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चिनाब पुल, लिथियम खोज, लैवेंडर क्रांति मील का पत्थर : डाॅ. जितेंद्र
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नई दिल्ली में आईएएस, आईपीएस, आईएफओएस अधिकारियों के साथ खाने पर चर्चा करते डा. जितेंद्र सिंह।
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केंद्रीय राज्य मंत्री ने जम्मू-कश्मीर कैडर के एजीएमयूटी अधिकारियों के साथ अनुभव साझा किए
जम्मू। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में चिनाब पुल, लिथियम खोज और लैवेंडर खेती की बैंगनी क्रांति मील का पत्थर साबित हुए हैं।
ये परियोजनाएं क्षेत्र में युवा उद्यमियों को सशक्त बना रही हैं। भारत की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से पहली सबसे बड़ी वैश्विक अर्थव्यवस्था बनने की यात्रा में जम्मू-कश्मीर एक प्रमुख विकास इंजन के रूप में उभरेगा। डाॅ. सिंह ने नई दिल्ली में वीरवार को आधिकारिक आवास पर अखिल भारतीय सेवा अधिकारियों (आईएएस, आईपीएस, आईएफओएस) के अधिकारियों के साथ चर्चा की। इसमें पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर कैडर से संबंधित अधिकारी शामिल रहे, जिन्हें अब एजीएमयूटी कैडर में विलय कर दिया गया है। विभिन्न बैचों और सेवाओं के अधिकारियों ने जम्मू-कश्मीर में सेवा के अपने दिनों को याद किया और फिर से जुड़ने के अवसर की सराहना की। कहा कि राष्ट्रीय प्राथमिकताओं में जम्मू-कश्मीर की निरंतर भूमिका रही है। उन्होंने 1990 और 2000 के दशक की शुरुआत में चरम आतंकवाद के अशांत समय को याद किया, जिसमें युवा एसपी और डीसी के रूप में बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में सेवा करने वाले अधिकारियों ने साहस को स्वीकार किया। बातचीत के दौरान अधिकारियों ने खुले तौर पर अनुभव, प्रतिक्रिया और चिंताओं को साझा किया। इस मौके पर आईएएस से सबसे वरिष्ठ अधिकारी नवीन कुमार चौधरी (1994 बैच), मनोज कुमार द्विवेदी (1997), हृदेश कुमार (1999), सरिता चौहान (1999), अजीत कुमार साहू (2003) आदि मौजूद रहे। इसी तरह आईपीएस से पंकज सक्सेना (1992), राजेश कुमार (1995), मुकेश सिंह (1996), दानिश राणा (1997) आदि मौजूद रहे।
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जम्मू। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में चिनाब पुल, लिथियम खोज और लैवेंडर खेती की बैंगनी क्रांति मील का पत्थर साबित हुए हैं।
ये परियोजनाएं क्षेत्र में युवा उद्यमियों को सशक्त बना रही हैं। भारत की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से पहली सबसे बड़ी वैश्विक अर्थव्यवस्था बनने की यात्रा में जम्मू-कश्मीर एक प्रमुख विकास इंजन के रूप में उभरेगा। डाॅ. सिंह ने नई दिल्ली में वीरवार को आधिकारिक आवास पर अखिल भारतीय सेवा अधिकारियों (आईएएस, आईपीएस, आईएफओएस) के अधिकारियों के साथ चर्चा की। इसमें पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर कैडर से संबंधित अधिकारी शामिल रहे, जिन्हें अब एजीएमयूटी कैडर में विलय कर दिया गया है। विभिन्न बैचों और सेवाओं के अधिकारियों ने जम्मू-कश्मीर में सेवा के अपने दिनों को याद किया और फिर से जुड़ने के अवसर की सराहना की। कहा कि राष्ट्रीय प्राथमिकताओं में जम्मू-कश्मीर की निरंतर भूमिका रही है। उन्होंने 1990 और 2000 के दशक की शुरुआत में चरम आतंकवाद के अशांत समय को याद किया, जिसमें युवा एसपी और डीसी के रूप में बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में सेवा करने वाले अधिकारियों ने साहस को स्वीकार किया। बातचीत के दौरान अधिकारियों ने खुले तौर पर अनुभव, प्रतिक्रिया और चिंताओं को साझा किया। इस मौके पर आईएएस से सबसे वरिष्ठ अधिकारी नवीन कुमार चौधरी (1994 बैच), मनोज कुमार द्विवेदी (1997), हृदेश कुमार (1999), सरिता चौहान (1999), अजीत कुमार साहू (2003) आदि मौजूद रहे। इसी तरह आईपीएस से पंकज सक्सेना (1992), राजेश कुमार (1995), मुकेश सिंह (1996), दानिश राणा (1997) आदि मौजूद रहे।
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