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Jammu News: हाईवे पर सीमेंट स्प्रे और लोहे के जाल से भूस्खलन रोकने की तैयारी
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- एनएचएआई ने मंत्रालय को भेजी रिपोर्ट, मिट्टी की जांच भी की जा रही
- हाईवे पर करीब आधा दर्जन भूस्खलन संभावित स्थानों की पहचान
- रामबन और अनंतनाग सबसे संवेदनशील, कठुआ, रियासी और उधमपुर में भी खतरा
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने भूस्खलन को जड़ से खत्म करने की तैयारी शुरू कर दी है। प्राधिकरण भूस्खलन संभावित इलाकों में सीमेंट स्प्रे समेत लोहे का जाल बुनकर भूस्खलन को रोकने का प्लान बना रहा है। जिन जगहों पर बार-बार भूस्खलन हो रहा है, वहां की मिट्टी की जांच की जा रही है। इस जांच के आधार पर भविष्य में भूस्खलन रोकने के लिए योजना तैयार होगी।
एनएचएआई ने संभावित भूस्खलन इलाकों की पहचान की गई है और इसकी रिपोर्ट तैयार कर सड़क परिवहन राजमार्ग मंत्रालय को भेजी गई है। रिपोर्ट में रामबन और अनंतनाग को सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में रखा है। कठुआ, रियासी और उधमपुर में भी भूस्खलन संभावित क्षेत्र की पहचान की गई है। यहां भूस्खलन होने की वजह से हाईवे कभी भी बंद हो सकता है।
खासतौर पर रामबन इलाके को सबसे संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है। यहां बीते अप्रैल में भारी बारिश से भूस्खलन हुआ था और करीब दस दिन तक हाईवे पर जम्मू और श्रीनगर का संपर्क कट गया था। एनएचएआई ने दोनों लेन को अलग-अलग चरणों में बहाल किया था। एनएचएआई के चेयरमैन संतोष कुमार यादव ने भी जम्मू-कश्मीर में संभावित स्थानों पर सुधार के निर्देश दिए हैं। रामबन से अनंतनाग तक 25 मशीनें तैनात की गई हैं। इन मशीनों की मदद से महज 60 मिनट में मलबा हटाया जा सकता है। नेशनल हाईवे में अमरनाथ यात्रा की तैयारियों को लेकर एनएचएआई ने अभी तक यह कदम उठाए हैं।
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नेशनल हाईवे को भूस्खलन से बचाने पर काम किया जा रहा है। भूस्खलन संभावित इलाकों की पहचान की गई है। मंत्रालय को इसकी जानकारी दी जा रही है। जिन इलाकों में सबसे ज्यादा भूस्खलन हुआ है, उनमें मिट्टी और अन्य जांच पूरा होने के बाद रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजी है।
आरएस यादव, क्षेत्रीय अधिकारी, एनएचएआई
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- हाईवे पर करीब आधा दर्जन भूस्खलन संभावित स्थानों की पहचान
- रामबन और अनंतनाग सबसे संवेदनशील, कठुआ, रियासी और उधमपुर में भी खतरा
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने भूस्खलन को जड़ से खत्म करने की तैयारी शुरू कर दी है। प्राधिकरण भूस्खलन संभावित इलाकों में सीमेंट स्प्रे समेत लोहे का जाल बुनकर भूस्खलन को रोकने का प्लान बना रहा है। जिन जगहों पर बार-बार भूस्खलन हो रहा है, वहां की मिट्टी की जांच की जा रही है। इस जांच के आधार पर भविष्य में भूस्खलन रोकने के लिए योजना तैयार होगी।
एनएचएआई ने संभावित भूस्खलन इलाकों की पहचान की गई है और इसकी रिपोर्ट तैयार कर सड़क परिवहन राजमार्ग मंत्रालय को भेजी गई है। रिपोर्ट में रामबन और अनंतनाग को सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में रखा है। कठुआ, रियासी और उधमपुर में भी भूस्खलन संभावित क्षेत्र की पहचान की गई है। यहां भूस्खलन होने की वजह से हाईवे कभी भी बंद हो सकता है।
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खासतौर पर रामबन इलाके को सबसे संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है। यहां बीते अप्रैल में भारी बारिश से भूस्खलन हुआ था और करीब दस दिन तक हाईवे पर जम्मू और श्रीनगर का संपर्क कट गया था। एनएचएआई ने दोनों लेन को अलग-अलग चरणों में बहाल किया था। एनएचएआई के चेयरमैन संतोष कुमार यादव ने भी जम्मू-कश्मीर में संभावित स्थानों पर सुधार के निर्देश दिए हैं। रामबन से अनंतनाग तक 25 मशीनें तैनात की गई हैं। इन मशीनों की मदद से महज 60 मिनट में मलबा हटाया जा सकता है। नेशनल हाईवे में अमरनाथ यात्रा की तैयारियों को लेकर एनएचएआई ने अभी तक यह कदम उठाए हैं।
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नेशनल हाईवे को भूस्खलन से बचाने पर काम किया जा रहा है। भूस्खलन संभावित इलाकों की पहचान की गई है। मंत्रालय को इसकी जानकारी दी जा रही है। जिन इलाकों में सबसे ज्यादा भूस्खलन हुआ है, उनमें मिट्टी और अन्य जांच पूरा होने के बाद रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजी है।
आरएस यादव, क्षेत्रीय अधिकारी, एनएचएआई