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Jammu News: पर्यटन स्थल मानसर में सुविधाओं की कमी, पर्यटकों की संख्या थमी
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मानसर झील किनारे के फुटपाथ टूटे, झूले खराब और लाइटें बंद, पर्यटक भी रह गए चंद
संवाद न्यूज एजेंसी
सांबा। सरकार की अनदेखी से जिले के पर्यटन स्थल दम तोड़ रहे हैं। सांबा से 20 किलोमीटर दूर ऐतिहासिक मानसर झील पर्यटकों के लिए हमेशा आकर्षण का केंद्र रही है, लेकिन सुविधाओं के अभाव से अब मायूस होना पड़ रहा है। नतीजतन यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या लगातार कम हो रही है। जबकि, मानसर झील का विकास हो तो यहां पर्यटक बढ़ने से स्थानीय लोगों का रोजगार भी बढ़ेगा।
स्थानीय निवासी मोहिन्द्र, सुनील, अंशु और रोहित का कहना है कि सरकारों की अनदेखी से पर्यटक स्थल मानसर का विकास नहीं हो रहा है। यहां के व्यू प्वाइंट्स टूट गए हैं। इससे पर्यटक झील की सुंदरता का नजारा नहीं ले पा रहे हैं। वहीं, फुटपाथ बिखर चुके हैं। बच्चों के लिए लगाए झूले खराब हालत में हैं। लाइटें तक बंद पड़ी हैं। प्रशासनिक अनदेखी से झील स्थल में पर्यटकों कम हुए हैं। पहले हजारों की संख्या में पर्यटक आते थे, जो अब सिमटकर सैकड़ों में रह गए हैं। हालाकि, मानसर का विकास हो तो सांबा से मानसर तक मार्ग के किनारे पर बसे दुकानदारों के कारोबार में भी बढ़ोतरी हो सकती है।
लोगों ने पूछा-घोषित 2 हजार करोड़ रुपये कहां गए
लोगों ने कहा कि एक नवंबर 2020 में मानसर के विकास के लिए 2 हजार करोड़ रुपये का फंड देने की घोषणा की गई थी।इसके बाद नींवपत्थर भी रखा गया। इस मौके केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह, जम्मू-कश्मीर के उप राज्यपाल मनोज सिन्हा भी मौजूद रहे थे। पर बाद में घोषित दो हजार करोड़ रुपये कहां गए, आज तक पता नहीं चला है। ऐसे में मानसर का विकास केवल कागजों में सीमित रह गया है। मानसर पर्यटक स्थल के विकास के लिए जम्मू कश्मीर प्रशासन ईमानदारी से काम नहीं कर रहा है। उन्होंने एलजी से भी गुहार लगाई थी कि घोषित फंड कहां गया है, लेकिन किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया।
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टूटे व्यू प्वाइंट्स व लाइटें ठीक करवाए सरकार
लोगों ने सरकार से मांग की कि टूटे व्यू प्वाइंट्स की जल्द मरम्मत करवाई जाए। टूटे फुटपाथ बनाए जाएं। झूले और लाइटें ठीक करवाई जाएं। साथ ही बाबा अमरनाथ की ओर जाने वाले श्रद्धालुओं को वाया मानसर रास्ते से होकर जाने दिया जाए ताकि मानसर के लोगों के कारोबार में भी वृद्धि हो। वहीं, मानसर में होटल व लॉज बनाए जाने की भी अनुमित दी जाए।
ऐतिहासिक नाग देवता मंदिर...मानसर झील के एक किनारे पर एक ऐतिहासिक नाग देवता का मंदिर भी है। जहां हर साल बड़ा मेला लगता है। दूर दराज से भी लोग यहां पहुंचते हैं। हजारों की संख्या में लोग मेले में शिरकत कर मंदिर में माथा टेकते हैं।
दो हजार करोड़ के फंड पर बात करने से कतरा रहे अधिकारी
जानकारी नहीं, संयुक्त निदेशक से बात करें : सीईओ
विकास में मानसर के पिछड़ने को लेकर मानसर सुरूईंसर विकास प्राधिकरण के सीईओ वेद प्रकाश से संपर्क किया तो उन्होंने यह कहकर पल्लू झाड़ लिया कि वह नए आए हैं। इस बारे में उनके पास अधिक जानकारी नहीं है। आप पर्यटन विभाग के संयुक्त निदेशक से बात करें।
सीईओ या निदेशक से बात करें : संयुक्त निदेशक
मानसर के विकास के लिए दो हजार करोड़ के फंड के बारे कोई अधिकारी नहीं बता पा रहा है। पर्यटन विभाग की संयुक्त निदेशक सुनैना शर्मा से संपर्क किया तो उन्होंने कहा कि इस बारे में सीईओ ही बता पाएंगे या फिर विभाग के निदेशक से बात करें।
निदेशक ने नहीं उठाया फोन
