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परिसीमन रिपोर्ट के खिलाफ सड़कों पर उतरने की चेतावनी
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परिसीमन आयोग के प्रस्ताव के बाद गुलाबगढ़ में नारेबाजी करते हुए ग्रामीण।
- फोटो : REASI
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रियासी। परिसीमन आयोग की प्रस्तावित रिपोर्ट का जिले के गुलाबगढ़ में रविवार को विरोध किया गया। स्थानीय राजकीय हायर सेकेंडरी स्कूल में ग्रामीण इकट्ठा हुए जहां आयोग के प्रस्ताव के खिलाफ नारेबाजी की गई।
मौके पर मौजूद सरपंच जमालदीन, पंच अब्दुल गनी, शाहनवाज हुसैन, अब्दुल हमीद, आदि ने कहा कि प्रस्ताव में वर्षों पुरानी विधानसभा गुुलाबगढ़ का अस्तित्व समाप्त कर दिया गया है। उसके स्थान पर विधानसभा का नाम माहौर किया गया है। साथ ही इस विधानसभा को एसटी अरक्षित कर लोगों के साथ नाइंसाफी की गई है। जिसको बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि गुलाबगढ़ के ग्रामीण आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। क्षेत्रों में जाने के लिए संपर्क मार्ग तक नहीं है। मुख्य सड़क मार्ग की भी हालात काफी खस्ता हो गई है। लोगों को पीने के पानी के लिए आज भी प्राकृतिक जलस्त्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। ग्रामीणों को स्वास्थ्य व शिक्षा के क्षेत्र में आज भी कुछ नहीं मिल रहा है। इमारतों की हालात जर्जर हो गई है। कई स्थानों पर स्टाफ ही नहीं है।
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जोरदार नारेबाजी करते हुए कहा गया कि आयोग के सदस्यों ने क्षेत्र के लोगों की हालात को दरकिनार करते हुए जो प्रस्ताव पेश किया है, वह उसकी निंदा करते हैं। अगर इसको सही नहीं किया गया तो वे सड़कों पर उतर आएंगे।
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मौके पर मौजूद सरपंच जमालदीन, पंच अब्दुल गनी, शाहनवाज हुसैन, अब्दुल हमीद, आदि ने कहा कि प्रस्ताव में वर्षों पुरानी विधानसभा गुुलाबगढ़ का अस्तित्व समाप्त कर दिया गया है। उसके स्थान पर विधानसभा का नाम माहौर किया गया है। साथ ही इस विधानसभा को एसटी अरक्षित कर लोगों के साथ नाइंसाफी की गई है। जिसको बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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उन्होंने कहा कि गुलाबगढ़ के ग्रामीण आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। क्षेत्रों में जाने के लिए संपर्क मार्ग तक नहीं है। मुख्य सड़क मार्ग की भी हालात काफी खस्ता हो गई है। लोगों को पीने के पानी के लिए आज भी प्राकृतिक जलस्त्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। ग्रामीणों को स्वास्थ्य व शिक्षा के क्षेत्र में आज भी कुछ नहीं मिल रहा है। इमारतों की हालात जर्जर हो गई है। कई स्थानों पर स्टाफ ही नहीं है।
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जोरदार नारेबाजी करते हुए कहा गया कि आयोग के सदस्यों ने क्षेत्र के लोगों की हालात को दरकिनार करते हुए जो प्रस्ताव पेश किया है, वह उसकी निंदा करते हैं। अगर इसको सही नहीं किया गया तो वे सड़कों पर उतर आएंगे।