बिटिया इतनी बोझ थी कि अस्पताल में छोड़ भागे मां-बाप
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यकीन नहीं होता मंदिरों का शहर कहे जाने वाले जम्मू के लोग क्या इतने निर्दयी भी हो सकते हैं कि एक नवजात को अस्पताल में लावारिश छोड़कर फरार हो जाएं।
मंदिरों के शहर में बच्चों के लावारिस हालत में मिलने का सिलसिला थम नहीं रहा। झाड़ियों, मंदिर और बस में बच्चों के मिलने के बाद मंगलवार को एसएमजीएस अस्पताल के निको वार्ड में आठ दिन की बच्ची के लावारिस हालत में मिलने का मामला प्रकाश में आया है।
बताया जाता है कि पहली अक्तूबर को निको वार्ड में बच्ची को भर्ती करवाने के बाद उसके मां-बाप फरार हो गए। बच्ची की देखभाल कर रहे डाक्टर और नर्स का कहना है कि बच्ची 29 सितंबर को इसी अस्पताल में पैदा हुई थी।
निको वार्ड में बच्ची को छोड़ मां-बाप फरार
पहली अक्तूबर को उसकापिता निको वार्ड में भर्ती करवाने के लिए पहुंचा। उन्होंने बताया कि निको वार्ड में भर्ती होने वाले बच्चों के अभिभावक या परिवार के किसी एक सदस्य को निको वार्ड द्वारा दिए टोकन नंबर के साथ वार्ड के बाहर रहना पड़ता है।
ड्यूटी दे रहे कर्मचारियों ने बताया कि पहली अक्तूबर को कुछ देर तक बच्ची का पिता वार्ड के बाहर बैठा रहा। उसके बाद गायब हो गया। कर्मियों को लगा कि शायद वह पत्नी के पास गया होगा।
लेकिन काफी दिन गुजर जाने के बाद कोई नहीं पहुंचा, तो अस्पताल प्रशासन को इस बारे में जानकारी दी गई। जांच-पड़ताल में भी मां-बाप के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पायी है।
अस्पताल प्रशासन कर रहा देखभाल
बच्ची की फाइल (वी2-53694) पर उसके पैदा होने की तिथि के साथ पिता का नाम बिलाल और पता राजौरी का डीएम पुरा लिखा है। मामले में पुलिस ने छानबीन शुरू कर दी है।
लिखाए गए पते और फोन नंबर के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। हालांकि राजौरी में डीएम पुरा नाम जैसे क्षेत्र को लेकर संदेह बना हुआ है। एसएमजीएस अस्पताल की सीएमओ डा. निशा ने बताया कि पहली अक्तूबर से बच्ची के मां-बाप का पता नहीं चल पा रहा है।
फाइल पर लिखे फोन नंबर पर संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन हर बार स्विच ऑफ मिला। उन्होंने बताया कि अस्पताल प्रशासन की ओर से बच्ची की देखभाल की जा रही है।
चार माह की बच्ची बनी कई की ‘उम्मीद’
दूसरी ओर एक दिन पूर्व बस स्टैंड में लावारिस हालत में मिली चार माह की बच्ची को अपनाने वालों की भी कमी नहीं है। एसएमजीएस अस्पताल के उन्नीस नंबर वार्ड के आईसोलेशन रूम में भर्ती बच्ची अब हर परिवार की ‘उम्मीद’ बनने लगी है।
मंगलवार को डाक्टरों ने बच्ची का स्वास्थ्य परीक्षण करने के बाद उसे स्वस्थ बताया। बच्ची सोमवार को बस स्टैंड में छंब रूट की बस से मिली थी। स्थानीय थाने के पुलिसकर्मियों ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया था। वहीं अखबार के माध्यम से बच्ची के बारे में जानकारी मिलने के बाद उसे गोद लेने के लिए कई परिवार पहुंचने लगे हैं।
बच्ची की देखभाल और सुरक्षा के लिए महिला पुलिसकर्मी को तैनात किया गया है। बस स्टैंड के पुलिस थाने के एसएचओ अजित सिंह ने बताया कि थाने में सुबह से बारह के करीब परिवारों ने बच्ची को गोद लेने की बात की।
वहीं उन्होंने बताया कि अब बच्ची को गोद लेने का मामला कोर्ट के पास है। एसएचओ के अनुसार पुलिस की ओर से मामले में छानबीन भी जारी है। उन्होंने बताया कि बस स्टैंड में लगे सीसीटीवी फुटेज को भी खंगाला जा रहा है।