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अनुच्छेद 370 पर विवादित वीडियोः कोर्ट ने कहा- बोलने की आजादी है, पर कानून का उल्लंघन संगीन अपराध

Fri, 15 Nov 2019 03:07 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Fri, 15 Nov 2019 03:07 PM IST
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disputed Video on Article 370, Court said- freedom of speech but violation of law is serious crime
प्रतीकात्मक तस्वीर

अनुच्छेद 370 हटने पर विवादित वीडियो वायरल करने के आरोपी की जमानत अर्जी को कोर्ट ने खारिज कर दिया। जम्मू के प्रथम अतिरिक्त सेशन जज वाई पी कोतवाल ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि आरोपी को जमानत नहीं दी जा सकती है। थन्नामंडी के साज गांव के रहने वाले मोहम्मद वकार अहमद को दंगा कराने के मामले में आरोपी बनाया गया है।

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पुलिस केस के मुताबिक पुलिस सूत्रों से पता चला था कि मोहम्मद वकार ने जानबूझकर एक वीडियो वायरल किया। यह वीडियो जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने को लेकर था। यह वीडियो अपलोड होने से कानून व्यवस्था की दिक्कत पैदा हो सकती थी। जिला उपायुक्त की शिकायत पर आरोपी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया।
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जम्मू के छन्नी हिम्मत पुलिस स्टेशन में इसे लेकर केस दर्ज किया गया। कोर्ट ने माना कि आरोपी ने अपने आवेदन मेें संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (अभिव्यक्ति की आजादी) का हवाला दिया है। लेकिन आरोपी को यह भी पता होना चाहिए कि संविधान का यही अनुच्छेद देश के हर नागरिक की जिम्मेदारी भी तय करता है।
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इन दलीलों के मद्देनजर खारिज कर दी गई जमानत

कोर्ट ने कहा कि ड्यूटी और अधिकारी एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। भारत देश अखंडता की मिसाल वाला देश है। हर एक नागरिक को बोलने की आजादी है, लेकिन यह अनुच्छेद 19 (2) के तहत वर्जित भी है।

आरोपी ने वीडियो अपलोड बोलने की आजादी की मर्यादा का उल्लंघन किया। यह उल्लंघन काफी संगीन है। मामले की जांच अभी शुरूआत में है।

जांच एजेंसी का कहना है कि इस मामले में अभी कुछ और लोग भी शामिल हैं, जो फिलहाल पकड़े नहीं गए हैं। ऐसे में यदि पकड़े गए आरोपी को जमानत दी जाती है, तो इस मामले की जांच प्रभावित हो सकती है। इन्हीं दलीलों के मद्देनजर जमानत अर्जी खारिज कर दी गई।

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