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डोगरा राजपरिवार को किले में कड़ी चुनौती, विक्रमादित्य के लिए डॉ. कर्ण सिंह ने संभाल रखी है कमान

Sun, 14 Apr 2019 06:12 AM IST
vivek shukla बृजेश कुमार सिंह, जम्मू
बृजेश कुमार सिंह, जम्मू Published by: vivek shukla Updated Sun, 14 Apr 2019 06:12 AM IST
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Dogra royal family faces tough challenge in lok sabha election 2019
- फोटो : अमर उजाला
जम्मू-कश्मीर के डोगरा शासक रहे महाराजा हरि सिंह का परिवार एक बार फिर चुनावी रणक्षेत्र में है। सदर-ए-रियासत रहे डॉ. कर्ण सिंह के लगातार 4 बार दिल्ली में प्रतिनिधित्व करने के करीब साढ़े तीन दशक बाद अब इस परिवार से विक्रमादित्य सिंह पिता की विरासत को बचाने के लिए जोर आजमाइश कर रहे हैं। पूरा राजघराना फिर से उधमपुर-डोडा संसदीय सीट रूपी अपने किले को पाने में जुट गया है। 
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इस सीट के लिए दूसरे चरण में 18 अप्रैल को मतदान होना है। यहां से सांसद व भाजपा प्रत्याशी डॉ. जितेंद्र सिंह तथा डोगरा स्वाभिमान संगठन के पूर्व मंत्री चौधरी लाल सिंह मैदान में हैं। इस वीवीआईपी सीट पर मुकाबला दिनोंदिन काफी चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। डॉ. कर्ण सिंह भी मैदान में डट गए हैं। कठुआ, उधमपुर, रियासी और रामबन जिले में जगह-जगह रैलियां आयोजित कर रहे हैं।
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सिंधिया परिवार की बेटी और राजघराने की बहू चित्रांगदा सिंह तथा कैप्टन अमरिंदर सिंह परिवार की बहू व कर्ण सिंह की पोती मृगांका सिंह ने भी कमान संभाल ली है। चित्रांगदा प्रचार के साथ ही बेटी मृगांका के साथ घर पर बने वार रूम को भी संभाल रही हैं। रणनीति के तहत डोडा, किश्तवाड़, भद्रवाह तथा रामबन जिलों में अच्छा खासा प्रभाव रखने वाले कांग्रेस के दिग्गज नेता गुलाम नबी आजाद को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
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चार बार सांसद रहे कर्ण सिंह
डॉ. कर्ण सिंह उधमपुर से चार बार सांसद रहे। इमरजेंसी के बाद 1977 में कांग्रेस के खिलाफ लहर में भी वे जीते थे, जबकि इंदिरा गांधी तक हार गई थीं। 1967 से 1980 तक लगातार जीते। 1984 में कांग्रेस ने गिरधारी लाल डोगरा को उतारा तो  सिंह विपक्ष के साझा प्रत्याशी बने और हार गए। फिर परिवार का कोई भी सदस्य चुनाव नहीं लड़ा। उनके छोटे पुत्र अजातशत्रु नगरोटा विस क्षेत्र से नेकां के विधायक बने। बड़े पुत्र विक्रमादित्य ने 2014 में विस चुनाव के ठीक पहले पीडीपी से चुनावी पारी शुरू की। बाद में वे एमएलसी बने। लेकिन महाराजा हरि सिंह की जयंती के अवकाश पर पार्टी से विरोध उभरा, तो उन्होंने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस का दामन थामकर राजनीतिक पारी शुरू की है।


राजपरिवार का एक सदस्य भाजपा के साथ
राज परिवार के सदस्य और भाजपा एमएलसी अजात शत्रु सिंह भाई के खिलाफ प्रचार कर रहे हैं। वे कठुआ, उधमपुर सहित अन्य क्षेत्रों में पार्टी प्रत्याशी डॉ. जितेंद्र सिंह के लिए वोट मांग रहे हैं। वे भाई पर सीधा हमला तो नहीं बोल रहे हैं, लेकिन कांग्रेस पर निशाना जरूर साध रहे हैं। वे भावनात्मक मुद्दा उठाते हुए कांग्रेस को महाराजा हरि सिंह के निर्वासन के लिए जिम्मेदार ठहराते हैं। डॉ. जितेंद्र के कार्यों को जनता के बीच रख रहे हैं। उनका कहना कि उनके लिए पहले देश है फिर परिवार है।
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