबसे बड़ा कारण उनकी चुप्पी है। महिलाओं को अपनी बात रखनी चाहिए। अगर उन पर किसी तरह की कोई ज्यादती होती है, तो उसके खिलाफ आवाज भी बुलंद करनी चाहिए।
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ऐसा ही मामला पौनी के महिला सेल में भी आया। पति जेब खर्च नहीं देता है। सास ने बहु को बाहर जाकर काम करने से मना कर रखा है। ऐसे में विरोध किया तो बात हाथापाई तक पहुंच गई। फिर यह मामला भी आखिरकार महिला सेल तक पहुंच गया। गौर करें, तो पिछले कुछ वर्षों में महिला सेल में ऐसे मामलों की बढ़ोतरी हुई है।
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स्वयं को पढ़ा लिखा सभ्य वर्ग इसमें ज्यादा शामिल नजर आता है। खासकर शहर में बसर करने वाले। जनवरी 2014 से लेकर इस महीने की 28 तारीख तक महिला सेल में 964 शिकायतें दर्ज की गईं। इसमें से 554 समझौते करवाए गए, जबकि 96 मामलों को कोर्ट में आगे की कार्रवाई के लिए भेज दिया गया।
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इन मामलों में ज्यादातर मामले उच्च शिक्षा प्राप्त, कानून के जानकार, शिक्षक, अधिकारी, नौकरीपेशा शामिल हैं। ऐसे भी मामले हैं, जिनमें पति और पत्नी दोनों ही नौकरीपेशा हैं। घरेलू हिंसा, विवाहेतर संबंध, नशा और इगो प्रॉब्लम इनकी मूल जड़ हैं। पति पत्नी की आपसी बहस और तीसरे का हस्तक्षेप मामले को इतना पेचिदा कर देता है कि मामला महिला सेल तक पहुंच जाता है।
पढ़े लिखे परिवार के बीच हिंसा पर महिला सेल की इंचार्ज आरती ठाकुर कहती हैं कि पति-पत्नी का इगो क्लैश भी बड़ा कारण है। कई मामलों में विवाहेतर संबंध और नशा भी वजह बनता है।
रिश्ते की संवेदनशीलता को समझने की आवश्यकता
उनका कहना है कि यह बात गलत है कि पुरुष काम का तनाव गुस्से के रूप में पत्नी पर निकालते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि नौकरी पेशा पत्नी पति पर कभी हाथ नहीं उठाती। न ही शराब पीकर घर जाती हैं। न ही तनाव निकालती हैं। पति और पत्नी दोनों को रिश्ते की संवेदनशीलता को समझने की आवश्यकता है।
उनका कहना है कि महिलाओं के खिलाफ हो रही हिंसा का सबसे बड़ा कारण उनकी चुप्पी है। महिलाओं को अपनी बात रखनी चाहिए। अगर उन पर किसी तरह की कोई ज्यादती होती है, तो उसके खिलाफ आवाज भी बुलंद करनी चाहिए।