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पढ़िए, किन मुद्दो पर लड़ा जा रहा है कश्मीर का चुनाव

Fri, 14 Nov 2014 12:32 PM IST
Updated Fri, 14 Nov 2014 12:32 PM IST
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development of state making issue in kashmir election

जम्मू कश्मीर में इस बार का चुनाव कई मायनों में पिछले चुनावों से अलग है। राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों के एजेंडे में विकास मुद्दा सबसे ऊपर है। पिछले चुनावों में नेशनल कांफ्रेंस कश्मीर की स्वायत्तता को चुनावी मुद्दा बनाती रही है।

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इसी तरह पीडीपी ने अफजल गुरु को फांसी और घाटी से सेना की वापसी को ही मुख्य मुद्दा बनाया था, लेकिन इस बार सभी दल यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि विकास और सफलता की कुंजी सिर्फ उनके पास है। भाजपा ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विकास पुरुष की छवि को ही भुनाने का मन बनाया है।
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हिंदू वोट बैंक के ध्रुवीकरण के लिए भाजपा यह भी जताने की कोशिश कर रही है कि उसने अनुच्छेद 370 का मुद्दा अभी छोड़ा नहीं है। चुनावी घोषणा पत्र में इस पर चर्चा की बात तो होगी, लेकिन पार्टी इसे मुख्य मुद्दा नहीं बनाएगी। भाजपा पूर्व अलगाववादियों से समझौते के मूड में है और सक्रिय अलगाववादियों को मोदी के विकास अभियान से जुड़ने की अपील कर रही है।
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कांग्रेस ने भाजपा और नेकां पर निशाना साधते हुए गुलाम नबी आजाद के विकास माडल को पेश करना शुरू किया है। इस बीच हिंदू बनाम मुस्लिम मुख्यमंत्री जैसे मुद्दों को भी हवा दी जा रही है, लेकिन विकास का मुद्दा ही शीर्ष पर है।

कश्मीर में अलगाववाद पर विकास का मुद्दा भारी

development of state making issue in kashmir election

रियासत के चुनाव के प्रथम चरण में 25 नवंबर को 15 सीटों के लिए मतदान होने वाले हैं। इसमें कश्मीर संभाग की पांच, जम्मू संभाग की छह और लद्दाख की चार सीटें शामिल हैं। चुनाव प्रचार ने अब जोर पकड़ा है। नेशनल कांफ्रेंस की ओर से मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ही सबसे बड़े प्रचारक के रूप में मैदान में हैं।

पीडीपी का मोर्चा संरक्षक मुफ्ती मोहम्मद और अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने संभाल रखा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा रियासत में आठ रैलियां की जानी हैं। मोदी 22 नवंबर को आ सकते हैं। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी के दौरे अगले हफ्ते प्रस्तावित हैं।

भाजपा ने अब तक 54 सीटों के लिए ही प्रत्याशी घोषित किए हैं। कश्मीर संभाग की 28 सीटों पर भाजपा अब तक प्रत्याशी तय नहीं कर पाई है। गुरेज और सोनावाड़ी में पार्टी ने प्रत्याशी नहीं दिए। जम्मू संभाग की सांबा, नगरोटा और गांधीनगर सीट के लिए फैसला लंबित है। 

पीडीपी बाढ़ में सरकार की विफलता भुना रही

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पीडीपी ने भ्रष्टाचार और बाढ़ के दौरान उमर सरकार की विफलता को मुद्दा बनाया है। महबूबा कई बार भाजपा पर भी हमलावर दिखती हैं, लेकिन उनके पिता मुफ्ती भाजपा के प्रति बेहद नरम दिख रहे हैं। बडगाम में सेना की गोली से युवकों की मौत के बाद अफस्पा और सेना की घाटी से वापसी का मुद्दा तात्कालिक रूप से चर्चा में आया, लेकिन अब यह फिर से ठंडे बस्ते में डाला गया है।

नेशनल कांफ्रेंस की ओर से मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला अपने अभियान में कांग्रेस, भाजपा और पीडीपी पर हमले कर रहे हैं। उमर अपने कार्यकाल में किए गए विकास कार्यों को ही मुख्य मुद्दा बना रहे हैं।

वह अपनी पार्टी को एक आंदोलन कहते हैं और पीडीपी को पूर्व राज्यपाल जगमोहन द्वारा बनाई गई पार्टी करार दे रहे हैं। वह कहते हैं कि नेकां किसी एजेंसी की उपज नहीं है।



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