पर्यटन विभाग के निदेशक विवेकानंद राय से बात करनी चाही तो उन्होंने फोन ही नहीं उठाया। कुल मिलाकर कोई भी अधिकारी कुछ बताने के तैयार नहीं है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
सांबा। सरकार की अनदेखी से जिले के पर्यटन स्थल दम तोड़ रहे हैं। सांबा से 20 किलोमीटर दूर ऐतिहासिक मानसर झील पर्यटकों के लिए हमेशा आकर्षण का केंद्र रही है, लेकिन सुविधाओं के अभाव से अब मायूस होना पड़ रहा है। नतीजतन यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या लगातार कम हो रही है। जबकि, मानसर झील का विकास हो तो यहां पर्यटक बढ़ने से स्थानीय लोगों का रोजगार भी बढ़ेगा।
स्थानीय निवासी मोहिन्द्र, सुनील, अंशु और रोहित का कहना है कि सरकारों की अनदेखी से पर्यटक स्थल मानसर का विकास नहीं हो रहा है। यहां के व्यू प्वाइंट्स टूट गए हैं। इससे पर्यटक झील की सुंदरता का नजारा नहीं ले पा रहे हैं। वहीं, फुटपाथ बिखर चुके हैं। बच्चों के लिए लगाए झूले खराब हालत में हैं। लाइटें तक बंद पड़ी हैं। प्रशासनिक अनदेखी से झील स्थल में पर्यटकों कम हुए हैं। पहले हजारों की संख्या में पर्यटक आते थे, जो अब सिमटकर सैकड़ों में रह गए हैं। हालाकि, मानसर का विकास हो तो सांबा से मानसर तक मार्ग के किनारे पर बसे दुकानदारों के कारोबार में भी बढ़ोतरी हो सकती है।
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लोगों ने पूछा-घोषित 2 हजार करोड़ रुपये कहां गए
लोगों ने कहा कि एक नवंबर 2020 में मानसर के विकास के लिए 2 हजार करोड़ रुपये का फंड देने की घोषणा की गई थी।इसके बाद नींवपत्थर भी रखा गया। इस मौके केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह, जम्मू-कश्मीर के उप राज्यपाल मनोज सिन्हा भी मौजूद रहे थे। पर बाद में घोषित दो हजार करोड़ रुपये कहां गए, आज तक पता नहीं चला है। ऐसे में मानसर का विकास केवल कागजों में सीमित रह गया है। मानसर पर्यटक स्थल के विकास के लिए जम्मू कश्मीर प्रशासन ईमानदारी से काम नहीं कर रहा है। उन्होंने एलजी से भी गुहार लगाई थी कि घोषित फंड कहां गया है, लेकिन किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया।
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टूटे व्यू प्वाइंट्स व लाइटें ठीक करवाए सरकार
लोगों ने सरकार से मांग की कि टूटे व्यू प्वाइंट्स की जल्द मरम्मत करवाई जाए। टूटे फुटपाथ बनाए जाएं। झूले और लाइटें ठीक करवाई जाएं। साथ ही बाबा अमरनाथ की ओर जाने वाले श्रद्धालुओं को वाया मानसर रास्ते से होकर जाने दिया जाए ताकि मानसर के लोगों के कारोबार में भी वृद्धि हो। वहीं, मानसर में होटल व लॉज बनाए जाने की भी अनुमित दी जाए।
ऐतिहासिक नाग देवता मंदिर...मानसर झील के एक किनारे पर एक ऐतिहासिक नाग देवता का मंदिर भी है। जहां हर साल बड़ा मेला लगता है। दूर दराज से भी लोग यहां पहुंचते हैं। हजारों की संख्या में लोग मेले में शिरकत कर मंदिर में माथा टेकते हैं।
दो हजार करोड़ के फंड पर बात करने से कतरा रहे अधिकारी
जानकारी नहीं, संयुक्त निदेशक से बात करें : सीईओ
विकास में मानसर के पिछड़ने को लेकर मानसर सुरूईंसर विकास प्राधिकरण के सीईओ वेद प्रकाश से संपर्क किया तो उन्होंने यह कहकर पल्लू झाड़ लिया कि वह नए आए हैं। इस बारे में उनके पास अधिक जानकारी नहीं है। आप पर्यटन विभाग के संयुक्त निदेशक से बात करें।
सीईओ या निदेशक से बात करें : संयुक्त निदेशक
मानसर के विकास के लिए दो हजार करोड़ के फंड के बारे कोई अधिकारी नहीं बता पा रहा है। पर्यटन विभाग की संयुक्त निदेशक सुनैना शर्मा से संपर्क किया तो उन्होंने कहा कि इस बारे में सीईओ ही बता पाएंगे या फिर विभाग के निदेशक से बात करें।
निदेशक ने नहीं उठाया फोन
पर्यटन विभाग के निदेशक विवेकानंद राय से बात करनी चाही तो उन्होंने फोन ही नहीं उठाया। कुल मिलाकर कोई भी अधिकारी कुछ बताने के तैयार नहीं है।