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सरकार गठन में हो रही देरी जम्मू कश्मीर के हित में नहीं

Sat, 23 Jan 2016 07:25 PM IST
Updated Sat, 23 Jan 2016 07:25 PM IST
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delay in government forming is not good for jammu and kashmir

आतंकवाद और अलगाववाद सहित कई अन्य चुनौतियों से जूझ रही रियासत में जम्हूरियत के पांव फिर लड़खड़ाने से चिंताएं उभरने लगी हैं। कहीं हिंसक माहौल तो कभी सियासी संकट से रियासत को इससे पूर्व भी लोकप्रिय सरकार से महरूम होना पड़ा है।

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वर्तमान में रियासत के सामने सातवीं मर्तबा ऐसे हालात उपजे हैं, जब शासन व्यवस्था को चलाने के लिए लोकप्रिय सरकार वजूद में नहीं है। ऐसे में विपक्षी दल इस देरी को नाजुक हालात की संज्ञा दे रहे हैं तो राजनीतिक विज्ञान के जानकार यथाशीघ्र सरकार गठन को रियासत के लिए बेहद जरूरी बता रहे हैं।
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हाल ही में पूर्व मुख्यमंत्री डाक्टर फारूक अब्दुल्ला ने चिंता जताते हुए कहा है, जम्मू-कश्मीर आतंकवाद से घिरा हुआ है। इसके बावजूद यदि लोकप्रिय सरकार को वजूद में लाने के लिए त्वरित रूप से ठोस प्रयास नहीं होते हैं तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है।
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JK अन्य राज्यों की तुलना में ज्यादा संवेदनशील

delay in government forming is not good for jammu and kashmir

बकौल फारूक मौजूदा विधानसभा में बड़े दल भाजपा और पीडीपी को या तो सरकार बनानी चाहिए या फिर वैकल्पिक स्टैंड लेना चाहिए। जम्मू यूनिवर्सिटी के राजनीतिक विज्ञान की रिटायर्ड प्रोफेसर और इलेक्शंस इन जम्मू एंड कश्मीर पुस्तक की लेखिका प्रो. रेखा चौधरी राज्य में लोकतांत्रिक व्यवस्था को अन्य राज्यों की तुलना में ज्यादा संवेदनशील मानती हैं।

प्रो. रेखा के अनुसार लोकप्रिय सरकार एक ऐसा सियासी मंच प्रदान करती है, जहां पर लोग अपनी हर तरह की राय को जाहिर कर सकते हैं। आतंकवाद और अलगाववाद की वजह से राज्य में लोकप्रिय सरकार का गठन और भी जरूरी हो जाता है। पॉलिटिकल वैक्यूम का ज्यादा समय तक बने रहना चिंताजनक है। सरकार का गठन जल्द से जल्द होना ही राज्य के हित में है।

साढ़े आठ साल बिना लोकप्रिय सरकार के रही है रियासत
राज्य में राज्यपाल शासन को पहली दफा 9 जुलाई, 1977 में लागू किया गया। इसके बाद सात दफा ऐसा हो चुका है। 19 जनवरी, 1990 में लागू किए गए राज्यपाल शासन की अवधि न केवल रियासत, बल्कि देश के इतिहास में भी सबसे लंबी रही जो 9 अक्तूबर, 1996 तक 6 वर्ष और 264 दिनों तक कायम रही। रियासत ने अब तक लगभग साढ़े आठ वर्ष बिना लोकप्रिय सरकार के गुजारे हैं। देश में पंजाब के बाद यह दूसरी सबसे लंबी अवधि है।

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