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और ज्यादा हो सकती है मरने वालों की संख्या: सेना

Mon, 08 Sep 2014 11:18 PM IST
Updated Mon, 08 Sep 2014 11:18 PM IST
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death toll may rise in srinagar

उत्तरी कमान के जीओसी इन सी लेफ्टिनेंट जनरल डीएस हुड्डा ने कहा कि भारी बारिश के चलते आई प्राकृतिक आपदा के बाद सबसे पहले आपरेशन ‘मेघ राहत’ शुरू कर सेना ने बीस हजार नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। बरसात और बाढ़ के कारण सेना को भी नुकसान हुआ है।

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इसके बावजूद सेना ने छह हजार लोगों को पानी, खाना, दवाइयां आदि मुहैया कराई है। उन्होंने यह भी कहा कि नियंत्रण रेखा पर अखनूर के पास मनावर तवी से तारबंदी टूटी है। कई जगह तारबंदी क्षतिग्रस्त भी हुई है। उन क्षेत्रों में जवानों की संख्या बढ़ा दी गई है।
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उत्तरी कमान के हेडक्वार्टर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए जीओसी ने बताया कि जम्मू में मरने वालों की संख्या अधिक है। जबकि श्रीनगर पूरी तरह से पानी में है। जम्मू के हालात में सुधार हुआ है। घाटी में मोहल्ला स्तर पर राहत और बचाव कार्य शुरू करने की रणनीति बनाई गई है।

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हाईवे खोलना सेना की प्राथमिकता

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बाढ़ पीड़‌ितों को अब तक सेना की तरफ से दस हजार कंबल बांटे जा चुके हैं। अतिरिक्त नाव भी मंगवाई गई है। संभावना है देर रात तक सौ के करीब नाव पहुंच जाएगी। श्रीनगर में सबसे पहले झेलम किनारे बसे लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने का काम जारी है। सेना की प्राथमिकता है कि जम्मू-श्रीनगर हाईवे खोला जा सके।

रामसू में भूस्खलन के कारण रास्ता बंद है। उसे अगले चार-पांच दिनों में खोल दिया जाएगा। पुंछ का भी रास्ता बंद है। अगर बारिश नहीं हुई तो एक सप्ताह में सभी मार्ग खुल जाएंगे। जबकि कश्मीर में हालात सामान्य होने में अभी वक्त लगेगा। सेना के दौ सौ ग्रुप राहत कार्य में लगे हैं।

इस आपदा में राहत और बचाव कार्य करना सेना के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। बादामी बाग में ही बुजुर्ग, महिलाएं, नवजात आदि लोग हैं, जिन्हें स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है। सबसे बड़ी दिक्कत है कि कोई संचार व्यवस्था काम नहीं कर रही है।

देश भर से कटा श्रीनगर

death toll may rise in srinagar

श्रीनगर में टेलीफोन सेवा ठप हो चुकी है और इलाके का देश भर से संपर्क टूट गया है। सेना अपने तौर पर लोगों को निकाल रही है। इस अभियान के दौरान नाव में सवार सेना के ग्यारह लोग भी बह गए, जिनमें से नौ बच गए और अभी भी दो जवान लापता है।

सेना की इंजीनियरिंग विंग पूरी तरह से सक्रिय है। सड़क निर्माण, संचार व्यवस्था आदि ठीक करना सेना की प्राथमिकता है। सिविल प्रशासन से पूरा तालमेल रखा जा रहा है।

तीन सितंबर से सेना लगातार आपरेशन मेघ राहत के तहत काम कर रही है। हेलीकाप्टर से लगातार राहत कार्य चलाया जा रहा है।

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